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आंसुओं से जो किताब लिखती हैं शायरी वो होती है...
अमर उजाला ब्यूरो /कानपुर
Updated Sat, 13 Aug 2016 01:52 AM IST
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मर्चेंट चैंबर सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों और आयोजकों का केटीवी के परेश चतुर्वेदी ने सम्मान किया।
- फोटो : amarujala
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मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने पढ़ा कि आंसुओं से जो किताब लिखती हैं शायरी वो होती है नजम सुनते ही दर्शकों ने वाह-वाह कहना शुरू कर दिया। पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौका था उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान और के न्यूज की ओर से आयोजित कविता जिंदाबाद कार्यक्रम का।
जयपुर के संपत सरल ने पढ़ा वो भी क्या दिन थे जब घड़ी एक आध के पास होती थी और समय सबके पास। इसे सुनते ही सभी को बचपना याद आय गया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए जौहर कानपुरी ने पढ़ा ए खुदा धूप को आंचल कर दें को सुनकर दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका इस्तकबाल किया।
वर्तमान में मां-बाप की अनेदखी करने वालों पर तंज कसते हुए कवि शाहरुख ने पढ़ा हां रहने दो मां-बाप को जिस तरह से घर में रहते हैं को बहुत पसंद किया गया। शबीना अदीब ने पढ़ा हमेशा एक दूसरे के हक में दुआ करेंगे यह तय हुआ था, कहीं मिलो तुम कहीं मिले हम, मगर मोहब्बत रहेगी कायम।
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इससे पहले अखिलेश चतुर्वेदी ने अतिथियों का सम्मान किया। इस मौके पर डेन नेटवर्क के एमडी संजीव दीक्षित, तिरंगा ग्रुप के एमडी नरेंद्र शर्मा, धर्मेश दीक्षित, परेश दीक्षित, डॉ. मनीष शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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जयपुर के संपत सरल ने पढ़ा वो भी क्या दिन थे जब घड़ी एक आध के पास होती थी और समय सबके पास। इसे सुनते ही सभी को बचपना याद आय गया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए जौहर कानपुरी ने पढ़ा ए खुदा धूप को आंचल कर दें को सुनकर दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका इस्तकबाल किया।
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वर्तमान में मां-बाप की अनेदखी करने वालों पर तंज कसते हुए कवि शाहरुख ने पढ़ा हां रहने दो मां-बाप को जिस तरह से घर में रहते हैं को बहुत पसंद किया गया। शबीना अदीब ने पढ़ा हमेशा एक दूसरे के हक में दुआ करेंगे यह तय हुआ था, कहीं मिलो तुम कहीं मिले हम, मगर मोहब्बत रहेगी कायम।
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इससे पहले अखिलेश चतुर्वेदी ने अतिथियों का सम्मान किया। इस मौके पर डेन नेटवर्क के एमडी संजीव दीक्षित, तिरंगा ग्रुप के एमडी नरेंद्र शर्मा, धर्मेश दीक्षित, परेश दीक्षित, डॉ. मनीष शुक्ला आदि मौजूद रहे।