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Kanpur News: सात साल से बर्न यूनिट के भवन को खुद के संचालन का इंतजार
Thu, 22 Oct 2026 12:54 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 22 Oct 2026 12:54 AM IST
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कानपुर देहात। जिला अस्पताल परिसर में बनी प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट बदहाली का शिकार है। करीब सात साल पहले जिला अस्पताल को हस्तांतरित किया गया भवन अब तक शुरू नहीं हो सका है। विशेषज्ञ डॉक्टरों, कर्मचारियों और जरूरी उपकरणों की कमी के चलते यूनिट का संचालन शुरू नहीं हुआ। आग से झुलसकर कोई मरीज जिला अस्पताल पहुंचता है तो उसे प्राथमिक उपचार देने के बाद रेफर कर दिया जा रहा है।
जिला अस्पताल परिसर में बर्न यूनिट बनाने की मंजूरी नवंबर 2012 में मिली थी। इसके निर्माण पर करीब 1.96 करोड़ रुपये की लागत आई। वर्ष 2017-18 में भवन बनकर तैयार हुआ और 2019 में इसे जिला अस्पताल को हस्तांतरित कर दिया गया। इसके बावजूद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल सका। सात साल से अधिक समय बीतने के बाद भी यूनिट में इलाज की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है।
भवन का इस्तेमाल न होने और नियमित देखरेख नहीं होने से भवन गंदगी से घिरा है। अंदर रखे उपकरण धूल फांक रहे हैं। सात साल से संचालन की प्रतीक्षा कर रही यूनिट अब स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है। दिवाली नजदीक होने के कारण इसके संचालन का सवाल एक बार फिर अहम हो गया है। यदि समय रहते आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए तो इस बार भी झुलसे मरीजों को रेफरल के सहारे ही इलाज कराना पड़ेगा।
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झुलसे मरीजों को नहीं मिलती विशेषज्ञ इलाज की सुविधा
दिवाली के दौरान पटाखे छुड़ाने, आतिशबाजी करने और अन्य कारणों से आग में झुलसने की घटनाएं होती हैं। ऐसे मरीजों को समय पर उपचार और विशेष देखभाल की जरूरत होती है लेकिन प्लास्टिक सर्जन और अन्य विशेषज्ञों के न होने के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे मरीज और तीमारदारों को दूसरे शहर तक जाने की परेशानी उठानी पड़ती है। समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलने में देरी का जोखिम भी बना रहता है।
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एक साल में कई बार शासन को किया पत्राचार
बर्न यूनिट संचालन के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नवंबर 2025 में निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा था। इसके बाद 30 सितंबर को फिर से पत्र लिखा गया है। इसमें मानव संसाधन और पर्याप्त चिकित्सक न होने की वजह से संचालन न होने की बात कही गई है। जिसमें उल्लेख किया गया है कि जिला चिकित्सालय करीब साढ़े तीन साल से स्वशासी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होकर संचालित हो रहा है। आग से जले एवं एसिड अटैक के मरीजों का उपचार अस्पताल के सर्जन द्वारा किया जाता है। गंभीर स्थिति में उच्च राजकीय संस्थानों में रेफर करना पड़ रहा है।
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मरम्मत की जरूरत, लोक निर्माण विभाग से मांगा आकलन
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने बर्न यूनिट के रेनोवेशन की बात कही है। इसके लिए अधिशासी अभियंता उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड निर्माण इकाई-10 कानपुर को पत्र लिखा है। प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार ने बताया कि कई साल से यूनिट बंद पड़ी है। कुछ खामियां हैं, जिसे संचालन से पहले दूर कराना जरूरी है। इसलिए आकलन रिपोर्ट मांगी गई है। इसकी रिपोर्ट शासन भेजी जाएगी। बजट मिलने पर काम शुरू कर जल्द संचालन की पहल की जाएगी।
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इतने स्टाफ की जरूरत
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के अनुसार बर्न यूनिट संचालन के लिए एक प्लास्टिक सर्जन, दो जनरल सर्जन, तीन ईएमओ, कम से कम छह स्टाफ नर्स, एक फिजियोथेरेपिस्ट, तीन ड्रेसर आदि की जरूरत है।
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बयान......
