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आरटीई : गरीब बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी पर होगी कार्रवाई, डीएम ने स्कूल संचालकों को चेताया
Fri, 13 Mar 2020 02:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 13 Mar 2020 02:50 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत दाखिला देने में आनाकानी करने वाले स्कूलों की अब खैर नहीं। गुरुवार को इस संबंध में हुई बैठक में जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी ने कहा कि अगर स्कूलों के खिलाफ शिकायत मिली तो कड़ी कार्रवाई होगी।
आरटीई के तहत पब्लिक स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हर साल इसमें दिक्कतें आती हैं। इसके चलते ही जिलाधिकारी ने सीबीएसई, सीआईएससीई बोर्ड के स्कूलों की बैठक बुलाई थी। इसमें करीब 50 स्कूलों ने हिस्सा लिया। स्कूलों से भी उनकी समस्याएं पूछी गईं। इस पर स्कूलों की ओर से बताया गया कि कई लोग फर्जी डॉक्यूमेंट्स लगाकर दाखिला दिलाते हैं। कार से स्कूल आते हैं और खुद को दुर्बल आय वर्ग का बताते हैं।
जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि किसी भी फर्जी छात्र का दाखिला नहीं होगा। बैठक में शारदा (स्कूल हर दिन आए) पोर्टल के बारे में भी चर्चा हुई। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार, डीआईओएस, बीएसए, एबीएसए मौजूद रहे।
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पहला चरण: 26 मार्च तक आवेदन
पहले चरण में ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन करने की तिथि 26 मार्च तक है। यह प्रक्रिया दो मार्च से शुरू है। 27 मार्च से 30 मार्च तक बीएसए आवेदन पत्रों का सत्यापन कराएंगे। 31 मार्च को लॉटरी निकलेगी और इसी आधार पर पांच अप्रैल को प्रवेश दिया जाएगा।
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आरटीई के तहत पब्लिक स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हर साल इसमें दिक्कतें आती हैं। इसके चलते ही जिलाधिकारी ने सीबीएसई, सीआईएससीई बोर्ड के स्कूलों की बैठक बुलाई थी। इसमें करीब 50 स्कूलों ने हिस्सा लिया। स्कूलों से भी उनकी समस्याएं पूछी गईं। इस पर स्कूलों की ओर से बताया गया कि कई लोग फर्जी डॉक्यूमेंट्स लगाकर दाखिला दिलाते हैं। कार से स्कूल आते हैं और खुद को दुर्बल आय वर्ग का बताते हैं।
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जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि किसी भी फर्जी छात्र का दाखिला नहीं होगा। बैठक में शारदा (स्कूल हर दिन आए) पोर्टल के बारे में भी चर्चा हुई। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार, डीआईओएस, बीएसए, एबीएसए मौजूद रहे।
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पहला चरण: 26 मार्च तक आवेदन
पहले चरण में ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन करने की तिथि 26 मार्च तक है। यह प्रक्रिया दो मार्च से शुरू है। 27 मार्च से 30 मार्च तक बीएसए आवेदन पत्रों का सत्यापन कराएंगे। 31 मार्च को लॉटरी निकलेगी और इसी आधार पर पांच अप्रैल को प्रवेश दिया जाएगा।
दूसरे चरण में चार अप्रैल से 24 अप्रैल तक आवेदन होगा। 25 अप्रैल से 29 अप्रैल तक सत्यापन और 30 अप्रैल को लॉटरी निकलेगी। 11 मई को प्रवेश दिया जाएगा। वहीं तीसरे चरण में चार मई से 10 जून तक आवेदन होगा। 11 जून से 15 जून तक आवेदन पत्रों का सत्यापन और 16 जून को लॉटरी निकलेगी। 15 जुलाई को प्रवेश मिलेगा।
स्कूलों को मिलता है 450 रुपये मासिक
आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले स्कूलों को सरकार की ओर से प्रति छात्र अधिकतम 450 रुपये या स्कूल फीस का भुगतान किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक चार से सात हजार रुपये महीने की फीस लेने वाले स्कूल इतने कम भुगतान की वजह से ही गरीब बच्चों का दाखिला लेने से कतराते हैं।
इनको मिलता है प्रवेश
एससी, एसटी, ओबीसी श्रेणी के हैं या दिव्यांगजन हैं या फिर बच्चे के माता-पिता में से कोई एक कैंसर या एड्स से पीड़ित है तो वह बिना किसी शर्त अपने वार्ड के स्कूल में दाखिले के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए संबंधित प्रमाण पत्र लगाने होते हैं।
वहीं जनरल कैटेगरी के लिए एक लाख की सालाना आय निर्धारित है। ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांगजन, कैंसर या एड्स पीड़ितों के लिए वार्षिक आय की र्कोई सीमा नहीं है। इनके बच्चों की पढ़ाई निशुल्क होती है। साथ ही कॉपी-किताबों के लिए 5000 रुपये अलग से आवंटित होते हैं।
स्कूलों को मिलता है 450 रुपये मासिक
आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले स्कूलों को सरकार की ओर से प्रति छात्र अधिकतम 450 रुपये या स्कूल फीस का भुगतान किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक चार से सात हजार रुपये महीने की फीस लेने वाले स्कूल इतने कम भुगतान की वजह से ही गरीब बच्चों का दाखिला लेने से कतराते हैं।
इनको मिलता है प्रवेश
एससी, एसटी, ओबीसी श्रेणी के हैं या दिव्यांगजन हैं या फिर बच्चे के माता-पिता में से कोई एक कैंसर या एड्स से पीड़ित है तो वह बिना किसी शर्त अपने वार्ड के स्कूल में दाखिले के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए संबंधित प्रमाण पत्र लगाने होते हैं।
वहीं जनरल कैटेगरी के लिए एक लाख की सालाना आय निर्धारित है। ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांगजन, कैंसर या एड्स पीड़ितों के लिए वार्षिक आय की र्कोई सीमा नहीं है। इनके बच्चों की पढ़ाई निशुल्क होती है। साथ ही कॉपी-किताबों के लिए 5000 रुपये अलग से आवंटित होते हैं।