{"_id":"570aaa034f1c1be470c810e9","slug":"the-master-of-tank","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस गुमनाम टंकी का मालिक कौन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस गुमनाम टंकी का मालिक कौन
अमर उजाला ब्यूरो कानपुर।
Updated Mon, 11 Apr 2016 01:01 AM IST
विज्ञापन
इंदिरा में अंडरग्राउंड वाटर टैंक।
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आशुतोष मिश्र
कानपुर। शहर में गंभीर जल संकट है लेकिन अफसर आंख-कान मूंदे हैं। हाल देखिए कि इंदिरानगर स्टेट बैंक के सामने 1980 से पहले करीब 150 फीट चौड़ी और 180 फीट लंबी अंडरग्राउंड पानी की टंकी बनवाई गई थी लेकिन इससे आज तक एक बूंद पानी ही नहीं सप्लाई किया गया। हास्यास्पद बात यह कि कोई भी विभाग जानता ही नहीं कि टंकी किसकी है।
शहर में पेयजल संकट के मद्देनजर ‘अमर उजाला’ ने खोजबीन की तो यह गुमनाम टंकी सामने आई। टंकी परिसर में दोमंजिले 17 क्वार्टर भी बने हैं। एक क्वार्टर में सालों से एक सेवानिवृत्त कर्मचारी परिवार समेत रहता है। यह कर्मचारी भी टंकी की तरह गुमनामी का चोला ओढ़े है। कर्मचारी किस विभाग का है, यहां क्यों रहता है, कबसे रहता है, कोई रिकार्ड नहीं। और तो और कर्मचारी किसी को भी परिसर के अंदर घुसने ही नहीं देता, सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भी नहीं।
इंदिरानगर निवासी ज्ञान प्रकाश अग्रवाल ने जलकल विभाग में इसकी शिकायत की तो कहा गया कि इस टंकी का मालिकाना हक उनके पास नहीं है।
नगर निगम से शिकायत की गई तो कहा गया कि इसका मालिकाना हक केडीए के पास है। ज्ञान प्रकाश अग्रवाल ने केडीए में आरटीआई डालकर पूछा कि इस टंकी का क्षेत्रफल क्या है, निर्माण कब हुआ था और कितनी लागत आई थी तो केडीए के अधिशाषी अभियंता (जोन एक) ने जवाब दिया कि टंकी 1980 के पहले की है। उस समय लागू नियमों के अनुसार संबंधित दस्तावेज रखने या न रखने की कोई समयसीमा नहीं थी इसलिए दस्तावेज लापता हो गए। लिहाजा टंकी के संबंध में कोई सूचना देना संभव नहीं है। उनका कहना है कि टंकी का रखरखाव जलकल विभाग के पास है। ‘अमर उजाला’ के सवाल-जवाब करने पर नगर निगम के अफसर एके निगम टंकी पर पहुंचे और मौका-मुआयना कर कहा कि टंकी जलकल विभाग की है। उन्होंने जलकल के जेई रमेश चंद्रा को बुलाया। उन्होंने देखा और कहा कि टंकी परिसर का मालिकाना हक जलकल का नहीं है।
विज्ञापन
विश्वबैंक में 25 साल से ठूंठ खड़ी है टंकी
कानपुर (ब्यूरो)। विश्वबैंक कालोनी के-सेक्टर रामलीला मैदान में पानी की एक टंकी 25 साल से ठूंठ बनी खड़ी है। विधायक और पार्षद के हस्तक्षेप पर जलकल विभाग को अब इस टंकी की सुध आई है। यह टंकी चालू होने से करीब 10 हजार की लोगों को पर्याप्त पानी मिल सकता है। केडीए ने विश्वबैंक कालोनी विकसित करते समय 1990 में यह टंकी बनवाई थी, पर उसे चालू नहीं किया। इसकी क्षमता पांच हजार किलोलीटर है। लगभग 15 साल पहले केडीए ने इसे जल संस्थान (अब जलकल विभाग) को हैंडओवर किया। जलकल विभाग ने भी इस टंकी को चालू नहीं कराया। जल निगम ने इसी पार्क में चार साल पहले पांच हजार किलोलीटर क्षमता की एक और टंकी बनाई, जिससे एक महीने पहले जलापूर्ति शुरू की। क्षेत्रीय पार्षद रानू वाजपेयी की शिकायत पर 18 दिन पहले नगर आयुक्त देवेंद्र सिंह कुशवाहा ने मौका-मुआयना किया। नगर आयुक्त ने जलकल विभाग के महाप्रबंधक जवाहर राम को मौके पर बुलाया, तब उन्होंने स्वीकार किया कि यह टंकी उनके विभाग की है। 9 अप्रैल को आश्वासन समिति के चेयरमैन की समीक्षा में भी यह मामला उठा था।