जिला अस्पताल परिसर में बनी बर्न यूनिट संचालन की तैयारी की जा रही है। जल्द ही इसका संचालन शुरू कराया जाएगा। जहां पर जो खामियां हैं उसे दूर कराने के लिए पत्राचार शासन को किया गया है। वहां से अनुमति और बजट मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा। साथ ही मानव संसाधन की भी मांग की गई है। - डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अकबरपुर
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जिला अस्पताल परिसर में बर्न यूनिट बनाने की मंजूरी नवंबर 2012 में मिली थी। इसके निर्माण पर करीब 1.96 करोड़ रुपये की लागत आई। वर्ष 2017-18 में भवन बनकर तैयार हुआ और 2019 में इसे जिला अस्पताल को हस्तांतरित कर दिया गया। इसके बावजूद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल सका। सात साल से अधिक समय बीतने के बाद भी यूनिट में इलाज की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है।
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भवन का इस्तेमाल न होने और नियमित देखरेख नहीं होने से भवन गंदगी से घिरा है। अंदर रखे उपकरण धूल फांक रहे हैं। सात साल से संचालन की प्रतीक्षा कर रही यूनिट अब स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है। दिवाली नजदीक होने के कारण इसके संचालन का सवाल एक बार फिर अहम हो गया है। यदि समय रहते आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए तो इस बार भी झुलसे मरीजों को रेफरल के सहारे ही इलाज कराना पड़ेगा।
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झुलसे मरीजों को नहीं मिलती विशेषज्ञ इलाज की सुविधा
दिवाली के दौरान पटाखे छुड़ाने, आतिशबाजी करने और अन्य कारणों से आग में झुलसने की घटनाएं होती हैं। ऐसे मरीजों को समय पर उपचार और विशेष देखभाल की जरूरत होती है लेकिन प्लास्टिक सर्जन और अन्य विशेषज्ञों के न होने के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे मरीज और तीमारदारों को दूसरे शहर तक जाने की परेशानी उठानी पड़ती है। समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलने में देरी का जोखिम भी बना रहता है।
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एक साल में कई बार शासन को किया पत्राचार
बर्न यूनिट संचालन के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नवंबर 2025 में निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा था। इसके बाद 30 सितंबर को फिर से पत्र लिखा गया है। इसमें मानव संसाधन और पर्याप्त चिकित्सक न होने की वजह से संचालन न होने की बात कही गई है। जिसमें उल्लेख किया गया है कि जिला चिकित्सालय करीब साढ़े तीन साल से स्वशासी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होकर संचालित हो रहा है। आग से जले एवं एसिड अटैक के मरीजों का उपचार अस्पताल के सर्जन द्वारा किया जाता है। गंभीर स्थिति में उच्च राजकीय संस्थानों में रेफर करना पड़ रहा है।
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मरम्मत की जरूरत, लोक निर्माण विभाग से मांगा आकलन
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने बर्न यूनिट के रेनोवेशन की बात कही है। इसके लिए अधिशासी अभियंता उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड निर्माण इकाई-10 कानपुर को पत्र लिखा है। प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार ने बताया कि कई साल से यूनिट बंद पड़ी है। कुछ खामियां हैं, जिसे संचालन से पहले दूर कराना जरूरी है। इसलिए आकलन रिपोर्ट मांगी गई है। इसकी रिपोर्ट शासन भेजी जाएगी। बजट मिलने पर काम शुरू कर जल्द संचालन की पहल की जाएगी।
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इतने स्टाफ की जरूरत
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के अनुसार बर्न यूनिट संचालन के लिए एक प्लास्टिक सर्जन, दो जनरल सर्जन, तीन ईएमओ, कम से कम छह स्टाफ नर्स, एक फिजियोथेरेपिस्ट, तीन ड्रेसर आदि की जरूरत है।
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जिला अस्पताल परिसर में बनी बर्न यूनिट संचालन की तैयारी की जा रही है। जल्द ही इसका संचालन शुरू कराया जाएगा। जहां पर जो खामियां हैं उसे दूर कराने के लिए पत्राचार शासन को किया गया है। वहां से अनुमति और बजट मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा। साथ ही मानव संसाधन की भी मांग की गई है। - डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अकबरपुर