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महोबा: बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी, कहा- लंदन से आल्हा खंड वापस मंगाए
Tue, 14 Dec 2021 04:14 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 14 Dec 2021 04:14 PM IST
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शहर के आल्हा चौक स्थित वीर आल्हा की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में मां अन्नपूर्णा देवी व बांदा में महामाई दाई की मूर्ति के लंदन से वापस आने की खबर से उत्साहित बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखे पहले हस्तलिखित आल्हा खंड को वापस महोबा मंगवाने की मांग की है।
उन्होंने स्थानीय सांसद व विधायक से भी इसके लिए पहल करने की अपील की है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखकर अवगत कराया है कि 1888 में महोबा के घासीराम ने हिन्दी में पहला आल्हा खंड लिखा, जिसे बाद में यहां तैनात रहे अंग्रेज अफसर अपने साथ लंदन ले गए।
इस हस्तलिखित आल्हा खंड में उन सभी 52 लड़ाइयों का विस्तृत विवरण है, जो वीर आल्हा ऊदल ने लड़ी थी। ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हमारी यह ऐतिहासिक धरोहर वापस मंगवाई जाए और उसे महोबा के संग्रहालय में रखा जाए। ताकि यहां के लोग उसका लाभ ले सकें।
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उन्होंने बताया कि पहली बार 1865 में आल्हा को अंग्रेजी भाषा में चार्ल्स इलियट ने लिपिबद्ध करवाया और 1871 में प्रकाशित करवाया। उसके बाद घासीराम ने हिन्दी में आल्हा खंड लिखा। उन्होंने बताया कि हमने चार साल पहले भी जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा था एवं सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल से आग्रह किया था कि वे आल्हा खंड को लंदन से वापस मंगवाने का प्रयास करें लेकिन अब तक हुआ कुछ नहीं।
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उन्होंने स्थानीय सांसद व विधायक से भी इसके लिए पहल करने की अपील की है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखकर अवगत कराया है कि 1888 में महोबा के घासीराम ने हिन्दी में पहला आल्हा खंड लिखा, जिसे बाद में यहां तैनात रहे अंग्रेज अफसर अपने साथ लंदन ले गए।
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इस हस्तलिखित आल्हा खंड में उन सभी 52 लड़ाइयों का विस्तृत विवरण है, जो वीर आल्हा ऊदल ने लड़ी थी। ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हमारी यह ऐतिहासिक धरोहर वापस मंगवाई जाए और उसे महोबा के संग्रहालय में रखा जाए। ताकि यहां के लोग उसका लाभ ले सकें।
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उन्होंने बताया कि पहली बार 1865 में आल्हा को अंग्रेजी भाषा में चार्ल्स इलियट ने लिपिबद्ध करवाया और 1871 में प्रकाशित करवाया। उसके बाद घासीराम ने हिन्दी में आल्हा खंड लिखा। उन्होंने बताया कि हमने चार साल पहले भी जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा था एवं सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल से आग्रह किया था कि वे आल्हा खंड को लंदन से वापस मंगवाने का प्रयास करें लेकिन अब तक हुआ कुछ नहीं।