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Kanpur News: नवजात शिशुओं की मुस्कान को थमने नहीं देगा नन्हे कदम ऐप
Wed, 18 Feb 2026 01:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 18 Feb 2026 01:36 AM IST
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कानपुर देहात। शून्य से दो माह तक के बच्चों की मृत्यु दर व नवजात शिशुओं की मुस्कान को थमने से रोकने के लिए बिल गेट्स फाउंडेशन की ओर से नन्हे कदम ऐप तैयार किया गया है। इसको पायलट प्रोजेक्ट के तहत सरवनखेड़ा ब्लॉक के छह जन आरोग्य मंदिर में शुरू किया गया है। ऐप के जरिये विशेषज्ञ क्षेत्र के मासूमों की प्रतिदिन मॉनीटरिंग करेंगे। साथ ही नवजात को परेशानी होने पर माताएं एक क्लिक से विशेषज्ञों से सलाह ले सकेंगी। जरूरत पड़ने पर उनको अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया जाएगा। प्रोजेक्ट सफल होने पर इसे पूरे प्रदेश व देश में क्रियान्वित किया जाएगा।
बिल गेट्स फाउंडेशन के तहत गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज कानपुर नगर के बाल रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव व इंजीनियर मनीष त्रिपाठी की ओर से ''''''''नन्हे कदम'''''''' नामक एक मोबाइल एप्लिकेशन तैयार किया गया है। मंगलवार को दोनों लोगों ने पीएचसी सरवनखेड़ा में अधीक्षक डॉ. राकेश यादव की मौजूदगी में ऐप को पायलट प्रोजेक्ट के तहत सरवनखेड़ा ब्लॉक में लांच किया।
पीएचसी अधीक्षक डॉ. राकेश यादव ने बताया कि शून्य से दो माह तक के बच्चे बहुत की कोमल होते हैं। इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है, कई बार बच्चों का जन्म तय समय से पहले हो जाता हैं या कोई जन्मजात बीमारी से ग्रसित होते हैं। ऐसे में इनको सुरक्षित रखने के लिए नन्हे कदम ऐप तैयार किया गया है। जिससे नवजातों के मृत्युदर पर अंकुश लगाया जा सके। इस ऐप को ब्लॉक के गजनेर, भरतपुर पियासी, सैंथा, मोहाना, जिठरौली व भदेसा आरोग्य मंदिर क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू कर दिया है।
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इस ऐप के जरिये नवजात की माताओं को प्रतिदिन सुबह 11 बजे सात प्रश्नों के जवाब हां या नहीं में देना है। समस्या के पक्ष में जवाब देने पर तुरंत इमरजेंसी एसओएस सक्रिय हो जाएगा और समस्या को लेकर संबंधित आशा, सीएचओ, ब्लॉक अधीक्षक व मेडिकल कॉलेज में अलार्म बजेगा। इस पर सीएचओ नवजात की मां से संपर्क कर शिशु की समस्या के बारे में जानकारी लेकर निदान करवाएगी। यदि किसी कारणवश सीएचओ एक घंटे तक कोई जवाब नहीं देती है तो ब्लॉक व मेडिकल कॉलेज के स्तर से शिशु की मां से संपर्क किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर प्राथमिकता के साथ नवजात को अस्पताल में भर्ती कर उपचार भी दिया जाएगा। जिससे उसकी जान पर आने वाला संकट टल सके।
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सीएचओ व आशाओं को मिला प्रशिक्षण
ऐप को बनाने वाले इंजीनियर मयंक त्रिपाठी ने मंगलवार को पीएचसी परिसर में संबंधित क्षेत्र की सीएचओ व आशा कार्यकर्ताओं के मोबाइल में ऐप को डाउनलोड करवाया। साथ ही एप्लीकेशन के संचालन को लेकर ट्रेनिंग दी गई। उन्होंने बताया कि इस एप्लीकेशन को संबंधित माता को लिंक शेयर करके डाउनलोड करवाने के बाद मोबाइल नंबर के जरिये लॉगइन आईडी तैयार करनी है। इसके बाद उनको बच्चे के दो माह के होने तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे सात सवालों के जवाब हां या नहीं ऑनलाइन भरने के बाद सबमिट कर देने हैं। सवाल शिशु की माता को स्क्रीन दिखने के साथ बोलकर भी सुनाए जाएंगे। 24 घंटे में किसी भी वक्त शिशु की सेहत गड़बड़ होती है तो बच्चे की माता ऐप पर इमरजेंसी एसओएस की बटन दबानी है। इससे उसे तुरंत मदद मिलेगी। डॉ. राकेश यादव ने बताया कि ऐप के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने व आने वाली समस्याओं के निदान के लिए विशेषज्ञों की ओर मंगलवार को दोबारा से बैठक की जाएगी।
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इन प्रश्नों के हां या न में देने हैं जवाब
पीएचसी अधीक्षक डॉ. राकेश यादव ने बताया कि बच्चों की सेहत पर आने वाले खतरों को समझने के लिए विशेषज्ञों की ओर से सात बिंदुओं को तैयार किया गया है। इन सात प्रश्नों को सिंबल ऑफ डेंजर का नाम दिया है जोकि बच्चों में सामान्यता देखने से ही समझ में आ जाते हैं।
1- बच्चा दूध नहीं पी रहा है ?
