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उत्तर मध्य रेलवे की पहली महिला इंस्पेक्टर बनीं शिप्रा, बोलीं- कई जगह किया लोगों के विरोध का सामना
Thu, 27 Dec 2018 04:31 PM IST
दुष्यंत शर्मा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 27 Dec 2018 04:31 PM IST
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शिप्रा पटेल
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‘जरा सा काम मुश्किल है, मुझे मालूम है लेकिन, अगर कोई ठान ले मन में तो करिश्मा भी हो सकता है...’। इन पंक्तियों को सार्थक करते हुए जूही की आरपीएफ इंस्पेक्टर शिप्रा पटेल ने अनूठी मिसाल प्रस्तुत की है। शिप्रा उत्तर मध्य रेलवे की पहली महिला इंस्पेक्टर बनी हैं।
2008-09 में आरआरबी की परीक्षा पास करने के बाद फिजिकल, मेडिकल और ट्रेनिंग के बाद पहली ज्वाइनिंग इलाहाबाद जंक्शन में सब इंस्पेक्टर के पद पर हुई। उसके बाद कानपुर सेंट्रल में साढ़े तीन साल सब इंस्पेक्टर रहने के बाद प्रमोशन हुआ और जूही थाने का प्रभार मिला।
मूल रूप से उन्नाव की रहने वाली शिप्रा बह्मकुमारी को मानती हैं। इस अनूठे मेल पर शिप्रा हंसते हुए कहती हैं कि दोनों अलग-अलग हिस्से हैं। इससे मुझे ताकत मिलती है। कर्म को ईमानदारी से करने का हौसला मिलता है। जब भी समय मिलता है ब्रह्मकुमारीज की क्लासेज में जरूर जाती हूं। निरंतर जुड़ी रहूंगी।
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उन्नाव में किसान केशव प्रसाद और मालती देवी की बेटी ने जब पढ़ाई करने का मन बनाया तो कई लोगों ने विरोध के स्वर ऊंचे कर दिए। इस कारण उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक स्कूल और माध्यमिक शिक्षा उन्नाव में नाना के घर पर पूरी की।
दो भाई और दो बहनों में तीसरे नंबर की शिप्रा कहती हैं कि परिवार में कोई भी पुलिस लाइन में नहीं है। पुलिस में जाने का निर्णय लिया तो कई रिश्तेदारों के मुंह बन गए। परिवार ने सहयोग दिया तो आज इस मुकाम पर खड़ी हूं। शिप्रा कहती हैं कि कोई काम मुश्किल नहीं है बस मन में लगन होनी चाहिए।
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2008-09 में आरआरबी की परीक्षा पास करने के बाद फिजिकल, मेडिकल और ट्रेनिंग के बाद पहली ज्वाइनिंग इलाहाबाद जंक्शन में सब इंस्पेक्टर के पद पर हुई। उसके बाद कानपुर सेंट्रल में साढ़े तीन साल सब इंस्पेक्टर रहने के बाद प्रमोशन हुआ और जूही थाने का प्रभार मिला।
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मूल रूप से उन्नाव की रहने वाली शिप्रा बह्मकुमारी को मानती हैं। इस अनूठे मेल पर शिप्रा हंसते हुए कहती हैं कि दोनों अलग-अलग हिस्से हैं। इससे मुझे ताकत मिलती है। कर्म को ईमानदारी से करने का हौसला मिलता है। जब भी समय मिलता है ब्रह्मकुमारीज की क्लासेज में जरूर जाती हूं। निरंतर जुड़ी रहूंगी।
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उन्नाव में किसान केशव प्रसाद और मालती देवी की बेटी ने जब पढ़ाई करने का मन बनाया तो कई लोगों ने विरोध के स्वर ऊंचे कर दिए। इस कारण उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक स्कूल और माध्यमिक शिक्षा उन्नाव में नाना के घर पर पूरी की।
दो भाई और दो बहनों में तीसरे नंबर की शिप्रा कहती हैं कि परिवार में कोई भी पुलिस लाइन में नहीं है। पुलिस में जाने का निर्णय लिया तो कई रिश्तेदारों के मुंह बन गए। परिवार ने सहयोग दिया तो आज इस मुकाम पर खड़ी हूं। शिप्रा कहती हैं कि कोई काम मुश्किल नहीं है बस मन में लगन होनी चाहिए।