Sabarmati Derailed: एनआईए ने गार्ड से पूछा- मौके पर क्या देखा?, किस तरह की आवाज आई थी, ट्रैक के लिए कही ये बात
Sabarmati Express Derail: साबरमती एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में जांच के लिए गठित एसएजी की जांच पूरी हो गई है। टीम ने अंतिम दिन 34 लोगों के बयान दर्ज किए। हादसे से वक्त 95 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से साबरमती एक्सप्रेस जा रही थी। वहीं, साजिश की आशंका के चलते एनआईए ने जांच शुरू कर दी है।
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कानपुर में वाराणसी से अहमदबाद जा रही साबरमती एक्सप्रेस हादसे के पीछे साजिश की आशंका के मद्देनजर केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी जांच शुरू कर दी है। गुरुवार दोपहर एनआईए के दो अधिकारियों ने सेंट्रल स्टेशन और घटनास्थल का जायजा लिया। ट्रेन के लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट और गार्ड से पूछताछ की। यहां के बाद अधिकारी पनकी थाने भी गए और स्टाफ से जानकारी जुटाई।
पिछले सप्ताह शुक्रवार रात करीब ढाई बजे साबरमती एक्सप्रेस गोविंदपुरी और भीमसेन स्टेशन के बीच पनकी में लोहे की पटरी से टकराकर ट्रैक से उतर गई थी। ट्रेन के इंजन समेत 22 डिब्बे डिरेल हो गए थे। प्रारंभिक जांच में साजिश की आशंका सामने आई है। इसके बाद पुलिस को यात्रियों समेत दो हजार लोगों के बयान लेने के निर्देश दिए गए।
ट्रैक को देखा और जानकारी हासिल की
इस मामले की गंभीरता और इसमें साजिश की आशंका को लेकर एनआईए की टीम दोपहर में सेंट्रल स्टेशन पहुंची। यहां उनके अधिकारियों ने लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट से पूरा घटनाक्रम जाना। उनसे बोल्डर से टकराने और इमरजेंसी ब्रेक लगाने संबंधित जानकारी ली। गार्ड से पूछा कि उन्होंने मौके पर क्या देखा था। उन्हें किस तरह की आवाज आई थी। यहां के बाद घटनास्थल पर गए। ट्रैक को देखा और पनकी पुलिस से भी जानकारी हासिल की।
पटरी के टुकड़े को कहीं से लाकर ट्रैक पर रखने के सुराग मिले
वहीं, साबरमती एक्सप्रेस के पटरी से उतरने के मामले में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (एसएजी) की कमेटी ने जांच पूरी कर ली है। गुरुवार को पांच सदस्यीय टीम ने रेलवे के 34 और स्टाफ के बयान लिए। उनसे पूरा घटनाक्रम जाना। पटरी से टकराने के बाद क्या हुआ? ट्रेन में किस तरह की हरकत हुई और बाद का क्या सीन रहा? प्रारंभिक जांच में पटरी के टुकड़े को कहीं से लाकर ट्रैक पर रखने के सुराग मिले हैं।
आगे और पीछे का ट्रैक बिल्कुल ठीक रहा
जांच में पता चला है कि घटना के वक्त ट्रेन 95 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से थी। बोल्डर से टकराने के बाद इंजन के दोनों कैटल गार्ड टूट गए, जबकि उसके पीछे की बोगियों में भी टक्कर लगने के कुछ निशान पाए गए। उनमें बोल्डर या स्लीपर के टुकड़े भी मिले हैं। हादसे वाली जगह से एक किलोमीटर आगे और पीछे का ट्रैक बिल्कुल ठीक रहा।
दो दिन रेलवे और ट्रेन स्टॉफ के बयान
दरअसल, रेलवे की ओर से मामले की जांच के लिए एसएजी की समिति गठित की गई, जिसमें चेयरमैन के रूप में प्रिंसिपल चीफ सेफ्टी ऑफिसर और चीफ रोलिंग स्टॉक इंजीनियर, चीफ ट्रैक इंजीनियर, चीफ सिक्योरिटी कमिश्नर, आरपीएफ के डीआईजी शामिल रहे। समिति ने दो दिन सेंट्रल स्टेशन के कॉन्फ्रेंस रूम में रेलवे और ट्रेन स्टॉफ के बयान लिए।
स्पीडोमीटर और कई सेंसर कार्ड की जांच की
घटनास्थल का निरीक्षण किया, जबकि जूही स्थित लोकोशेड में खड़े साबरमती के इंजन के स्पीडोमीटर और कई सेंसर कार्ड की जांच की। स्पीडोमीटर की जांच हुई, जिसमें ट्रेन की उस वक्त की स्पीड 95 किलोमीटर प्रतिघंटे होने का पता चला। झांसी मंडल के पीआरओ मनोज सिंह ने बताया कि एसएजी की जांच पूरी हो गई है।
एनसीआर जीएम को सौंपेगी रिपोर्ट
दोपहर बाद अधिकारी कानपुर से रवाना हो गए। अब समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर एनसीआर जीएम को सौंपेगी। अधिकारियों ने लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट, गार्ड समेत कई स्टॉफ के बयान लिए हैं। घटनास्थल और इंजन की भी जांच की।
प्रभावित ट्रैक की विशेषज्ञ करेंगे जांच
साबरमती एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह से प्रभावित हुई कानपुर झांसी रूट की अप लाइन नए सिरे से तैयार हो गई है। यहां पर गुरुवार को पटरियों पर ग्राइंडर के साथ ही ज्वाइंट पर सपोर्टर लगाए गए। हादसे के बाद करीब 450 मीटर का ट्रैक पूरी तरह खराब हो गया था।
ट्रैक पर कंक्रीट के स्लीपर लगा दिए गए थे
यहां लोहे के स्लीपर लगाकर 29 घंटे के अंदर अप लाइन की ट्रेनों का संचालन कराया गया। इस बीच ट्रैक को अपग्रेड करने का कार्य जारी रहा। इसपर कॉशन लेकर ट्रेनों की आवाजाही हुई। बुधवार को ट्रैक पर कंक्रीट के स्लीपर लगा दिए गए थे। अभी प्रभावित रूट से 10 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेनें जाएंगी।