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अरबपति मशहूर जहाज कारोबारी ने अपने शहर में आकर 'बयां किया दर्द', देश छोड़ने की ये वजह बताई
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 01 Dec 2018 02:04 PM IST
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कानपुर शहर के मूल निवासी मशहूर उद्योगपति, वर्तनाम में लंदन में रहने वाले विश्वविख्यात शिपिंग (पानी के जहाज) कंपनी के मालिक रवि कुमार मेहरोत्रा की अपनी माटी से मोहब्बत की एक और बानगी देखिए। खुद के खड़े किए हुए जहाज के कारोबार में एक और जहाज शामिल किया तो उसका नाम ‘आगरा’ रख दिया। यह दुनिया का सबसे बड़ा माल वाहक जहाज है। इसमें एक बार में 20 लाख बैरल तेल आ सकता है।
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सरकारी नीतियों की वजह से देश छोड़ा
रवि बाबू ने पहली बार अपने दिल का दर्द भी बयां किया। उन्होंने कहाकि जब वे देश में रहकर ही कारोबार करते थे तब आयकर विभाग और केंद्र सरकार की नीतियां उन्हें रास नहीं आईं। इन नीतियों ने यहां काम नहीं करने दिया। इस वजह से वे देश छोड़कर चले गए। वर्तमान सरकार देश की देश की नीतियां कारोबारियों के हित में हैं। इस वजह से वे यहां लौटे हैं।
रवि बाबू ने पहली बार अपने दिल का दर्द भी बयां किया। उन्होंने कहाकि जब वे देश में रहकर ही कारोबार करते थे तब आयकर विभाग और केंद्र सरकार की नीतियां उन्हें रास नहीं आईं। इन नीतियों ने यहां काम नहीं करने दिया। इस वजह से वे देश छोड़कर चले गए। वर्तमान सरकार देश की देश की नीतियां कारोबारियों के हित में हैं। इस वजह से वे यहां लौटे हैं।
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आर्यनगर में रहे, जीएनके में पढ़े
रवि कुमार मेहरोत्रा की इंटर तक की पढ़ाई सिविल लाइंस स्थित गुरुनानक खत्री (जीएनके) इंटर कालेज में हुई। शहर के पॉश एरिया आर्यनगर में हुंडई शोरूम के सामने उनका घर है। पिता छोटे लाल मेहरोत्रा वीएसएसडी कालेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे। पांच भाइयों और दो बहनों का समृद्ध परिवार था। सबसे बड़े भाई डॉ. मुराली लाल मेहरोत्रा देश के विख्यात ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) विशेषज्ञ रहे। इनसे छोटे श्याम बिहारी, विपिन बिहारी, शशि कुमार मेहरोत्रा थे। दो बहनें कांति और सुशीला थीं। इन सभी का निधन हो चुका है। इन सबमें रवि बाबू सबसे छोटे हैं और लंदन में रहते हैं। रवि बाबू का बेटा सौरभ और बेटी मंजरी सेठ भी विदेश में रहते हैं।
रवि कुमार मेहरोत्रा की इंटर तक की पढ़ाई सिविल लाइंस स्थित गुरुनानक खत्री (जीएनके) इंटर कालेज में हुई। शहर के पॉश एरिया आर्यनगर में हुंडई शोरूम के सामने उनका घर है। पिता छोटे लाल मेहरोत्रा वीएसएसडी कालेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे। पांच भाइयों और दो बहनों का समृद्ध परिवार था। सबसे बड़े भाई डॉ. मुराली लाल मेहरोत्रा देश के विख्यात ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) विशेषज्ञ रहे। इनसे छोटे श्याम बिहारी, विपिन बिहारी, शशि कुमार मेहरोत्रा थे। दो बहनें कांति और सुशीला थीं। इन सभी का निधन हो चुका है। इन सबमें रवि बाबू सबसे छोटे हैं और लंदन में रहते हैं। रवि बाबू का बेटा सौरभ और बेटी मंजरी सेठ भी विदेश में रहते हैं।
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मां के नाम से इंस्टीट्यूट और कंपनी
आर्यनगर में जिस स्थान पर रवि बाबू का घर था, वहां अब उनकी मां अमर देवी के नाम से अमर-मेरीटाइम ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खुला है। मां के निधन के बाद वर्ष 2000 में उन्होंने उत्तर भारत के पहले मरीन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की शुरुआत की। वर्ष 2014 में इसी इंस्टीट्यूट में मां और पिता की मूर्ति की स्थापना कराई। उनकी पहली कंपनी का नाम भी अमर शिपिंग है।
आर्यनगर में जिस स्थान पर रवि बाबू का घर था, वहां अब उनकी मां अमर देवी के नाम से अमर-मेरीटाइम ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खुला है। मां के निधन के बाद वर्ष 2000 में उन्होंने उत्तर भारत के पहले मरीन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की शुरुआत की। वर्ष 2014 में इसी इंस्टीट्यूट में मां और पिता की मूर्ति की स्थापना कराई। उनकी पहली कंपनी का नाम भी अमर शिपिंग है।
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उन्होेंने तो यहां तक कहा है कि बेड़े में जितने भी जहाज बढ़ते जाएंगे, उन सभी के नाम उत्तर प्रदेश के शहरों के नाम पर होंगे। अगले दो साल में दो जहाजों को शामिल करने की तैयारी है। इनमें से एक का नाम ‘प्रयागराज’ और दूसरे का ‘वाराणसी’ रखने की इच्छा है। इस तरह से वे कानपुर समेत उत्तर प्रदेश के शहरों के नाम दुनिया भर में चर्चा में लाने का प्रयास कर रहे हैं।