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Kanpur News: डिग्री कॉलेजों में दाखिलों की स्थिति दयनीय

Thu, 19 Jun 2025 01:54 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Jun 2025 01:54 AM IST
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The condition of admissions in degree colleges is pathetic
केस : 01 श्री रामप्रकाश पोरवाल महाविद्यालय रायपुर, कानपुर देहात में दो महीने में मात्र तीन दाखिले हुए हैं। कॉलेज में बीएससी में 360 और बीए में 340 सीटें हैं। यह तीन दाखिले भी बीएससी में हुए हैं, बीए में तो अभी प्रवेश की शुरुआत तक नहीं हुई। पिछले वर्ष भी दाखिलों की स्थिति ठीक नहीं थी।
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केस : 02
नौबस्ता स्थित लल्लू सिंह महाविद्यालय में अभी तक 50 दाखिले हुए हैं। यहां बीएससी में 320 और बीए में 560 सीटें हैं। कॉलेज का कहना है कि छात्रों की संख्या हर साल गिरती जा रही है। छात्र अब प्रोफेशनल कोर्स की ओर भाग रहे हैं। शिक्षक और कॉलेज मिलकर प्रयास कर रहे, फिर भी संख्या नहीं बढ़ रही है।
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केस : 03
हरसहाय जगदंबा सहाय डिग्री कॉलेज में भी दाखिलों की स्थिति काफी खराब है। कॉलेज में बीएससी में 420 और बीकॉम में 240 सीटों के सापेक्ष अभी मात्र 50 दाखिले ही हुए हैं। आसपास के इंटर कॉलेजों से भी संपर्क स्थापित करने के बाद भी दाखिलों में वृद्धि नहीं हो रही है।
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माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि से संबद्ध डिग्री कॉलेजों में दाखिले की स्थिति बदतर होती जा रही है। दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने के दो माह बाद भी दाखिलों की संख्या दहाई को नहीं छू पाई है। वहीं, कई कॉलेज तो ऐसे हैं जहां अब तक एक भी दाखिला नहीं हुआ है। निजी महाविद्यालय हो या अनुदानित डिग्री कॉलेज, सभी दाखिलों की बाट जोह रहे हैं।
सीएसजेएमयू से छह जिलों के करीब 600 कॉलेज संबद्ध है। अप्रैल में इंटरमीडिएट का परिणाम आने के बाद से विवि ने दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। डिग्री कॉलेजों में प्रवेश के लिए छात्रों को पहले समर्थ पर पंजीकरण कराना था। शहर के अनुदानित कॉलेजों में तो दाखिले कछुआ चाल से चल रहे हैं। वहीं, निजी कॉलेजों में भी बहुत कम दाखिले हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने कहा कि प्रदेश के करीब 100 कॉलेज ऐसे हैं, जिनमें किसी-किसी विभाग में एक सीट भी नहीं भरी है। दाखिले काफी न्यूनतम स्तर पर हैं।
श्री रामप्रकाश पोरवाल महाविद्यालय रायपुर के प्रबंधक का कहना है कि अभी तक मात्र तीन सीटें ही भर पाईं हैं। पिछले साल बीएससी में 264 और बीए में 82 सीटें भरी थीं। इस बार तो बीए में दाखिला भी नहीं हुआ है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति रही तो कॉलेज चलाना संभव नहीं होगा।
हरसहाय डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अमर श्रीवास्तव ने कहा कि दाखिले की स्थिति ठीक नहीं है। पिछले साल भी कम दाखिले हुए थे। इस बार भी शुरुआत अच्छी नहीं है। जबकि, छात्रों के लिए रोजगार मेला, नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जा रही है।

यह है कारण
- छात्र-छात्राएं अब साधारण ग्रेजुएशन नहीं बल्कि प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं।
- विवि की नई शिक्षा नीति लागू होने से अब साल में दो बार सेमेस्टर और दो बार समसेमेस्टर परीक्षाएं होती हैं। इससे बचने के लिए ग्रामीण अंचल के छात्र अब ऑनलाइन कोर्स की तरफ जा रहे हैं।
- विवि ने भी ढेरों प्रोफेशनल कोर्स के साथ बीए और बीएससी शुरू कर दिया है।
- विवि में फीस का दायरा काफी बढ़ गया है। पहले समर्थ पर पंजीकरण, दो बार परीक्षा शुल्क, अनिवार्य विषय के नाम पर फीस, अगर छात्र के परिणाम में गड़बड़ी हो तो उसके लिए फीस। इससे छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

विवि का सुझाव
विवि ने कॉलेजों को प्रवेश सुबह आठ बजे से शाम सात बजे तक करने, इंटर कॉलेजों से संपर्क स्थापित करने जैसे कार्य करने का सुझाव दिया है। इस पर कॉलेजों का कहना है कि इंटर कॉलेजों में इस समय ताला है, वहां कैसे छात्रों से संपर्क करें। कुछ कॉलेजों ने लिस्ट लेकर कॉल की भी लेकिन छात्रों ने रुचि नहीं दिखाई।
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