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ट्रेन की बोगी के बीच में खड़े होकर आठ सौ किमी यात्रा की
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माता-पिता के साथ यूक्रेन से लौटी छात्रा आकांक्षा। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। यूक्रेन में फंसी पुखरायां की छात्रा आकांक्षा कटियार व उसका ममेरा भाई अर्पित घर लौट आए हैं। दोनों ने भारत सरकार का आभार प्रकट किया है। छात्रा को उसकी मां राखी कटियार व पिता शैलेंद्र कटियार ने गले लगाकर दुलार किया। छात्रा ने बताया कि आठ सौ किलोमीटर ट्रेन की बोगी के बीच खड़े होकर यात्रा की। वहीं, छात्र कानपुर बर्रा स्थित घर में रुका है। छात्रा
सोमवार को वह पुखरायां स्थित पैतृक घर आई तो आसपास के लोग उसका हाल जानने पहुंचे। संवाददाता से छात्रा ने बताया कि पांच दिनों तक बंकर में छिपे रहे। बंकर के आसपास बमबारी होती रही। न तो नींद आती थी और न ही भूख प्यास लग रही थी। कई बार लगा कि जीवन यहीं खत्म हो जाएगा। जब खारकीव छोड़ने का भारतीय दूतावास से मैसेज आया तो स्टेशन पर ट्रेन पकड़े गई। वहां भारी भीड़ के चलते ट्रेन में चढ़ने नहीं दिया। इस पर दोनों करीब दस किमी पैदल चलकर दूसरे स्टेशन पहुंचे। वहां ट्रेन की बोगी में अंदर जाने को नहीं मिला। इस पर बोगी के बीच में ममेरे भाई अर्पित व अन्य भारतीय छात्रों के साथ खड़े होकर आठ सौ किमी की यात्रा की। छात्रा ने बताया कि इस दौरान लगातार बममारी हो रही थी। हर पल ये लग रहा था कि अब वतन नहीं लौट पाएंगे।
कहा कि पोलैंड बार्डर में पहुंचने के बाद वहां चार दिन इंतजार करना पड़ा। तब फ्लाइट मिली। रविवार को वह दिल्ली आई। इसके बाद कानपुर आ गई। छात्रा के ममेरे भाई अर्पित कटियार को उसकी मां नीरज कटियार व पिता श्यामनरेश कटियार ने गले लगाया। वह बर्रा 5 कानपुर स्थित मकान में है।
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सोमवार को वह पुखरायां स्थित पैतृक घर आई तो आसपास के लोग उसका हाल जानने पहुंचे। संवाददाता से छात्रा ने बताया कि पांच दिनों तक बंकर में छिपे रहे। बंकर के आसपास बमबारी होती रही। न तो नींद आती थी और न ही भूख प्यास लग रही थी। कई बार लगा कि जीवन यहीं खत्म हो जाएगा। जब खारकीव छोड़ने का भारतीय दूतावास से मैसेज आया तो स्टेशन पर ट्रेन पकड़े गई। वहां भारी भीड़ के चलते ट्रेन में चढ़ने नहीं दिया। इस पर दोनों करीब दस किमी पैदल चलकर दूसरे स्टेशन पहुंचे। वहां ट्रेन की बोगी में अंदर जाने को नहीं मिला। इस पर बोगी के बीच में ममेरे भाई अर्पित व अन्य भारतीय छात्रों के साथ खड़े होकर आठ सौ किमी की यात्रा की। छात्रा ने बताया कि इस दौरान लगातार बममारी हो रही थी। हर पल ये लग रहा था कि अब वतन नहीं लौट पाएंगे।
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कहा कि पोलैंड बार्डर में पहुंचने के बाद वहां चार दिन इंतजार करना पड़ा। तब फ्लाइट मिली। रविवार को वह दिल्ली आई। इसके बाद कानपुर आ गई। छात्रा के ममेरे भाई अर्पित कटियार को उसकी मां नीरज कटियार व पिता श्यामनरेश कटियार ने गले लगाया। वह बर्रा 5 कानपुर स्थित मकान में है।
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