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इत्रनगरी: सपा की साइकिल पर कौन होगा सवार, सस्पेंस बरकरार
Sun, 31 Mar 2024 06:46 PM IST
शिखा पांडेय
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 31 Mar 2024 06:46 PM IST
सार
अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने और न लड़ने को लेकर सियासी गलियारों में अटकलें तेज हैं। अपने गढ़ रहे कन्नौज से अब तक सपा की ओर से उम्मीदवारी का ऐलान नहीं हो सका है।
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अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अपने गठन के बाद से ही इत्रनगरी को अपना मजबूत किला बना चुकी समाजवादी पार्टी की सियासी चाल इस बार बदली हुई है। दो दशक से ज्यादा समय तक जिस संसदीय सीट पर सपा ने एकक्षत्र राज्य किया, वहां इस बार उम्मीदवारी को लेकर असमंजस है। अब तक यह तय नहीं हो सका है कि खुशबू के शहर में साइकिल की सवारी कौन करेगा।
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सात चरण में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण की नामांकन पूरी हो चुकी है। दूसरे चरण के लिए नामांकन जारी है। कन्नौज में चुनाव में चौथे चरण में होना है। ऐसे में यहां अभी समय है। लेकिन भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद सुब्रत पाठक को चुनाव के ऐलान से पहले ही फिर से उम्मीदवार घोषित कर दिया। कुछ दिन बाद ही बसपा ने भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी रहे रसूलाबाद निवासी अकील अहमद पट्टा के नाम का ऐलान कर दिया। इसके बावजूद अब तक सपा ने यहां अपना पत्ता नहीं खोला है।
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वर्ष 2019 से पहले लगातार सात चुनाव में यहां से जीत हासिल करने वाली सपा अपनी इस खोई सियासी जमीन को लेकर किस तैयारी में है, यह बात लोगों के बीच तेजी से चर्चा में है। हालांकि पार्टी का खेमा इसी बात पर जोर दे रहा है कि खुद पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ही यहां से दावेदार हैं। तर्क यह दिया जा रहा है कि वह अभी शुरूआती चरण की चुनावी प्रक्रिया पर ध्यान दे रहे हैं। समय रहते यहां की तस्वीर साफ हो जाएगी।
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पहले भाई धर्मेंद्र का था नाम, अब भतीजा तेजप्रताप की अटकलें
शुरू के दिनों में यहां अखिलेश यादव के चुनाव न लड़ने की सूरत में उनके भाई व बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र का नाम हवा में तैरता रहा। चूंकि अखिलेश यादव ने ही उन्हें यहां का लोकसभा प्रभारी बनाया था। इससे इस चर्चा को बल मिला। बाद में उन्हें आजमगढ़ से उम्मीदवार बनाया गया। तब फिर से अखिलेश यादव के नाम की चर्चा तेज हुई। अब उनके भतीेजे व मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव के नाम की चर्चा है। हालांकि यह अभी चर्चा में ही है। पार्टी कार्यकर्ताओं को भरोसा है कि खुद अखिलेश यादव ही यहां से चुनाव लड़ेंगे।
शुरू के दिनों में यहां अखिलेश यादव के चुनाव न लड़ने की सूरत में उनके भाई व बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र का नाम हवा में तैरता रहा। चूंकि अखिलेश यादव ने ही उन्हें यहां का लोकसभा प्रभारी बनाया था। इससे इस चर्चा को बल मिला। बाद में उन्हें आजमगढ़ से उम्मीदवार बनाया गया। तब फिर से अखिलेश यादव के नाम की चर्चा तेज हुई। अब उनके भतीेजे व मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव के नाम की चर्चा है। हालांकि यह अभी चर्चा में ही है। पार्टी कार्यकर्ताओं को भरोसा है कि खुद अखिलेश यादव ही यहां से चुनाव लड़ेंगे।
एक चर्चा यह भी...लडने से ज्यादा लड़ाने पर ध्यान देंगे अखिलेश
एक चर्चा यह भी है कि अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके पीछे दलील यह है कि वह इन दिनों विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं। उन्होंने आजमगढ़ से सांसद पद से इस्तिफा देकर करहल विधानसभा सीट से विधायक रहने को तरजीह दी थी। सियासी जानकार बताते हैं कि अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव के साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में उनके सांसद बनने पर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। इस सूरत में वह विधायक रहना ही पसंद करेंगे। ऐसे में चर्चा है कि वह इसी लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली औरेया जिले की बिधूना सीट से विधायक रेखा वर्मा को भी मैदान में उतार सकते हैं। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं होने से टिकट का मामला सियासी गलियारों के हवाबाजों के बीच सुर्खियों में है।
एक चर्चा यह भी है कि अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके पीछे दलील यह है कि वह इन दिनों विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं। उन्होंने आजमगढ़ से सांसद पद से इस्तिफा देकर करहल विधानसभा सीट से विधायक रहने को तरजीह दी थी। सियासी जानकार बताते हैं कि अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव के साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में उनके सांसद बनने पर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। इस सूरत में वह विधायक रहना ही पसंद करेंगे। ऐसे में चर्चा है कि वह इसी लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली औरेया जिले की बिधूना सीट से विधायक रेखा वर्मा को भी मैदान में उतार सकते हैं। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं होने से टिकट का मामला सियासी गलियारों के हवाबाजों के बीच सुर्खियों में है।