{"_id":"68e0370988ad3f4d4c05c3b1","slug":"the-chip-will-speak-revealing-the-secrets-of-newborn-diseases-kanpur-news-c-362-1-ka11001-132575-2025-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: चिप बोलेगी, नवजातों की बीमारियों का राज खोलेगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: चिप बोलेगी, नवजातों की बीमारियों का राज खोलेगी
विज्ञापन
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में एआई तकनीक से दो महीने से कम उम्र के नवजातों की गंभीर बीमारियों का इलाज अगले महीने से शुरू हो जाएगा। इसके लिए बच्चों के हाथ की कलाई या सीने पर 24 घंटे के लिए चिप लगाई जाएगी जिससे बच्चों के तापमान, सांस की गति, कराहने, पल्स रेट और एसपीओटू की जानकारी होगी। इससे उन्हें गंभीर बीमारियां होने से पहले ही बचाया जा सकेगा।
इस कवायद के लिए करीब साढ़े सात लाख रुपये के बजट की जरूरत है लेकिन छह लाख रुपये बजट ही मिल रहा था। इस कारण इलाज शुरू होने में विलंब हुआ। बजट जारी होते ही चिप बनने का काम शुरू होगा। उम्मीद की जा रही है कि इस महीने साढ़े सात लाख रुपये का बजट मिल जाएगा। मेडिकल कॉलेज के साथ आईआईटी के स्टार्टअप मेडेंट्रिक कंपनी ने समझौता किया है। इसे नेओहेल्थ नाम दिया गया है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. यशवंत कुमार ने बताया कि साढ़े सात लाख रुपये बजट आवंटित होना है। इसके बाद ही इलाज शुरू हो सकेगा। इस चिप से बच्चों में पॉसिबल सीरियस बैक्टीरियल इंफेक्शन (पीएसबीआई) के बारे में पहले से पता लगेगा तो उन्हें इसकी गंभीर स्थिति होने से पहले ही बचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि 100 नवजातों में 10 में ये समस्या होती है। इसकी वजह से 80 प्रतिशत मामलों में अभिभावकों को पता नहीं लगता और बच्चे की हालत अधिक गंभीर हो जाती है। पीएसबीआई में बच्चे की सांस तेज चलती है, तेज बुखार या शरीर ठंडा पड़ जाता है। वह दूध कम पीता और बच्चा सुस्त हो जाता है। ऐसे में चिप की मदद से बच्चे की पूरी जानकारी हमारे पास उपलब्ध होगी और हम उसे सही इलाज दे पाएंगे। बच्चे के शरीर पर ज्यादा वजन भी सही नहीं है। इसलिए छोटी से छोटी और हल्की चिप बनाने की कोशिश की जा रही है। चिप उनके शरीर पर 24 घंटे के लिए चिपकाई जाएगी। नहाते समय उसे हटा देें और उसके बाद उसे फिर से चिपका दिया जाएगा। डॉ. यशवंत ने बताया कि जल्द चिप बाजार में आ जाएगी। आम लोग भी इस चिप के माध्यम से बच्चे की जानकारी ले सकेंगे। इसे लेने के लिए अभिभावक का नाम, पता और मोबाइल नंबर लिया जाएगा। बच्चे की निगरानी करने के बाद उसकी जानकारी हम भी करेंगे। अगर स्थिति गंभीर होने वाली लगेगी तो फोन कर तुरंत बच्चे को भर्ती कराने की जानकारी अस्पताल से देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस कवायद के लिए करीब साढ़े सात लाख रुपये के बजट की जरूरत है लेकिन छह लाख रुपये बजट ही मिल रहा था। इस कारण इलाज शुरू होने में विलंब हुआ। बजट जारी होते ही चिप बनने का काम शुरू होगा। उम्मीद की जा रही है कि इस महीने साढ़े सात लाख रुपये का बजट मिल जाएगा। मेडिकल कॉलेज के साथ आईआईटी के स्टार्टअप मेडेंट्रिक कंपनी ने समझौता किया है। इसे नेओहेल्थ नाम दिया गया है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. यशवंत कुमार ने बताया कि साढ़े सात लाख रुपये बजट आवंटित होना है। इसके बाद ही इलाज शुरू हो सकेगा। इस चिप से बच्चों में पॉसिबल सीरियस बैक्टीरियल इंफेक्शन (पीएसबीआई) के बारे में पहले से पता लगेगा तो उन्हें इसकी गंभीर स्थिति होने से पहले ही बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि 100 नवजातों में 10 में ये समस्या होती है। इसकी वजह से 80 प्रतिशत मामलों में अभिभावकों को पता नहीं लगता और बच्चे की हालत अधिक गंभीर हो जाती है। पीएसबीआई में बच्चे की सांस तेज चलती है, तेज बुखार या शरीर ठंडा पड़ जाता है। वह दूध कम पीता और बच्चा सुस्त हो जाता है। ऐसे में चिप की मदद से बच्चे की पूरी जानकारी हमारे पास उपलब्ध होगी और हम उसे सही इलाज दे पाएंगे। बच्चे के शरीर पर ज्यादा वजन भी सही नहीं है। इसलिए छोटी से छोटी और हल्की चिप बनाने की कोशिश की जा रही है। चिप उनके शरीर पर 24 घंटे के लिए चिपकाई जाएगी। नहाते समय उसे हटा देें और उसके बाद उसे फिर से चिपका दिया जाएगा। डॉ. यशवंत ने बताया कि जल्द चिप बाजार में आ जाएगी। आम लोग भी इस चिप के माध्यम से बच्चे की जानकारी ले सकेंगे। इसे लेने के लिए अभिभावक का नाम, पता और मोबाइल नंबर लिया जाएगा। बच्चे की निगरानी करने के बाद उसकी जानकारी हम भी करेंगे। अगर स्थिति गंभीर होने वाली लगेगी तो फोन कर तुरंत बच्चे को भर्ती कराने की जानकारी अस्पताल से देंगे।
विज्ञापन