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संवासिनी गृह मामला: महिला संगठन विरोध में आए, तह तक जांच और सभी संवासिनियों की सुरक्षा की मांग
Mon, 22 Jun 2020 08:33 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 22 Jun 2020 08:33 PM IST
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संवासिनी गृह मामला
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में संवासिनी गृह में सात युवतियों के गर्भवती होने के प्रकरण पर सभी तथ्यों को शासन और प्रशासन की तरफ से स्पष्ट करने के बावजूद इस मामले को लेकर विरोध कम नहीं हो रहा है। महिला संगठन और राजनीतिज्ञों की तरफ से भी लगातार इस मामले को उठाकर व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
महिला संगठनों की मांग है कि इस मामले की तह तक जांच की जाए और सभी महिलाओं की सुरक्षा की जाए। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की तरफ से लगातार दूसरे दिन भी सवाल खड़े किए गए। समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली ने मंडलायुक्त डॉ सुधीर एम बोबडे को पत्र भेजकर सवाल भी उठाया है और अनुरोध भी किया है।
उनका कहना है कि आश्रय घर की सफाई और संवासिनियों की देखभाल में बहुत कमी रही है। अगर सात गर्भवती संवासिनी बलात्कार की शिकार होने के बाद यहां लाई गईं तो क्या गर्भपात का आप्शन उन्हें दिया गया था जो उनका कानूनी अधिकार है।
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इन गर्भवती संवासिनियों के स्वास्थ्य को लेकर प्रबंधकों ने क्या किया। क्योंकि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अब पता चला है कि एक एचआईवी प्लस और एक संवासिनी हेपेटाइटिस सी प्लस है। उनकी मांग है कि इन परिस्थितियों में मौजूदा प्रबंधकों को हटाया जाना चाहिए।
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महिला संगठनों की मांग है कि इस मामले की तह तक जांच की जाए और सभी महिलाओं की सुरक्षा की जाए। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की तरफ से लगातार दूसरे दिन भी सवाल खड़े किए गए। समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली ने मंडलायुक्त डॉ सुधीर एम बोबडे को पत्र भेजकर सवाल भी उठाया है और अनुरोध भी किया है।
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उनका कहना है कि आश्रय घर की सफाई और संवासिनियों की देखभाल में बहुत कमी रही है। अगर सात गर्भवती संवासिनी बलात्कार की शिकार होने के बाद यहां लाई गईं तो क्या गर्भपात का आप्शन उन्हें दिया गया था जो उनका कानूनी अधिकार है।
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इन गर्भवती संवासिनियों के स्वास्थ्य को लेकर प्रबंधकों ने क्या किया। क्योंकि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अब पता चला है कि एक एचआईवी प्लस और एक संवासिनी हेपेटाइटिस सी प्लस है। उनकी मांग है कि इन परिस्थितियों में मौजूदा प्रबंधकों को हटाया जाना चाहिए।
साथ ही संवासिनियों से बातचीत करके सच्चाई का पता लगाया जाना चाहिए। महिला समिति की नगर अध्यक्ष नीलम तिवारी और मंत्री सुधा सिंह ने मांग रखी कि त्वरित और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। गर्भवती और बीमार संवासिनियों के उपचार में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।
आरोप-प्रत्यारोप
राज्य बाल संरक्षण आयोग की पूर्व सदस्य जूही सिंह ने इस मामले में सरकार को सवाल के घेरे में लिया है। ट्वीट के माध्यम से उनका कहना है कि जब बच्चियां संरक्षण में थीं तो यह सब उनके साथ कैसे हो गया। ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ वाली सरकार में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।
सांसद सत्यदेव पचौरी ने ट्वीट करके सरकार पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब दिया है। उनका कहना है कि राजनीति के काले नागों अपने कर्कश दांतों से कानपुर की बेटियों को डंसना बंद करो। प्रशासन पहले ही साफ कर चुका है कि जब ये बेटियां यहां आईं थीं तभी प्रेग्नेंट थीं।
आरोप-प्रत्यारोप
राज्य बाल संरक्षण आयोग की पूर्व सदस्य जूही सिंह ने इस मामले में सरकार को सवाल के घेरे में लिया है। ट्वीट के माध्यम से उनका कहना है कि जब बच्चियां संरक्षण में थीं तो यह सब उनके साथ कैसे हो गया। ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ वाली सरकार में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।
सांसद सत्यदेव पचौरी ने ट्वीट करके सरकार पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब दिया है। उनका कहना है कि राजनीति के काले नागों अपने कर्कश दांतों से कानपुर की बेटियों को डंसना बंद करो। प्रशासन पहले ही साफ कर चुका है कि जब ये बेटियां यहां आईं थीं तभी प्रेग्नेंट थीं।