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बीहड़ के बच्चों को स्मार्ट बना रहे संदीप
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राजपुर के महेशपुर गांव में गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाता ग्राम पंचायत सचिव।
- फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात/राजपुर। महेशपुर गांव के रहने वाले ग्राम विकास अधिकारी संदीप निषाद बीहड़ के गांवों के गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने गरीब बच्चों को प्रोजेक्टर, लैपटॉप सहित अन्य संसाधनों के जरिये पांच माह से बेहतर शिक्षा देने की मुहिम चला रहे हैं।
कोरोना महामारी के बाद देश में लॉकडाउन हो गया था। स्कूल, कॉलेज बंद होने से बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हुई थी। ऐसे में संदीप ने बीहड़ पट्टी के गांव में रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा देने की ठानी। बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने प्रोजेक्टर खरीदा। वह बच्चों को अपने लैपटॉप, प्रोजेक्टर व फोन से रोचक तरीके से स्मार्ट शिक्षा दे रहे हैं। बच्चे भी संदीप की इस रोचक तरीके से पढ़ाई से प्रभावित हुए हैं। संदीप ने बताया कि वह जिले के राजपुर ब्लाक क्षेत्र के महटौली, अमराहट, खोजाफूल, गुरदही बुजुर्ग गांव के ग्राम विकास अधिकारी हैं। वह सरकार की योजनाओं को गांव तक पहुंचा रहे हैं। गांव के विकास के साथ उनकी तमन्ना है कि वह हर गरीब बच्चे को स्मार्ट शिक्षा से जोड़ें।
बच्चों को पढ़ाते समय संदीप सामाजिक दूरी का विशेष ध्यान रख रहे हैं। संदीप निषाद ने बताया कि उन्होंने कई विषम परिस्थितियों में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी। संदीप का कहना है कि भले हम स्मार्ट शिक्षा से वंचित रहे, लेकिन अब किसी गरीबों बच्चों को स्मार्ट शिक्षा से वंचित नहीं होने देंगे। शुरुआत में उन्होंने परिवार के नौ बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था। अब उनके पास बीस बच्चे पढ़ने आते हैं।
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संदीप के पिता तिलक सिंह उमरपुर राजपुर स्थित जनता इंटर कालेज में बतौर चुतुर्थ श्रेणी कर्मचारी काम करते थे। उनका सपना था कि वह शिक्षक बने और गरीब बच्चों को शिक्षा दें। वह स्कूल में काम करने के बाद समय मिलने पर बच्चों को निशुल्क शिक्षा देते थे। संदीप ने बताया कि पिता कभी शिक्षक नहीं बन सके। उनका 2004 में निधन हो गया था। उनकी जगह मां पुष्पा देवी की नौकरी लग गई। पिता की प्रेरणा से ही वह बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।
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कोरोना महामारी के बाद देश में लॉकडाउन हो गया था। स्कूल, कॉलेज बंद होने से बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हुई थी। ऐसे में संदीप ने बीहड़ पट्टी के गांव में रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा देने की ठानी। बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने प्रोजेक्टर खरीदा। वह बच्चों को अपने लैपटॉप, प्रोजेक्टर व फोन से रोचक तरीके से स्मार्ट शिक्षा दे रहे हैं। बच्चे भी संदीप की इस रोचक तरीके से पढ़ाई से प्रभावित हुए हैं। संदीप ने बताया कि वह जिले के राजपुर ब्लाक क्षेत्र के महटौली, अमराहट, खोजाफूल, गुरदही बुजुर्ग गांव के ग्राम विकास अधिकारी हैं। वह सरकार की योजनाओं को गांव तक पहुंचा रहे हैं। गांव के विकास के साथ उनकी तमन्ना है कि वह हर गरीब बच्चे को स्मार्ट शिक्षा से जोड़ें।
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बच्चों को पढ़ाते समय संदीप सामाजिक दूरी का विशेष ध्यान रख रहे हैं। संदीप निषाद ने बताया कि उन्होंने कई विषम परिस्थितियों में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी। संदीप का कहना है कि भले हम स्मार्ट शिक्षा से वंचित रहे, लेकिन अब किसी गरीबों बच्चों को स्मार्ट शिक्षा से वंचित नहीं होने देंगे। शुरुआत में उन्होंने परिवार के नौ बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था। अब उनके पास बीस बच्चे पढ़ने आते हैं।
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संदीप के पिता तिलक सिंह उमरपुर राजपुर स्थित जनता इंटर कालेज में बतौर चुतुर्थ श्रेणी कर्मचारी काम करते थे। उनका सपना था कि वह शिक्षक बने और गरीब बच्चों को शिक्षा दें। वह स्कूल में काम करने के बाद समय मिलने पर बच्चों को निशुल्क शिक्षा देते थे। संदीप ने बताया कि पिता कभी शिक्षक नहीं बन सके। उनका 2004 में निधन हो गया था। उनकी जगह मां पुष्पा देवी की नौकरी लग गई। पिता की प्रेरणा से ही वह बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।