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71 शौचालय निर्माण में 10.50 लाख की धांधली, चेयरमैन के भाई की कंपनी को कर दिया भुगतान

Wed, 05 Jan 2022 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jan 2022 11:15 PM IST
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Rs 10.50 lakh was rigged in the construction of 71 toilets, payment was made to the company of the chairman's brother
कानपुर देहात। अकबरपुर नगर पंचायत में व्यक्तिगत शौचालय योजना में जमकर खेल हुआ। नियम दरकिनार कर चेयरमैन के भाई की कंपनी को कमाई कराई गई। 71 लाभार्थियों के घरों में शौचालय बनवाकर ठेेकेदार को 10.50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। यह घोटाला तीन सदस्यीय समिति की जांच में सामने आया है।
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स्वच्छ भारत मिशन में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण की धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था है। इसका शासनादेश भी है। वहीं अकबरपुर में गरीबों के यहां शौचालय निर्माण का काम नगर पंचायत प्रशासन ने चेयरमैन के भाई की चंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी को दे दिया।
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पहले चरण में 51 शौचालयों का निर्माण 12 हजार प्रति शौचालय व बाद में 20 शौचालयों का निर्माण 20 हजार प्रति शौचालय के हिसाब से कराकर कुल 10.50 लाख का भुगतान ठेेकेदार को कर दिया गया। घोटाले की जानकारी होने पर अकबरपुर के संदीप निगम ने शिकायत की।
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कराए गए कार्यों में अनियमितता की जांच डीएम जेपी सिंह ने कराई। सीडीओ सौम्या पांडेय की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने जांच की। समिति ने व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण के अभिलेखीय साक्ष्यों की पड़ताल की तो हकीकत सामने आ गई। शौचालय निर्माण की पूरी प्रक्रिया गड़बड़ पाई गई।
जांच में 10.50 लाख की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई। जांच समिति के सदस्य वरिष्ठ कोषाधिकारी केके पांडेय ने बताया कि वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है। विस्तृत रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई है।
संयुक्त सचिव के पत्र का हवाला देकर किया घोटाला
व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में ठेकेदार को कमाई कराने के खेल में संयुक्त सचिव के पत्र को ढाल बनाया गया। तीन सदस्यीय समिति ने जांच शुरू की तो निकाय प्रशासन ने तर्क दिया कि भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव के 15 अप्रैल 2015 के पत्र के अधीन ठेकेदार को काम दिया गया है।

जांच में उक्त ईओ को संबोधित नहीं पाया गया। समिति की जांच में सामने आया कि व्यक्तिगत शौचालय निर्माण का शासनादेश 24 सितंबर 2017 को जारी किया गया। यह शासनादेश ईओ को संबोधित है। इस प्रकार संयुक्त सचिव के पत्र के आधार पर ठेकेदार से शौचालय निर्माण कराना सही नहीं है।
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