{"_id":"67db29c9c1a8ccd0710aee89","slug":"seven-years-ago-isi-tried-to-trap-two-scientists-kanpur-news-c-12-1-knp1053-1042142-2025-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: सात साल पहले आईएसआई ने की थी दो वैज्ञानिकों को फंसाने की कोशिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: सात साल पहले आईएसआई ने की थी दो वैज्ञानिकों को फंसाने की कोशिश
विज्ञापन
कानपुर।
आईएसआई एजेंटों ने सात साल पहले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के जीटी रोड स्थित रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डीएमएसआरडीई) में तैनात दो वैज्ञानिकों को भी अपने जाल में फंसाने की कोशिश की थी।
हालांकि यूपी एटीएस की जांच में दोनों ही वैज्ञानिकों के किसी तरह की सूचना भेजने या साझा करने के साक्ष्य नहीं मिले थे। दरअसल, साल 2018 में एटीएस ने नागपुर स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ब्रह्मोस यूनिट में कार्यरत एक वैज्ञानिक की गिरफ्तारी की थी।
जांच के दौरान डीएमएसआरडीई कानपुर में तैनात एक महिला व एक पुरुष वैज्ञानिक का नाम भी सामने आया। एटीएस की जांच में पता चला कि एजेंटों ने नेहा और काजल नाम की फेसबुक आईडी के जरिये वैज्ञानिकों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। रिक्वेस्ट स्वीकार होने के बाद दोनों की उनसे बातचीत भी हुई थी।
विज्ञापन
वैज्ञानिकों के सोशल मीडिया एकाउंट से लेकर मोबाइल की सीडीआर, लैपटॉप समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की गई। हालांकि किसी दस्तावेज के साझा करने की बात सामने नहीं आई। इसके बाद एटीएस ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।
विज्ञापन
आईएसआई एजेंटों ने सात साल पहले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के जीटी रोड स्थित रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डीएमएसआरडीई) में तैनात दो वैज्ञानिकों को भी अपने जाल में फंसाने की कोशिश की थी।
हालांकि यूपी एटीएस की जांच में दोनों ही वैज्ञानिकों के किसी तरह की सूचना भेजने या साझा करने के साक्ष्य नहीं मिले थे। दरअसल, साल 2018 में एटीएस ने नागपुर स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ब्रह्मोस यूनिट में कार्यरत एक वैज्ञानिक की गिरफ्तारी की थी।
विज्ञापन
जांच के दौरान डीएमएसआरडीई कानपुर में तैनात एक महिला व एक पुरुष वैज्ञानिक का नाम भी सामने आया। एटीएस की जांच में पता चला कि एजेंटों ने नेहा और काजल नाम की फेसबुक आईडी के जरिये वैज्ञानिकों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। रिक्वेस्ट स्वीकार होने के बाद दोनों की उनसे बातचीत भी हुई थी।
विज्ञापन
वैज्ञानिकों के सोशल मीडिया एकाउंट से लेकर मोबाइल की सीडीआर, लैपटॉप समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की गई। हालांकि किसी दस्तावेज के साझा करने की बात सामने नहीं आई। इसके बाद एटीएस ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।