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आज से सैलरी आना चालू, अब तो परेशानियां होंगी बेकाबू
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 01 Dec 2016 12:07 AM IST
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औसत सैलरी 20 हजार रुपये भी मान ली जाए तो पहले सप्ताह में करीब एक हजार करोड़ रुपये की जरूरत
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आज पहली तारीख है। नौकरी पेशा लोगों के खातों में आज से सैलरी आना शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही घर का खर्च चलाने के लिए लोगों की भीड़ भी बैंकों और एटीएम पर उमड़ेगी, लेकिन बैंक और एटीएम इसके लिए तैयार नहीं हैं। हालांकि बुधवार को बैंकों और एटीएम में करेंसी पहुंचाई गई है, लेकिन डिमांड को देखते हुए यह बहुत कम है। कानपुर के सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठानों में एक से 10 तारीख के बीच कर्मचारियों के खातों में सैलरी पहुंचती है। अनुमान के मुताबिक शहर भर में करीब चार लाख लोगों के पास सैलरी एकाउंट है। सीए दीप कुमार मिश्रा का कहना है कि शहर में औसत सैलरी 20 हजार रुपये भी मान ली जाए तो पहले सप्ताह में करीब एक हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। सिर्फ शहर भर के लिए यह बड़ी रकम है।
15 से 20 फीसदी ही सप्लाई
शहर में करेंसी की डिमांड के मुकाबले सिर्फ 15 से 20 फीसदी ही सप्लाई हो पा रही है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक शहर में रोजाना करीब 300 करोड़ रुपये की जरूरत होती है लेकिन मिलते हैं 50 से 70 करोड़ रुपये ही। ऐसे में सैलरी एकाउंट का बोझ यदि एक हजार करोड़ रुपये बढ़ गया तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। यह डिमांड देश भर में होगी। ऐसे में रिजर्व बैंक का करेंसी सप्लाई सिस्टम फेल हो सकता है। बैंकों के सूत्र बताते हैं कि देश की करेंसी छपाई केंद्रों में दिन रात काम होेने के बावजूद अचानक 20 गुना सप्लाई बढ़ाना असंभव है। जबकि डिमांड को देखते हुए अगले एक सप्ताह में इतनी ही करेंसी की हर जगह जरूरत है। सप्लाई कई गुना अधिक किए जाने के बाद भी करेंसी की किल्लत बनी रहेगी।
यहां से आई कैश की डिमांड
शहर के एक दर्जन से अधिक सरकारी और इतने ही प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के पास कर्मचारियों की सैलरी के लिए कैश की डिमांड भेजी है। इनमें आर्मी, एयरफोर्स, डीएमएसआरडी, रेलवे, आर्डनेंस फैक्ट्री समेत आधा दर्जन अन्य विभाग शामिल हैं।
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कानपुर में 1.78 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स
मुख्य कोषाधिकारी शिव सिंह के मुताबिक जिले से वेतन लेने वाले करीब 75 हजार अफसर, कर्मचारी और शिक्षक हैं। पेंशनर की संख्या 43 हजार है। कोषागार से हर माह की पहली तारीख को इनका वेतन खातों में रिलीज हो जाता है। जो विभाग समय से पे बिल नहीं दे पाते हैं उन्हीं का वेतन एक तारीख के बाद रिलीज होता है। कर्मचारी नेता भूपेश अवस्थी का कहना है कि जिले में करीब 60 हजार केंद्रीय कर्मचारी हैं। इस तरह देखा जाए तो जिले में सेंट्रल, राज्य कर्मचारी और पेंशनर की संख्या लगभग एक लाख 78 पहुंचती है।
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15 से 20 फीसदी ही सप्लाई
शहर में करेंसी की डिमांड के मुकाबले सिर्फ 15 से 20 फीसदी ही सप्लाई हो पा रही है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक शहर में रोजाना करीब 300 करोड़ रुपये की जरूरत होती है लेकिन मिलते हैं 50 से 70 करोड़ रुपये ही। ऐसे में सैलरी एकाउंट का बोझ यदि एक हजार करोड़ रुपये बढ़ गया तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। यह डिमांड देश भर में होगी। ऐसे में रिजर्व बैंक का करेंसी सप्लाई सिस्टम फेल हो सकता है। बैंकों के सूत्र बताते हैं कि देश की करेंसी छपाई केंद्रों में दिन रात काम होेने के बावजूद अचानक 20 गुना सप्लाई बढ़ाना असंभव है। जबकि डिमांड को देखते हुए अगले एक सप्ताह में इतनी ही करेंसी की हर जगह जरूरत है। सप्लाई कई गुना अधिक किए जाने के बाद भी करेंसी की किल्लत बनी रहेगी।
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यहां से आई कैश की डिमांड
शहर के एक दर्जन से अधिक सरकारी और इतने ही प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के पास कर्मचारियों की सैलरी के लिए कैश की डिमांड भेजी है। इनमें आर्मी, एयरफोर्स, डीएमएसआरडी, रेलवे, आर्डनेंस फैक्ट्री समेत आधा दर्जन अन्य विभाग शामिल हैं।
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कानपुर में 1.78 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स
मुख्य कोषाधिकारी शिव सिंह के मुताबिक जिले से वेतन लेने वाले करीब 75 हजार अफसर, कर्मचारी और शिक्षक हैं। पेंशनर की संख्या 43 हजार है। कोषागार से हर माह की पहली तारीख को इनका वेतन खातों में रिलीज हो जाता है। जो विभाग समय से पे बिल नहीं दे पाते हैं उन्हीं का वेतन एक तारीख के बाद रिलीज होता है। कर्मचारी नेता भूपेश अवस्थी का कहना है कि जिले में करीब 60 हजार केंद्रीय कर्मचारी हैं। इस तरह देखा जाए तो जिले में सेंट्रल, राज्य कर्मचारी और पेंशनर की संख्या लगभग एक लाख 78 पहुंचती है।