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भाषणबाजी नहीं, काम करके दिखाओ:भागवत
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 16 Feb 2015 03:15 AM IST
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‘सिर्फ भाषणबाजी से काम नहीं चलेगा, हमें करने की आदत डालनी होगी। इसकी शुरुआत स्वयं से फिर समाज और फिर देश स्तर पर होनी चाहिए। संघ को लेकर लोग तरह तरह की कल्पनाएं करते हैं।
इस तरह के आयोजन को अक्सर शक्ति प्रदर्शन कहा जाता है। जबकि यह हमारा आत्म दर्शन है। लड़ाई बाहर से कम, हमारे अंदर से ज्यादा है।’ आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को निराला नगर मैदान में संघ के राष्ट्र रक्षा संगम कार्यक्रम में यह संबोधन किया।
संघ प्रमुख ने कहा कि संघ हिंदुओं को देश के लिए लड़ने वाला और करने वाला बनाता है, बयानबाजी करने वाला नहीं। इसलिए हमे हमेशा करने की आदत डालनी होगी। सत्ता और राजनीतिक दलों में बैठे अच्छे लोग काम करेंगे, तभी देश बदलेगा।
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उन्होंने कहा कि शक्ति प्रदर्शन वे लोग करते हैं, जो शक्तिहीन होते हैं। हमें इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्वयं सेवक अनुशासन, समय पालन, नियम पालन सीखते हैं।
उन्होंने कहा कि हम अपने भाग्य के निर्माता हैं। हम ही इसे बना और बिगाड़ सकते हैं। यही बात देश के निर्माण पर भी लागू होती है। उनका कहना है कि केवल पढ़-लिख लेने से कुछ नहीं होता है।
हमारी दृष्टि एक महिला के प्रति कैसी है, हमारा आचरण कैसा है, इस पर ध्यान देना होगा। भ्रष्टाचार पर चोट करते हुए भागवत ने कहा कि भ्रष्टाचार करके लोग अमीर तो बन सकते हैं, लेकिन इसे स्वीकार करने की हिम्मत उनमें नहीं होती है। भ्रष्टाचारियों का इस देश में हमेशा पतन ही हुआ है।
आपने जो कमाया उसे किस तरह बांटा, यह महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी के विचार सुनो लेकिन अपने विचार पर पक्के रहो। ऐसा करने वाले ही हिंदू कहलाते हैं। हिंदुओं को संगठित करो, उनकी आदतें ठीक करो, तब जाकर देश का हर कार्य सफल होगा।
सरसंघचालक ने कहा कि अच्छा समाज तैयार करो, इसकी शुरुआत अपने से करो। देश में उपदेश देने वाले बहुत मिलेंगे। रोने और निराशा से काम नहीं चलेगा, खुद बनो, मित्रों को बनाओ।
कहा कि यदि हम अपने अंदर की लड़ाई को जीत लेते हैं तो बाहर हमें कोई पराजित नहीं कर सकता है। उन्होंने गांव-गांव, गली-गली संघ का विस्तार करने पर जोर दिया। साथ ही इसमें गुणात्मक सुधार की भी आवश्यकता जताई। इससे पूर्व उन्होंने ध्वज प्रणाम किया।
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इस तरह के आयोजन को अक्सर शक्ति प्रदर्शन कहा जाता है। जबकि यह हमारा आत्म दर्शन है। लड़ाई बाहर से कम, हमारे अंदर से ज्यादा है।’ आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को निराला नगर मैदान में संघ के राष्ट्र रक्षा संगम कार्यक्रम में यह संबोधन किया।
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संघ प्रमुख ने कहा कि संघ हिंदुओं को देश के लिए लड़ने वाला और करने वाला बनाता है, बयानबाजी करने वाला नहीं। इसलिए हमे हमेशा करने की आदत डालनी होगी। सत्ता और राजनीतिक दलों में बैठे अच्छे लोग काम करेंगे, तभी देश बदलेगा।
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उन्होंने कहा कि शक्ति प्रदर्शन वे लोग करते हैं, जो शक्तिहीन होते हैं। हमें इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्वयं सेवक अनुशासन, समय पालन, नियम पालन सीखते हैं।
उन्होंने कहा कि हम अपने भाग्य के निर्माता हैं। हम ही इसे बना और बिगाड़ सकते हैं। यही बात देश के निर्माण पर भी लागू होती है। उनका कहना है कि केवल पढ़-लिख लेने से कुछ नहीं होता है।
हमारी दृष्टि एक महिला के प्रति कैसी है, हमारा आचरण कैसा है, इस पर ध्यान देना होगा। भ्रष्टाचार पर चोट करते हुए भागवत ने कहा कि भ्रष्टाचार करके लोग अमीर तो बन सकते हैं, लेकिन इसे स्वीकार करने की हिम्मत उनमें नहीं होती है। भ्रष्टाचारियों का इस देश में हमेशा पतन ही हुआ है।
आपने जो कमाया उसे किस तरह बांटा, यह महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी के विचार सुनो लेकिन अपने विचार पर पक्के रहो। ऐसा करने वाले ही हिंदू कहलाते हैं। हिंदुओं को संगठित करो, उनकी आदतें ठीक करो, तब जाकर देश का हर कार्य सफल होगा।
सरसंघचालक ने कहा कि अच्छा समाज तैयार करो, इसकी शुरुआत अपने से करो। देश में उपदेश देने वाले बहुत मिलेंगे। रोने और निराशा से काम नहीं चलेगा, खुद बनो, मित्रों को बनाओ।
कहा कि यदि हम अपने अंदर की लड़ाई को जीत लेते हैं तो बाहर हमें कोई पराजित नहीं कर सकता है। उन्होंने गांव-गांव, गली-गली संघ का विस्तार करने पर जोर दिया। साथ ही इसमें गुणात्मक सुधार की भी आवश्यकता जताई। इससे पूर्व उन्होंने ध्वज प्रणाम किया।