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चमड़े पर भारी पड़ता दिख रहा है कपड़ा, पढ़िए ये खास रिपोर्ट

Sat, 18 May 2019 03:11 PM IST
प्रशांत कुमार प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 18 May 2019 03:11 PM IST
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textile industry may take place of Leather industry in one district one product in kanpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में चमड़ा कारोबार के फिट न बैठने की वजह से सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना कानपुर में धड़ाम हो गई है। अब नए वित्तीय वर्ष के लिए इस योजना में उत्पाद के बदलाव के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि चुनाव परिणाम आने के बाद इसमें बदलाव का प्रस्ताव उद्योग विभाग की ओर से भेजा जा सकता है। शुरुआती संकेतों में होजरी अथवा रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग को ओडीओपी में शामिल कराने की बात सामने आ रही है।  
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उद्योग विभाग के सूत्र बताते हैं कि ओडीओपी योजना के पहले वर्ष में जिले में चमड़ा उद्योग को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। दरअसल, यह योजना जिले की पहचान वाले उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लाई गई थी। चमड़ा कानपुर की पहचान रहा है। इस वजह से इसे योजना में शामिल किया था। बाद में प्रदूषण रोकथाम मानकों में खरा नहीं उतरने की वजह से टेनरियों को बंद करा दिया गया। योजना लागू होने के साथ ही शहर का चमड़ा उद्योग संकट में घिर गया।
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उद्योग के विकास की बात तो दूर पहले जैसी स्थिति बरकरार रख पाना भी मुश्किल हो गया। टेनरियों की बंदी की वजह से चमड़ा उद्यमियों को कई हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। चमड़ा उद्योग के हालात के आधार पर इसमें बदलाव की बात शुरू हो गई है। उद्योग विभाग भी इसको लेकर गंभीर है। चूंकि यह मसला नीतिगत है और चुनाव प्रक्रिया चल रही है इस वजह से अफसर इस पर खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।

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सूत्र बताते हैं कि चमड़ा उद्योग ओडीओपी योजना से यदि नहीं भी हटता है तो भी यहां से कपड़े से संबंधित उद्योग को ओडीओपी में शामिल किया जा सकता है। विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि वे इसका प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे। फैसला सरकार के स्तर पर ही होगा। शहर में होजरी और रेडीमेड गारमेंट उद्योग का सालाना टर्नओवर पांच हजार करोड़ रुपये के आसपास है। ओडीओपी में शामिल होने के बाद इसके विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। 

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