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शर्करा उद्योग के अपशिष्ट से स्टार्टअप के मौके, काम की खबर
Tue, 26 Jan 2021 09:49 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 26 Jan 2021 09:49 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के कुलपति डॉ. राकेश भटनागर ने सोमवार को नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) का भ्रमण किया। गन्ने के बगास से डाइटरी फाइबर बिस्कुट, मूल्यवर्धित गुड़, फोर्टिफाइड शुगर आदि के तकनीकी मॉडल को देखा।
इस दौरान डॉ. भटनागर ने कहा कि शर्करा उद्योग में स्टार्ट अप के बहुत मौके हैं। पढ़े-लिखे युवा और काश्तकार उद्योग के अपशिष्ट से स्टार्ट अप कर सकते हैं। डॉ. भटनागर ने जैव रसायन में एनएसआई से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी।
इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने कुलपति को लघु बायो गैस के मॉडल को भी दिखाया। बताया गया कि दो सौ किलो अपशिष्ट से लगभग पांच किलो बायो गैस को तैयार किया जा सकता है। इससे एलपीजी की बचत होती है।
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इस दौरान डॉ. भटनागर ने कई परियोजनाओं पर एनएसआई के साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया। इनमें खमीर की गुणवत्ता सुधार, इनवर्ट शुगर सिरप तैयार करने के लिए एंजाइम का विकास, इथेनॉल के उत्पादन में सुधार आदि शामिल हैं। उनका कहना था कि स्टार्ट अप से युवा नौकरी प्रदाता बन सकते हैं।
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इस दौरान डॉ. भटनागर ने कहा कि शर्करा उद्योग में स्टार्ट अप के बहुत मौके हैं। पढ़े-लिखे युवा और काश्तकार उद्योग के अपशिष्ट से स्टार्ट अप कर सकते हैं। डॉ. भटनागर ने जैव रसायन में एनएसआई से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी।
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इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने कुलपति को लघु बायो गैस के मॉडल को भी दिखाया। बताया गया कि दो सौ किलो अपशिष्ट से लगभग पांच किलो बायो गैस को तैयार किया जा सकता है। इससे एलपीजी की बचत होती है।
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इस दौरान डॉ. भटनागर ने कई परियोजनाओं पर एनएसआई के साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया। इनमें खमीर की गुणवत्ता सुधार, इनवर्ट शुगर सिरप तैयार करने के लिए एंजाइम का विकास, इथेनॉल के उत्पादन में सुधार आदि शामिल हैं। उनका कहना था कि स्टार्ट अप से युवा नौकरी प्रदाता बन सकते हैं।