Kanpur: एसआईटी ने हिस्ट्रीशीटर रामखिलावन से मांगे बेगुनाही के सुबूत, वकीलों के पक्षों ने अलग-अलग की थी शिकायत
Kanpur News: सूत्रों के मुताबिक नवाबगंज थाने में फर्जी दस्तावेज बनाने, धोखाधड़ी करके जमीन बेचने के मामले में गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज किया गया था। इसमें रामखिलावन को मास्टरमाइंड बताया गया था।
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कानपुर में नवाबगंज के ख्योरा कटरी में जमीनों का खेल पुराना है। इस खेल में यहां हत्याएं तक हो चुकी हैं। बीते माह एक और शिकायत पुलिस तक पहुंची। शिकायत करने वाला हिस्ट्रीशीटर है और अधिवक्ताओं के साथ मिलकर जमीनों का बड़ा कारोबार करता है। उसका आरोप है कि बेशकीमती जमीनों के कारण उसे कई मामलों में फंसाया गया, जिसके चलते वह हिस्ट्रीशीटर बन गया। आरोपों की जांच के लिए ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर ने एसआईटी गठित की थी।
आरोप सही हैं या गलत, इसकी जांच एसआईटी कर रही है। एसआईटी ने उससे बेगुनाही के दस्तावेज मांगे हैं। नवाबगंज के ख्यौरा निवासी रामखिलावन के मामले में वकीलों के दो पक्षों ने बीते माह अलग-अलग शिकायत की थी। एक का आरोप था कि वह भूमाफिया और हिस्ट्रीशीटर है, जबकि दूसरे पक्ष का दावा था कि उसे 50 बीघा जमीन के कारण फंसाया जा रहा है। इसके बाद ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर विपिन मिश्रा ने इस मामले में एसआईटी जांच के आदेश दिए।
पुलिस ने जांच की और रामखिलावन को दोषी बताया
सूत्रों के मुताबिक नवाबगंज थाने में फर्जी दस्तावेज बनाने, धोखाधड़ी करके जमीन बेचने के मामले में गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज किया गया था। इसमें रामखिलावन को मास्टरमाइंड बताया गया था। वहीं, मामले में एक महिला की ओर से दर्ज कराया गया था। मामले में कर्नलगंज पुलिस ने जांच की और रामखिलावन को दोषी बताया। मामला कोर्ट पहुंचा तो बचाव पक्ष ने दलील दी कि रामखिलावन ने न तो जमीन खरीदी है और न बेची है।
अग्रिम जमानत मिल गई थी
उसके खाते से न तो पैसा लिया गया है और न ही दिया गया है। उक्त प्रकरण में वह गवाह भी नहीं है। इसके बाद अपर जिला जज 23 के न्यायालय से उसे अग्रिम जमानत मिल गई। कोर्ट से जमानत मिलने के करीब दो माह बाद उसे इसी मामले में पुलिस ने एक धारा बढ़ाकर गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया। जेल में रहने के दौरान उसके खिलाफ आगजनी का मामला दर्ज हुआ। सूत्रों ने बताया कि रामखिलावन पर एक के बाद एक दर्ज हो रहे मामलों को लेकर उसका परिवार अधिवक्ताओं के साथ पुलिस कमिश्नर से मिला था। इसके बाद इस मामले में एसआईटी जांच के आदेश दिए गए थे।
एक प्रकरण की प्राथमिक जांच में गलत शिकायत सामने आई थी। इसके बाद सभी मुकदमों की पारदर्शी जांच के लिए एसआईटी बनाई गई। जांच चल रही है। -विपिन मिश्रा, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर