फतेहपुर निवासी सलीम के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के पीछे का सच धीरे-धीरे बाहर आ रहा है। सऊदी से पहली बार लौटने के बाद उसकी सोच हिंदुस्तान और अपने धर्म के प्रति बदल गई थी। इसी वजह से यहां के निष्ठावान मुसलमान उसे एक अलग जमात का मानने लगे थे। वह धर्म के आदर्शों से बगावत करने लगा था। इसकी जानकारी होने पर पिता ने उसे घर से निकाल दिया था।
यह जानकारी सलीम के गांव और ससुराल पक्ष के करीबी बुजुर्ग लोगों से मिली है। हालांकि इन्होंने अपने नाम उजागर करने से परहेज किया है। इन्होंने बताया कि एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) के हत्थे चढ़ा सलीम खान पहली बार वर्ष 2000 में सऊदी अरब गया था।
वहां से 2004-2005 के बीच मुल्क लौटा था। वह घरवालों से ही अपने धर्म के विरोध में बातचीत करने लगा था। इससे नाराज होकर गांव के संभ्रांत व्यक्ति के रूप में चर्चित पिता मुकीमुद्दीन खान ने गुस्से में उसे घर से भगा दिया था। इसके बाद सलीम कुछ दिनों तक ससुराल में रहा।
उसके धर्म का विरोध और देश विरोधी बातों की चर्चाएं फैलने लगी थीं। धर्म व देश के प्रति निष्ठा रखने वाले उससे दूरी बनाने लगे थे। उसकी इन विरोधी गतिविधियों को एक अलग जमात की माना जाने लगा था। ऐसे लोगों की मानसिकता को मुस्लिम बहुसंख्यक खराब मानते हैं। तभी वह सऊदी से लौटने के कुछ महीने बाद ही लश्कर के ट्रेनिंग कैंप चला गया था। कयास लगाया जा रहा है कि सऊदी में ही किसी ने उसका ब्रेन वॉश कर दिया था।