2- बच्चे का शरीर ठंडा तो नहीं पड़ रहा है?
3- बच्चा अत्यधिक गर्म, बुखार तो नहीं है?
4- बच्चा सुस्त तो नहीं है?
5- बच्चा उल्टी तो नहीं कर रहा है?
6- बच्चे को झटके तो नहीं आ रहे हैं?
7- बच्चे का सीना तो नहीं धंस रहा है?
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बिल गेट्स फाउंडेशन के तहत गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज कानपुर नगर के बाल रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव व इंजीनियर मनीष त्रिपाठी की ओर से ''''''''नन्हे कदम'''''''' नामक एक मोबाइल एप्लिकेशन तैयार किया गया है। मंगलवार को दोनों लोगों ने पीएचसी सरवनखेड़ा में अधीक्षक डॉ. राकेश यादव की मौजूदगी में ऐप को पायलट प्रोजेक्ट के तहत सरवनखेड़ा ब्लॉक में लांच किया।
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पीएचसी अधीक्षक डॉ. राकेश यादव ने बताया कि शून्य से दो माह तक के बच्चे बहुत की कोमल होते हैं। इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है, कई बार बच्चों का जन्म तय समय से पहले हो जाता हैं या कोई जन्मजात बीमारी से ग्रसित होते हैं। ऐसे में इनको सुरक्षित रखने के लिए नन्हे कदम ऐप तैयार किया गया है। जिससे नवजातों के मृत्युदर पर अंकुश लगाया जा सके। इस ऐप को ब्लॉक के गजनेर, भरतपुर पियासी, सैंथा, मोहाना, जिठरौली व भदेसा आरोग्य मंदिर क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू कर दिया है।
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इस ऐप के जरिये नवजात की माताओं को प्रतिदिन सुबह 11 बजे सात प्रश्नों के जवाब हां या नहीं में देना है। समस्या के पक्ष में जवाब देने पर तुरंत इमरजेंसी एसओएस सक्रिय हो जाएगा और समस्या को लेकर संबंधित आशा, सीएचओ, ब्लॉक अधीक्षक व मेडिकल कॉलेज में अलार्म बजेगा। इस पर सीएचओ नवजात की मां से संपर्क कर शिशु की समस्या के बारे में जानकारी लेकर निदान करवाएगी। यदि किसी कारणवश सीएचओ एक घंटे तक कोई जवाब नहीं देती है तो ब्लॉक व मेडिकल कॉलेज के स्तर से शिशु की मां से संपर्क किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर प्राथमिकता के साथ नवजात को अस्पताल में भर्ती कर उपचार भी दिया जाएगा। जिससे उसकी जान पर आने वाला संकट टल सके।
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सीएचओ व आशाओं को मिला प्रशिक्षण
ऐप को बनाने वाले इंजीनियर मयंक त्रिपाठी ने मंगलवार को पीएचसी परिसर में संबंधित क्षेत्र की सीएचओ व आशा कार्यकर्ताओं के मोबाइल में ऐप को डाउनलोड करवाया। साथ ही एप्लीकेशन के संचालन को लेकर ट्रेनिंग दी गई। उन्होंने बताया कि इस एप्लीकेशन को संबंधित माता को लिंक शेयर करके डाउनलोड करवाने के बाद मोबाइल नंबर के जरिये लॉगइन आईडी तैयार करनी है। इसके बाद उनको बच्चे के दो माह के होने तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे सात सवालों के जवाब हां या नहीं ऑनलाइन भरने के बाद सबमिट कर देने हैं। सवाल शिशु की माता को स्क्रीन दिखने के साथ बोलकर भी सुनाए जाएंगे। 24 घंटे में किसी भी वक्त शिशु की सेहत गड़बड़ होती है तो बच्चे की माता ऐप पर इमरजेंसी एसओएस की बटन दबानी है। इससे उसे तुरंत मदद मिलेगी। डॉ. राकेश यादव ने बताया कि ऐप के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने व आने वाली समस्याओं के निदान के लिए विशेषज्ञों की ओर मंगलवार को दोबारा से बैठक की जाएगी।
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इन प्रश्नों के हां या न में देने हैं जवाब
पीएचसी अधीक्षक डॉ. राकेश यादव ने बताया कि बच्चों की सेहत पर आने वाले खतरों को समझने के लिए विशेषज्ञों की ओर से सात बिंदुओं को तैयार किया गया है। इन सात प्रश्नों को सिंबल ऑफ डेंजर का नाम दिया है जोकि बच्चों में सामान्यता देखने से ही समझ में आ जाते हैं।
1- बच्चा दूध नहीं पी रहा है ?
2- बच्चे का शरीर ठंडा तो नहीं पड़ रहा है?
3- बच्चा अत्यधिक गर्म, बुखार तो नहीं है?
4- बच्चा सुस्त तो नहीं है?
5- बच्चा उल्टी तो नहीं कर रहा है?
6- बच्चे को झटके तो नहीं आ रहे हैं?
7- बच्चे का सीना तो नहीं धंस रहा है?