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Kanpur News: स्टेपलर विधि से हैलट में की गई पहली सर्जरी
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माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। हैलट के सर्जरी विभाग में पहली बार पीनाइल फाइमोसिस की सर्जरी की गई है। इसमें स्टेपलर विधि अपनाई गई। इस विधि से फायदा यह है कि व्यक्ति को तुरंत अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। संक्रमण का खतरा नहीं रहता। इस विधि से खतना भी आसानी से हो जाता है। सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जीडी यादव ने बताया कि शहर में यह विधि पहली बार अपनाई गई। बाहर निजी क्षेत्र के अस्पताल में 25 से 30 हजार रुपये खर्च आता है।
पीनाइल फाइमोसिस रोग में व्यक्ति शिश्न के ऊपर की त्वचा कड़ी हो जाती है। इससे यह पीछे की तरफ नहीं आती है। इससे संक्रमण फैलने, सूजन आने तथा ह्युमन पेपिलोमा वायरस का संक्रमण होने का खतरा रहता है। इससे फाइमोसिस कैंसर भी हो सकता है। अभी तक इसका ऑपरेशन होता है। इसमें व्यक्ति को एक-दो दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता था। साथ ही घाव पकने पर और दिक्कत बढ़ जाती रही लेकिन स्टेपलर विधि से यह आसान हो गया। इस विधि से हैलट में दो रोगियों की सर्जरी की गई।
डॉ. यादव का कहना है कि फाइमोसिस की सर्जरी के अलावा इससे खतना करना आसान हो गया है। इसके लिए एक विशेष उपकरण होता है जिससे सर्जरी की यह विधि अपनाई जाती है। इसमें समय भी कम लगता है। व्यक्ति को अधिक दिक्कत नहीं होती। उसे कुछ देर के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। हैलट में निशुल्क ऑपरेशन किया जा रहा है। स्टेपलर विधि से सर्जरी करने में डॉ. यादव के साथ सीनियर रेजीडेंट डॉ. अनिरुद्ध और डॉ. मुकेश रहे।
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कानपुर। हैलट के सर्जरी विभाग में पहली बार पीनाइल फाइमोसिस की सर्जरी की गई है। इसमें स्टेपलर विधि अपनाई गई। इस विधि से फायदा यह है कि व्यक्ति को तुरंत अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। संक्रमण का खतरा नहीं रहता। इस विधि से खतना भी आसानी से हो जाता है। सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जीडी यादव ने बताया कि शहर में यह विधि पहली बार अपनाई गई। बाहर निजी क्षेत्र के अस्पताल में 25 से 30 हजार रुपये खर्च आता है।
पीनाइल फाइमोसिस रोग में व्यक्ति शिश्न के ऊपर की त्वचा कड़ी हो जाती है। इससे यह पीछे की तरफ नहीं आती है। इससे संक्रमण फैलने, सूजन आने तथा ह्युमन पेपिलोमा वायरस का संक्रमण होने का खतरा रहता है। इससे फाइमोसिस कैंसर भी हो सकता है। अभी तक इसका ऑपरेशन होता है। इसमें व्यक्ति को एक-दो दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता था। साथ ही घाव पकने पर और दिक्कत बढ़ जाती रही लेकिन स्टेपलर विधि से यह आसान हो गया। इस विधि से हैलट में दो रोगियों की सर्जरी की गई।
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डॉ. यादव का कहना है कि फाइमोसिस की सर्जरी के अलावा इससे खतना करना आसान हो गया है। इसके लिए एक विशेष उपकरण होता है जिससे सर्जरी की यह विधि अपनाई जाती है। इसमें समय भी कम लगता है। व्यक्ति को अधिक दिक्कत नहीं होती। उसे कुछ देर के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। हैलट में निशुल्क ऑपरेशन किया जा रहा है। स्टेपलर विधि से सर्जरी करने में डॉ. यादव के साथ सीनियर रेजीडेंट डॉ. अनिरुद्ध और डॉ. मुकेश रहे।
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