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Kanpur News: शहर में नदियों के प्रवेश और निकासी का एक जैसा हो स्वरूप
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कानपुर। आईआईटी कानपुर के सी-गंगा (गंगा बेसिन प्रबंधन एवं अध्ययन केंद्र) और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से आईआईटी दिल्ली के ऑडीटोरियम में तीन दिवसीय 10वां इंडिया वाटर इम्पैक्ट समिट मंगलवार से शुरू हुआ। 11 दिसंबर तक चलने वाले समिट का मुख्य विषय खंडित प्रयासों से सुप्रबंधकता तक : भारत के जल भविष्य के लिए जिला नदी प्रबंधन योजनाएं गढ़ना है।
पहले दिन सी-गंगा की ओर से तैयार गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट प्लान 2.0 को जारी किया गया। वैज्ञानिकों ने नदियों के आने-जाने का स्वरूप समान रखने की जिम्मेदारी जिला समिति को सौंपने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि गंगा या अन्य नदियां जिस स्वरूप में किसी शहर में प्रवेश करें तो उसकी निकासी भी उसी स्वरूप या और बेहतर स्वरूप में हो।
इसमें जलस्तर, जल में प्रदूषण जैसे सभी मानकों को परखा जाए तभी नदियों को अविरल, निर्मल व संरक्षित किया जा सकता है। सी-गंगा के संस्थापक डॉ. विनोद तारे ने कहा कि जिला नदी प्रबंधन परियोजना को एक जिले की भौगोलिक सीमा में होने वाली सभी मानवीय गतिविधियों के बारे में जानकारी होती है, इसलिए इसका प्रबंधन करना आसान है। समिट के साथ ही क्लाइमेट इंवेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी इम्पैक्ट समिट का भी आयोजन हुआ।
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पहले दिन सी-गंगा की ओर से तैयार गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट प्लान 2.0 को जारी किया गया। वैज्ञानिकों ने नदियों के आने-जाने का स्वरूप समान रखने की जिम्मेदारी जिला समिति को सौंपने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि गंगा या अन्य नदियां जिस स्वरूप में किसी शहर में प्रवेश करें तो उसकी निकासी भी उसी स्वरूप या और बेहतर स्वरूप में हो।
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इसमें जलस्तर, जल में प्रदूषण जैसे सभी मानकों को परखा जाए तभी नदियों को अविरल, निर्मल व संरक्षित किया जा सकता है। सी-गंगा के संस्थापक डॉ. विनोद तारे ने कहा कि जिला नदी प्रबंधन परियोजना को एक जिले की भौगोलिक सीमा में होने वाली सभी मानवीय गतिविधियों के बारे में जानकारी होती है, इसलिए इसका प्रबंधन करना आसान है। समिट के साथ ही क्लाइमेट इंवेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी इम्पैक्ट समिट का भी आयोजन हुआ।
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