विज्ञापन
कानपुर। शहर में गंभीर जल संकट है लेकिन अफसर आंख-कान मूंदे हैं। हाल देखिए कि इंदिरानगर स्टेट बैंक के सामने 1980 से पहले करीब 150 फीट चौड़ी और 180 फीट लंबी अंडरग्राउंड पानी की टंकी बनवाई गई थी लेकिन इससे आज तक एक बूंद पानी ही नहीं सप्लाई किया गया। हास्यास्पद बात यह कि कोई भी विभाग जानता ही नहीं कि टंकी किसकी है।
शहर में पेयजल संकट के मद्देनजर ‘अमर उजाला’ ने खोजबीन की तो यह गुमनाम टंकी सामने आई। टंकी परिसर में दोमंजिले 17 क्वार्टर भी बने हैं। एक क्वार्टर में सालों से एक सेवानिवृत्त कर्मचारी परिवार समेत रहता है। यह कर्मचारी भी टंकी की तरह गुमनामी का चोला ओढ़े है। कर्मचारी किस विभाग का है, यहां क्यों रहता है, कबसे रहता है, कोई रिकार्ड नहीं। और तो और कर्मचारी किसी को भी परिसर के अंदर घुसने ही नहीं देता, सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भी नहीं।
विज्ञापन
इंदिरानगर निवासी ज्ञान प्रकाश अग्रवाल ने जलकल विभाग में इसकी शिकायत की तो कहा गया कि इस टंकी का मालिकाना हक उनके पास नहीं है।
नगर निगम से शिकायत की गई तो कहा गया कि इसका मालिकाना हक केडीए के पास है। ज्ञान प्रकाश अग्रवाल ने केडीए में आरटीआई डालकर पूछा कि इस टंकी का क्षेत्रफल क्या है, निर्माण कब हुआ था और कितनी लागत आई थी तो केडीए के अधिशाषी अभियंता (जोन एक) ने जवाब दिया कि टंकी 1980 के पहले की है। उस समय लागू नियमों के अनुसार संबंधित दस्तावेज रखने या न रखने की कोई समयसीमा नहीं थी इसलिए दस्तावेज लापता हो गए। लिहाजा टंकी के संबंध में कोई सूचना देना संभव नहीं है। उनका कहना है कि टंकी का रखरखाव जलकल विभाग के पास है। ‘अमर उजाला’ के सवाल-जवाब करने पर नगर निगम के अफसर एके निगम टंकी पर पहुंचे और मौका-मुआयना कर कहा कि टंकी जलकल विभाग की है। उन्होंने जलकल के जेई रमेश चंद्रा को बुलाया। उन्होंने देखा और कहा कि टंकी परिसर का मालिकाना हक जलकल का नहीं है।
विज्ञापन
विश्वबैंक में 25 साल से ठूंठ खड़ी है टंकी
कानपुर (ब्यूरो)। विश्वबैंक कालोनी के-सेक्टर रामलीला मैदान में पानी की एक टंकी 25 साल से ठूंठ बनी खड़ी है। विधायक और पार्षद के हस्तक्षेप पर जलकल विभाग को अब इस टंकी की सुध आई है। यह टंकी चालू होने से करीब 10 हजार की लोगों को पर्याप्त पानी मिल सकता है। केडीए ने विश्वबैंक कालोनी विकसित करते समय 1990 में यह टंकी बनवाई थी, पर उसे चालू नहीं किया। इसकी क्षमता पांच हजार किलोलीटर है। लगभग 15 साल पहले केडीए ने इसे जल संस्थान (अब जलकल विभाग) को हैंडओवर किया। जलकल विभाग ने भी इस टंकी को चालू नहीं कराया। जल निगम ने इसी पार्क में चार साल पहले पांच हजार किलोलीटर क्षमता की एक और टंकी बनाई, जिससे एक महीने पहले जलापूर्ति शुरू की। क्षेत्रीय पार्षद रानू वाजपेयी की शिकायत पर 18 दिन पहले नगर आयुक्त देवेंद्र सिंह कुशवाहा ने मौका-मुआयना किया। नगर आयुक्त ने जलकल विभाग के महाप्रबंधक जवाहर राम को मौके पर बुलाया, तब उन्होंने स्वीकार किया कि यह टंकी उनके विभाग की है। 9 अप्रैल को आश्वासन समिति के चेयरमैन की समीक्षा में भी यह मामला उठा था।