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Kanpur News: कोर्ट का आदेश, दो माह में खाली करना होगा रॉयल गार्डन लॉन

Fri, 20 Mar 2026 01:25 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2026 01:25 AM IST
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Royal Garden Lawn to be vacated within two months, court orders
कानपुर। टाटमिल चौराहे के पास 3.96 एकड़ में बने बंगले में चल रहे रॉयल गार्डन लॉन को अपर जिला जज सप्तम आजाद सिंह ने दो माह में खाली करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सात जनवरी तक इस मुकदमे का निस्तारण करने का निर्देश दिया था।
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छावनी के टैगोर नगर निवासी संजीव केडिया और उनकी मां पुष्पा केडिया ने रॉयल गार्डन लॉन का संचालन कर रहे रेलबाजार के हैरिसगंज निवासी आशा तिवारी और उनके बेटे पंकज तिवारी के खिलाफ संपत्ति अंतरण अधिनियम के तहत कोर्ट में वाद दाखिल किया था। वाद में संजीव ने कहा था कि उनके पिता मन्नीलाल केडिया हैरिसगंज स्थित बंगला नंबर 116 सर्वे नंबर 668/340 के स्वामी हैं। उन्होंने शीतल प्रसाद तिवारी को बंगले में दो कमरे और खुली जगह किरायेदारी में दी थी। शीतल 192 रुपये 50 पैसे प्रतिमाह की दर से किरायेदार थे। शीतल की मौत के बाद उनकी पत्नी आशा व पुत्र पंकज किरायेदार बने। इन पर जनवरी 1990 से मई 2023 तक 540092 रुपये किराया बकाया हो गया। किरायेदारी वाले भाग पर यह लोग रॉयल गार्डन लॉन संचालित करने लगे।
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मुकदमे के जवाब में आशा व पंकज की ओर से कहा गया कि संजीव केडिया भवन स्वामी नहीं हैं बल्कि केंद्र सरकार है। मन्नीलाल लाइसेंसी थे। छावनी परिषद की सहमति से शीतल प्रसाद तिवारी को छह कमरे, आठ कोठरी, चार बरामदा, आठ सर्वेंट क्वार्टर, एक टीनशेड, एक हॉल व खुली जगह के 192 रुपये 50 पैसे की दर से किरायेदार थे और शीतल प्रसाद की मौत के बाद उनकी पत्नी व बेटे उसमें रह रहे हैं। शीतल प्रसाद तिवारी कोर्ट में किराया भी जमा करते थे जो मन्नीलाल द्वारा लिया भी गया है। किराया जमा है। दोनों पक्षों को सुनने व दस्तावेजों को देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि आशा और पंकज बिना किराया दिए सालों से संजीव की संपत्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं। रहने के लिए दी गई जगह का व्यावसायिक इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने दो माह में जगह खाली करने का आदेश दिया है।
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कब्जा ही नहीं लाखों रुपये हर्जाना भी देना होगा

कोर्ट ने आदेश में कहा कि किरायेदार आशा और पंकज को मुकदमा दाखिल करने से पहले के तीन साल का किराया 6930 रुपये भी देना होगा और मुकदमा दाखिल होने से कब्जा देने की तारीख तक 50 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से उपयोग धनराशि भी वादी को दो माह में देनी होगी। दो माह में धनराशि न देने पर छह प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज भी अदा करना होगा।




25 साल बाद भी नामांतरण न होने पर कोर्ट ने जताई आपत्ति

कोर्ट ने आदेश की एक प्रति छावनी परिषद को भी भेजने के निर्देश दिए हैं। आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा है कि मूल अध्यासी मन्नीलाल केडिया की 25 साल पहले मौत होने के बावजूद उनकी जगह उनके वारिसों का नामांतरण नहीं किया गया और न ही उनकी जगह किसी नए अध्यासी का नाम दर्ज किया गया जो आपत्तिजनक है। मुकदमे में छावनी परिषद पक्षकार नहीं है लेकिन भारत सरकार की संपत्ति होने के बावजूद भी छावनी परिषद द्वारा नामांतरण प्रकिया में बहुत देर किया जाना राष्ट्रहित में नहीं है। भविष्य में ऐसा न हो इसलिए आदेश छावनी परिषद को भेजा जाए।
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