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Sikh Riots: 32 आरोपियों की एसआईटी कर चुकी है गिरफ्तारी, दंगों में बनाए गए हैं 96 आरोपी

Thu, 18 Aug 2022 11:02 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 18 Aug 2022 11:02 AM IST
सार

कानपुर में वर्ष 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में शहर में 127 सिखों की हत्या की गई थी। इन दंगों में एसआईटी ने 96 आरोपी बनाए है, जिनमें से 32 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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SIT has arrested 32 accused in Sikh Riots, 96 accused have been made in the riots
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर सिख विरोधी दंगों में एसआईटी ने बुधवार सुबह दो अलग-अलग हत्याकांड में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से वह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए। इन दोनों हत्याकांड में पांच सिखों को मौत के घाट उतारा गया था। एसआईटी अब तक 32 आरोपियों की गिरफ्तारी कर चुकी है। 

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मुख्य आरोपी पूर्व मंत्री का भतीजा राघवेंद्र कुशवाहा अभी भी गिरफ्त में नहीं आया है। 1984 में कानपुर में 127 सिखों की हत्या कर दी गई थी। इन केसों की विवेचना एसआईटी कर रही है। एसआईटी डीआईजी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि निराला नगर में रक्षपाल सिंह, सतवीर सिंह व भूपेंद्र सिंह की हत्या की गई थी। इस घटना में शामिल एक दर्जन आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।

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मकरनपुर सजेती निवासी वीरेंद्र सिंह भी इसमें शामिल था। वीरेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। वहीं अर्मापुर इस्टेट में वजीर सिंह व उनके बेटे सतनाम सिंह की हत्या कर शव जलाए गए थे। इसमें उन्नाव निवासी उमाशंकर को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना के दो आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। डीआईजी ने बताया किसर्विलांस की मदद से आरोपी पकड़े गए हैं।

राघवेंद्र का करीबी है वीरेंद्र, इशारे पर मारा था
एसआईटी की जांच में सामने आया कि आरोपी वीरेंद्र पूर्व मंत्री के भतीजे राघवेंद्र का बेहद करीबी है। यह बात उसने खुद स्वीकार की है। दावा है कि जब राघवेंद्र दंगाइयों की भीड़ लेकर निराला नगर पहुंचा था तो साथ में वीरेंद्र भी था। उसके इशारे पर सिखों का नरसंहार शुरू कर दिया था। हत्या करने के बाद उसने डाका भी डाला था। इसलिए उसको डकैती की धारा में भी आरोपी बनाया है।

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पहले घेरा था और फिर दाखिल हुए थे
अर्मापुर इस्टेट की वारदात में शामिल आरोपी उमाशंकर ने बताया कि भीड़ ने पहले वजीर सिंह के क्वार्टर को घेर लिया था। उसके बाद घर के भीतर सभी दाखिल हुए थे। एक एक कर दोनों की हत्या कर शव जला दिए गए थे। सामान, नकदी, जेवरात लूटकर सभी फरार हो गए थे।

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