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किसानों ने अन्ना पशुओं से फसल बचाने का निकाला यह उपाया
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 08 Jan 2017 09:49 PM IST
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अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान संस्थापक व समाजसेवी गया प्रसाद ‘गोपाल’ ने अन्ना पशुओं से निजात दिलाने के लिए अपनी एक एकड़ जमीन दी है। बाड़ बनाकर यहां करीब 300 अन्ना गायों को रखा गया है।
उन्होंने डीएम से मदद की मांग की है। खुरहंड-अलिहा रजबहा मार्ग में स्थित हनुमान मंदिर के पास यह गौशाला स्थापित की गई है। गोपाल ने बताया कि करीब 300 गायों का झुंड बिगहना, जमरेही, बिलगांव, मकरी, छिबांव, खुरहंड, घुरौंडा आदि गांवों में विचरण कर रहा था। किसान बेहद परेशान थे। रखवाली के बावजूद ये अन्ना पशु फसलें चट कर किसानों को तबाह कर रहे थे।
गायें मारपीट, भूख-प्यास के कारण मौत का शिकार हो रही थीं। किसानों की गुहार के बावजूद शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने किसानों के लिए कैंसर बन चुके अन्ना प्रथा के समाधान के लिए कोई उपाय व प्रयास नहीं किए। अरहर और चना बोया होने के बावजूद गोपाल जी ने अपनी एक एकड़ जमीन देकर गायों को रोकने, खाने व पानी पीने का प्रबंध किया गया।
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बिगहना व जमरेही के 20 किसानों ने गो सदन बनवाने में अपना श्रमदान व बास-बल्ली देकर सहयोग किया। उन्होंने बताया कि 15 जनवरी तक के लिए अन्ना गायों के खाने-पीने की व्यवस्था है। डीएम से मनरेगा से गोसदन में गोसेवा के लिए मजदूर रखे जाने व आसपास के प्रधानों को निर्देशित करने की मांग की।
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उन्होंने डीएम से मदद की मांग की है। खुरहंड-अलिहा रजबहा मार्ग में स्थित हनुमान मंदिर के पास यह गौशाला स्थापित की गई है। गोपाल ने बताया कि करीब 300 गायों का झुंड बिगहना, जमरेही, बिलगांव, मकरी, छिबांव, खुरहंड, घुरौंडा आदि गांवों में विचरण कर रहा था। किसान बेहद परेशान थे। रखवाली के बावजूद ये अन्ना पशु फसलें चट कर किसानों को तबाह कर रहे थे।
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गायें मारपीट, भूख-प्यास के कारण मौत का शिकार हो रही थीं। किसानों की गुहार के बावजूद शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने किसानों के लिए कैंसर बन चुके अन्ना प्रथा के समाधान के लिए कोई उपाय व प्रयास नहीं किए। अरहर और चना बोया होने के बावजूद गोपाल जी ने अपनी एक एकड़ जमीन देकर गायों को रोकने, खाने व पानी पीने का प्रबंध किया गया।
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बिगहना व जमरेही के 20 किसानों ने गो सदन बनवाने में अपना श्रमदान व बास-बल्ली देकर सहयोग किया। उन्होंने बताया कि 15 जनवरी तक के लिए अन्ना गायों के खाने-पीने की व्यवस्था है। डीएम से मनरेगा से गोसदन में गोसेवा के लिए मजदूर रखे जाने व आसपास के प्रधानों को निर्देशित करने की मांग की।