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देसी गाय प्राकृतिक खेती का आधार : सुभाष पालेकर

Sat, 26 Mar 2016 02:49 AM IST
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kanpur Updated Sat, 26 Mar 2016 02:49 AM IST
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लवकुश आश्रम में पद्मश्री सुभाष पालेकर ने अपने अनुभव साझा किए। - फोटो : kanpur

देसी गाय के 1 ग्राम गोबर में 300 से 500 करोड़ सूक्ष्म जीवाणु होते हैं। प्रमाणित है कि देसी गाय के गोबर से 10 से 30 एकड़ तक जीरो बजट पर खेती की जा सकती है। इस तकनीक से किसानों को बाजार से कुछ भी नहीं खरीदना पड़ता है। यह अनुभव शुक्रवार को करौली गांव स्थित लवकुश आश्रम में पद्मश्री सुभाष पालेकर ने पत्रकारों से साझा किए।

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पालेकर ने कहा कि उद्योग और जैविक खेती पर्यावरण असंतुलन के मुख्य कारण हैं।

इससे कार्बन डाई आक्साईड, मीथेन आदि जहरीली गैसों का उत्सर्जन होता है। रासायन मानव शरीर और मवेशियों पर विपरीत प्रभाव डाल रहे हैं। मवेशियों के हरे चारे की समस्या पर कहा है कि बहु फसली खेती से इस समस्या पर काबू पा सकते हैं। सर्वे के अनुसार देश से 850 लाख देसी गायें हैं, जीरो बजट खेती के लिए महज 300 लाख गाय की जरूरत हैं। देश में केरल से लेकर पंजाब तक 5 लाख किसान जीरो बजट खेती कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि यूपी  सरकार को पारंपरिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। इससे आय बढ़ेगी और गांवों से लोगों का पलायन कम होगा। इस दौरान एसके चतुर्वेदी, अन्नत चतुर्वेदी, डॉ. संतोष सिंह भदौरिया, विकास चतुर्वेदी, आरएन चतुर्वेदी, डॉ. कौशल कुमार, जयंत चतुर्वेदी, विवेक चतुर्वेदी मौजूद रहे। पालेकर ने कहा कि रासायनिक खेती में चार गुना खर्च आता हैं। इसे बेंचने वाले अमीर हो रहे हैं, और खरीदने (किसान) बर्बाद हो रहे हैं। हमारी सरकारों को इस विषय पर गंभीरता से सोचना होगा।
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अजेय हंसिया से काटी फसल
कनाडा में बनी फसल काटने की मशीन ‘अजेय’ हंसिया का लोकार्पण शुक्रवार को पद्मश्री सुभाष पालेकर ने किया। इसका प्रदर्शन करौली गांव स्थित मानव मंदिर लवकुश आश्रम के फार्म हाउस में हुआ। कनाडा से आए एलेक्सजेंडर वीडो ने मशीन से फसल काटना बताया। बताया कि मानव श्रम से चलने वाली उक्त मशीन से एक किसान एक एकड़ धान या गेहूं 9 घंटे में काट लेगा। इस काम के लिए अभी 20 मजदूरों की जरूरत पड़ती है, जिन्हें भारी मेहनताना देना पड़ता है।


मानव मंदिर के डॉ. संतोष भदौरिया और विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि इस यंत्र की कीमत लगभग 5-6 हजार रुपये रहेगी। हंसिये में विशेष प्रकार के धातु की ब्लेड लगी है। इसका सुरक्षित ढंग से उपयोग कर वर्षों लाभ लिया जा सकता है। यह जल्द ही किसानों को उपलब्ध हो सकेगी। यंत्र को अजेय नाम पद्मश्री सुभाष पालेकर ने दिया है। एलेक्सजेंडर वीडो दिसंबर में शहर आए थे। उन्होंने फसल कटाई पर किसानों को होने वाली समस्या देखी थी।

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