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कानपुर: जेईई एडवांस्ड में हासिल की अच्छी रैंक, पार्टी की फिर फंदे से झूला छात्र, इकलौते बेटे की मौत से मचा कोहराम

Sun, 17 Oct 2021 12:30 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 17 Oct 2021 12:30 AM IST
सार

कानपुर में छात्र की आत्महत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इकलौते बेटे की मौत से परिजन बेसुध हो गए।

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Student commits suicide in kanpur up
अविरल बाजपेई की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में किदवई नगर के ब्लॉक में शुक्रवार रात जेईई एडवांस्ड में चयनित छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। परिजनों ने देर रात फंदा काटकर शव उतारा और निजी अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया।
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नौबस्ता पुलिस ने परिजनों से संपर्क किया तो उन्होंने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। कागजी लिखापढ़ी के बाद पुलिस ने शव बगैर पोस्टमार्टम कराए परिजनों के सुपुर्द कर दिया। खुदकुशी की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। खुदकुशी से पहले छात्र जेईई में हुए चयन को लेकर खुश था।
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घर पर पार्टी भी की थी। अचानक हुई घटना से पूरा परिवार स्तब्ध है। किदवई नगर के ब्लॉक निवासी फाइनेंस एडवाइजर निखिल बाजपेई का बेटा अविरल बाजपेई (19) ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए जेईई एडवांस्ड की परीक्षा दी थी। शुक्रवार को प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ।
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जिसमें अविरल ने 7113 रैंक हासिल की। अविरल की कवयित्री मां शीतल बाजपेई व पिता दोनों बेहद खुश थे। परिजनों के मुताबिक त्योहार के दिन दोगुनी खुशी मिली थी। लिहाजा अविरल खुद ही होटल से सबके लिए खाना लेकर आया था। खाना खाने के बाद सभी सोने चले गए। रात करीब तीन बजे निखिल की नींद खुली तो देखा कि अविरल कमरे में नहीं है। बाहर जाकर देखा तो बरामदे में कुंडे से दुपट्टे के फंदे से अविरल लटका हुआ था। 

इकलौता था अविरल, आखिर क्यों उठाया ऐसा कदम 
अविरल इकलौता था। अब परिवार में केवल उसके माता-पिता बचे हैं। इकलौते होने की वजह से माता-पिता का उसके प्रति बेहद लगाव था। घटना के बाद से परिजन कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। वह बेसुध और बदहवास हैं। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो अविरल ने इतना सख्त कदम उठाया। नौबस्ता इंस्पेक्टर सतीश कुमार सिंह ने बताया कि खुदकुशी की वजह पता नहीं चली है। परिजनों से भी जानकारी ली गई उससे भी कुछ जानकारी नहीं मिली। न ही कोई सुसाइड नोट मिला। परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे इसलिए उनसे लिखपढ़ी कराई गई। बगैर पोस्टमार्टम कराए शव परिजनों को सौंपा गया। 

आईआईटी में प्रवेश तय था 
अविरल का चयन हो गया था। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के लिए उसने आवेदन किया था। किसी न किसी आईआईटी में उसका दाखिला होना तय था। वह पढ़ाई में अव्वल था। इसलिए परिवार क्या उसके परिचितों को भी यकीन नहीं हो रहा कि अविरल ऐसा कर सकता है।
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