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लोकसभा में फिर गूंजा बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा

Mon, 07 Feb 2022 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 07 Feb 2022 11:57 PM IST
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The issue of Bundelkhand state resonated in the Lok Sabha
महोबा। विधानसभा चुनाव के बीच एक बार फिर से पृथक बुंदेलखंड राज्य बनाए जाने का मुद्दा गरम हो गया है। हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी के सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने लोकसभा में अपने निजी विधेयक के माध्यम से बुंदेलखंड राज्य की मांग को पुरजोर तरीके से रखा। उन्होंने कहाकि बुंदेले लंबे समय से पृथक राज्य की मांग कर रहे हैं। अति लोक महत्व के मुद्दों पर चर्चा के दौरान 8 फरवरी 2019, 4 फरवरी 2021, 12 फरवरी 2021, 26 जुलाई 2021 को बुंदेली संस्कृति को मान दिलाने वाले इस विषय को सदन में उठा चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड संस्कृति की रक्षा के लिए बुंदेलखंड राज्य का गठन करना आवश्यक है। सांस्कृतिक पक्ष के आधार पर आजादी के बाद राज्यों का निर्माण होना कोई नई बात नहीं हैं। इन राज्यों ने अपने सांस्कृतिक आधार को मजबूत करते हुए तेज सर्वंगीण विकास किया और अपनी पहचान देश और विदेश में बनाई। इस क्रम में चाहे भाषाई आधार पर बना प्रथम राज्य आंध्र प्रदेश हो और फिर महाराष्ट्र से अलग होकर बना गुजरात हो। बुंदेलखंड ही देश का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जिसका समान सांस्कृतिक क्षेत्र दो राज्यों में बंटा हुआ है। यह क्षेत्र बहुत मुश्किल से अपनी सांस्कृतिक विरासत को संभाले हुए है। यदि इस क्षेत्र में हो रहे तेज आर्थिक विकास को अलग राज्य के रूप सांस्कृतिक आधार और पहचान मिल जाए तो वनवास काल में प्रभु श्रीराम की शरण स्थली रही पावन भूमि और वीर आल्हा-ऊदल की कर्मभूमि- बुंदेलखंड अपने विकास के साथ साथ देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
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केन-बेतवा प्रोजेक्ट में भी रही भूमिका
शुक्रवार को संसद में इस मुद्दे की गूंज पर बीजेपी के जिला मीडिया प्रभारी शशांक गुप्ता का कहना है कि वर्ष 2019 में भी सांसद पुष्पेंद्र सिंह ने योग दिवस पर सदन में केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट का मुद्दा उठाया था। उसका परिणाम बुंदेलखंड की जनता देख रही है। 45 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना के प्रारम्भ होने का मार्ग प्रशस्त हो सका है। अब बुंदेलखंड की जनता को उम्मीद है कि सांसद का यह प्रयास भी फलीभूत होगा और बुंदेलखंड राज्य बन सकेगा ।
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प्रथक राज्य के लिए कर रहे हठयोग
बुंदेलखंड राज्य के लिए बुंदेली समाज के तारा पाटकर का कहना है कि छह साल से नंगे पैर चलकर हठयोग सत्याग्रह कर रहे हैं। 635 दिन लगातार अनशन कर चुके हैं। 25 बार खून से खत लिखकर प्रधानमंत्री को भेज चुके हैं। इस मुद्दे पर सभी बुंदेलखंड के सभी सांसदों को एकजुट होना चाहिए।
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