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Manish Gupta Murder: अज्ञात बताए गए तीन पुलिसकर्मियों को एसआईटी ने किया था नामजद

Mon, 11 Oct 2021 04:33 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 11 Oct 2021 04:33 PM IST
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SIT had nominated three policemen who were said to be unknown
मनीष गुप्ता हत्याकांड। - फोटो : अमर उजाला।
मनीष गुप्ता हत्याकांड में गोरखपुर पुलिस के खेल का पर्दाफाश हो गया है। पुलिस-प्रशासन ने जिन तीन पुलिसकर्मियों को बचाने का प्रयास किया था एसआईटी ने उनको अब आरोपी बना दिया। एफआईआर में अज्ञात पुलिसकर्मियों के नाम एसआईटी ने खोल दिए हैं। अब केस में इंस्पेक्टर समेत छह हत्यारोपी पुलिसकर्मी एसआईटी के रडार पर हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ पुख्ता वैज्ञानिक व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ गवाह मौजूद हैं।
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वारदात के बाद मीनाक्षी ने पुलिस अफसरों को तहरीर दी थी। जिसमें छह पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए थे। बाद में बंद कमरे में मीनाक्षी व उनके परिवार पर डीएम व एसएसपी ने दबाव बनाया। जिसका वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें वह केस न दर्ज कराने का दबाव बनाते सुनाई व दिखाई दे रहे थे।
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SIT had nominated three policemen who were said to be unknown
मनीष गुप्ता हत्याकांड - फोटो : amar ujala
तब मीनाक्षी ने बताया था कि अफसरों ने तहरीर बदलवाई थी। छह पुलिसकर्मियों के नाम वाली तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया था। दूसरी तहरीर में इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा और दरोगा विजय मिश्रा को नामजद करने के साथ तीन अन्य पुलिसकर्मियों को अज्ञात में आरोपी बनाया गया। एक तरह से अफसरों ने तीन अज्ञात कर पुलिसकर्मियों बचाने का प्रयास किया था। मगर अब एसआईटी ने तीनों अज्ञात पुलिसकर्मियों के नाम केस में खोल दिए हैं। इसमें दरोगा राहुल दुबे, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव और कांस्टेबल प्रशांत कुमार शामिल है। यानी मीनाक्षी ने पहली तहरीर में जिन पुलिसकर्मियों के नाम दर्ज किए थे वह सभी अब आरोपी बना दिए गए हैं।

एक-एक पुलिसकर्मी के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य
एसआईटी पिछले पांच दिनों से गोरखपुर में डेरा डाले हुए है। घटनास्थल से लेकर निजी अस्पताल व बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जाकर तफ्तीश की। 30 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए। दर्जनों सीसीटीवी फुटेज जुटाए। सूत्रों के मुताबिक आरोपी सभी छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एसआईटी ने पुख्ता साक्ष्य जुटा लिए हैं। इसमें उनकी सीडीआर से मिली लोकेशन, फुटेज, प्रत्यक्षदर्शी व अन्य लोगों की गवाही बेहद अहम है। इसी आधार पर उच्चाधिकारियों ने एसआईटी को निर्देश दे दिए हैं कि अब जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी करें। 

बचाव का प्रयास करने वाले भी फंसेंगे
जिस तरह एसआईटी की जांच में सभी छह पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं, उससे उन अफसरों के झूठ और खेल का पर्दाफाश हो गया जो तीन पुलिसकर्मियों को बचाने का प्रयास कर रहे थे। वहीं जिन्होंने एफआईआर दर्ज करने में देरी की। मामला दबाने का प्रयास किया वह सभी एसआईटी की जांच की जद में हैं। जांच पूरी होने के बाद जिन अफसरों की भूमिका मिलेगी उनके खिलाफ एसआईटी शासन को कार्रवाई के लिए संस्तुति करेगी। वहीं पुलिस ने आरोपियों की तलाश में कई जिलों में दबिश भी दी। 
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