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इटावाः परौली गोशाला में दस गोवंश मरे
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बसरेहर विकासखंड के ग्राम परौली रामायन में स्थित जिले की सबसे बड़ी गौशाला में गौवंशो की मौत का सिल
- फोटो : ETAWHA
इटावा। परौली रमायन गोशाला में तीन दिन के अंदर दस और गोशंवों की मौत हो गई हैं। शुक्रवार को गोशाला परिसर में पड़े गोवंशों के शवों को कुत्ते और पक्षी नोचकर खाते देखे गए। शव पूरे परिसर में फैले पड़े हैं। बारिश के बाद गोशाला में कीचड़ भरा है।
165 बीघे में बनी गोशाला में लगभग एक हजार गोवंश हैं। पंद्रह दिन पहले 35 से अधिक गोवंश मर गए थे। पिछले तीन दिनों में 10 और गोवंशों की मौत हो गई। शुक्रवार को बाड़ के बाहर से ग्रामीणों ने शव पड़े देखे। खामी छुपाने के लिए प्रशासन ने गोशाला के गेट पर ताला लगाया है। मीडिया और ग्रामीणों के गोशाला में प्रवेश पर प्रतिबंध है। बुधवार की रात हुई बारिश के बाद टिनशेड के नीचे और आसपास जमीन दलदली हो गई है। इसमें कमजोर गोवंश फंस जाते हैं। बताया जा रहा है कि ज्यादातर गोवंश दलदली जमीन में फंसकर मरे हैं। ग्रामीणों की मानें तो देखभाल के लिए चार कर्मचारी लगाए गए हैं। ये कर्मचारी साफ-सफाई तक नहीं करते।
गांव के राधेलाल, तुलसीराम, श्यामलाल, सतीश चंद्र, सुबेदार ने बताया कि शाम तक गोवंश के शव परिसर में ही पड़े थे, कोई अधिकारी नहीं पहुंचा था। बड़ी संख्या में गोवंश बीमार हैं। इस संबंध में प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि अधिकारियों से पता करेंगे। एसडीएम सदर सिद्धार्थ ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है। अगर शव परिसर में पड़े हैं तो ये कर्मचारियों की लापरवाही है। वहां चारे पानी की कोई कमी नहीं है। दिखवाता हूं, गोवंश के शवों को सम्मानपूर्वक दफन कराया जाएगा।
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एसडीएम सदर ने बताया कि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने सर्वे कराया है। परौली रमायन गोशाला में 270 से अधिक गोवंश औसत उम्र के ऊपर के हैं। वे शरीरिक रूप से काफी कमजोर भी हो चुके हैं। ऐसे गोवंश ही बीमारी की चपेट में आकर मर रहे हैं।
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165 बीघे में बनी गोशाला में लगभग एक हजार गोवंश हैं। पंद्रह दिन पहले 35 से अधिक गोवंश मर गए थे। पिछले तीन दिनों में 10 और गोवंशों की मौत हो गई। शुक्रवार को बाड़ के बाहर से ग्रामीणों ने शव पड़े देखे। खामी छुपाने के लिए प्रशासन ने गोशाला के गेट पर ताला लगाया है। मीडिया और ग्रामीणों के गोशाला में प्रवेश पर प्रतिबंध है। बुधवार की रात हुई बारिश के बाद टिनशेड के नीचे और आसपास जमीन दलदली हो गई है। इसमें कमजोर गोवंश फंस जाते हैं। बताया जा रहा है कि ज्यादातर गोवंश दलदली जमीन में फंसकर मरे हैं। ग्रामीणों की मानें तो देखभाल के लिए चार कर्मचारी लगाए गए हैं। ये कर्मचारी साफ-सफाई तक नहीं करते।
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गांव के राधेलाल, तुलसीराम, श्यामलाल, सतीश चंद्र, सुबेदार ने बताया कि शाम तक गोवंश के शव परिसर में ही पड़े थे, कोई अधिकारी नहीं पहुंचा था। बड़ी संख्या में गोवंश बीमार हैं। इस संबंध में प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि अधिकारियों से पता करेंगे। एसडीएम सदर सिद्धार्थ ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है। अगर शव परिसर में पड़े हैं तो ये कर्मचारियों की लापरवाही है। वहां चारे पानी की कोई कमी नहीं है। दिखवाता हूं, गोवंश के शवों को सम्मानपूर्वक दफन कराया जाएगा।
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एसडीएम सदर ने बताया कि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने सर्वे कराया है। परौली रमायन गोशाला में 270 से अधिक गोवंश औसत उम्र के ऊपर के हैं। वे शरीरिक रूप से काफी कमजोर भी हो चुके हैं। ऐसे गोवंश ही बीमारी की चपेट में आकर मर रहे हैं।