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कमिश्नर से भी झूठ बोलते अफसर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Sat, 23 Jan 2016 02:07 AM IST
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जनता की शिकायतों, समस्याओं को गंभीरता से न लेने और झूठी रिपोर्ट देने से नाराज कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने शुक्रवार को अफसरों की तगड़ी क्लास ली। साफ कहा कि अफसर झूठ बोलते हैं। सबको चार्जशीट देकर सस्पेंड कराया जाएगा।
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बेसिक शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारियों (एबीएसए) की कार्य प्रणाली तो बेहद खराब है। कहा कि अब अति हो गई है। एक-एक करके सबको सबक सिखाया जाएगा। जब अधिकारी कमिश्नर को गुमराह कर रहे हैं तो आम जनता के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे।
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एसडीएम घाटमपुर ने झूठी रिपोर्ट दी
तहसील दिवस की शिकायतों में हीलाहवाली से नाराज कमिश्नर ने कानपुर नगर, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कानपुर देहात और कन्नौज के काम-काज की समीक्षा की। एसडीएम घाटमपुर कमलेश ने जो रिपोर्ट भेजी, उसका सत्यापन कराया तो पता चला कि रिपोर्ट ही फर्जी है।
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घाटमपुर के कोरों गांव के मुन्ना, रामपाल सहित तमाम किसानों ने नि:शुल्क बीज न मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी। यह मामला उप निदेशक कृषि कानपुर मंडल को निस्तारित कराना था लेकिन हुआ नहीं। इस संबंध में एसडीएम घाटमपुर ने जो रिपोर्ट भेजी, वह चौंकाने वाली है।
शिकायत नि:शुल्क बीज की थी लेकिन रिपोर्ट में आवास आवंटन के लिए तहसीलदार को आदेशित करने की बात कही गई है। इसी तरह समग्र गांव निहुरा के सभी घरों में शौचालय की रिपोर्ट दी गई थी, जो कमिश्नर के सत्यापन में फर्जी मिली।
बीडीओ, सहा. अभियंता झूठे
हैंडपंप रिबोर पर भीतरगांव के खंड विकास अधिकारी और जल निगम के सहायक अभियंता की रिपोर्ट भी झूठी मिली। सहायक अभियंता ने कहा कि खेमियापुर गांव में 14 हैंडपंप हैं, जिसमें से चार रिबोर के योग्य हैं।
वहीं, खंड विकास अधिकारी की रिपोर्ट में 21 हैंडपंप लगने और सात हैंडपंप के रिबोर का जिक्र है। इस पर कमिश्नर ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि अफसर फील्ड में जाकर काम करें।
दोनों अफसरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। खेमियापुर में ही सफाई की समस्या पर डीपीआरओ ने कहा सफाई कर्मचारी की तैनाती कर दी गई है, जो कमिश्नर के सत्यापन में सही नहीं मिली। सफाई कर्मचारी दो दिन गया, फिर नदारद है।
भीतरगांव में भी झूठ का दांव
भीतरगांव के बाबूपुरवा निवासी रोहित कुमार ने हैंडपंप दो साल से खराब होने की शिकायत की तो मामले के निस्तारण की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता जल निगम और खंड विकास अधिकारी भीतरगांव को दी गई लेकिन हुआ नहीं।
यही नहीं अफसरों ने झूठ भी बोला। खंड विकास अधिकारी ने 18 हैंडपंप लगने की जानकारी दी और कहा कि आठ रिबोर योग्य एवं 10 चालू हैं। वहीं, सहायक अभियंता जल निगम ने 19 हैंडपंप लगने की जानकारी दी। साथ ही बताया कि तीन हैंडपंप रिबोर योग्य हैं। आठ में छोटी-मोटी कमियां हैं।
भोगनीपुर: घूस नहीं तो मुआवजा नहीं
कानपुर देहात के भोगनीपुर तहसील में मुआवजे का चेक देने में उगाही का मामला पकड़ा गया। पता चला कि घूस न देने पर अमिलिया की बिटोला देवी को 5000 रुपये की जगह 2196 रुपये का चेक दिया गया है।
इस मामले में जांच के आदेश हुए हैं। भोगनीपुर तहसील में भी जनता का कोई काम नहीं हो रहा। आवास आवंटन, मुआवजे का चेक देने, गलत तरीके से दर्ज वरासत में लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई का मामला लटका है। 34 पात्र लोगों को भी पेंशन का लाभ नहीं मिला। राशन वितरण में धांधली पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
हाईडिल का झूठा बिल
बाबूपुरवा में पांच साल से ट्रांसफार्मर खराब हैं, फिर भी लोगों को बिल भेजे जा रहे हैं। अधिशासी अभियंता हाईडिल ने नवंबर 2015 में रिपोर्ट दी और कहा कि बिजली बिल में छूट प्रदान करने के लिए अंतिम बिल निरस्त करने का आदेश दिया गया लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सत्यापन से पता चला कि कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बिल निरस्त हुए या नहीं, इसकी आख्या भी स्पष्ट नहीं है।
इसलिए नहीं डरते अफसर
इंजीनियरों की एनुअल कांफिडेंशियल रिपोर्ट (एसीआर) लिखने का अधिकार अब प्रशासनिक अधिकारियों (आईएएस) के पास नहीं है। इन सबकी एसीआर विभागीय अधिकारी ही लिखते हैं, इसलिए जल निगम, नगर निगम, केडीए, पीडब्लूडी, सेतु निगम सहित तमाम इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अधिकारी कामकाज में रुचि नहीं लेते हैं। पांच साल पहले तक एसीआर प्रशासन के अधिकारी लिखते थे, तब कामकाज तेज होता था।
लेखपाल सस्पेंड
अपनी तैनाती वाले गांव में तीन साल तक ड्यूटी पर न जाने वाले घाटमपुर तहसील क्षेत्र के एक लेखपाल को निलंबित करने का आदेश दिया।