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Kanpur News: गमले बनाने वाली सीमेंट से बन रही थीं सड़के और एयरपोर्ट

Thu, 22 Oct 2026 02:23 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2026 02:23 AM IST
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Roads and airports were being built using cement meant for making flowerpots.
कानपुर। इस्पातनगर में पकड़ी गई नकली सीमेंट का इस्तेमाल गमले व इंटरलॉकिग की ईंट बनाने के अलावा ग्रामीण इलाकों में बिछाए जाने वाली सीसी सड़कों में किया जाना था। फिर भी लालची फर्म संचालक उसी सीमेंट का प्रयोग लखनऊ एयरपोर्ट, सीएम ग्रिड की सड़कों और मकान बनाने में कर रहे थे। इस बात का खुलासा सीमेंट स्क्रैप (खराब सीमेंट) सप्लायर निशांत मित्तल ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के सामने किया। सीपी ने मंगलवार की सुबह खुद पनकी थाने पहुंचकर मेरठ से पकड़कर लाए गए निशांत से पूछताछ की। इसके बाद सीपी ने इस्पातनगर के कारखाने का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि नकली सीमेंट के निर्माण में राख तक का प्रयोग किया जा रहा था।
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बता दें कि आठ दिन पूर्व अडाणी ग्रुप की शिकायत पर पुलिस ने इस्पातनगर से नकली सीमेंट बनाने की फैक्टरी का भंडाफोड़ किया था। फैक्टरी के संचालक और एसीसी सीमेंट डिस्ट्रीब्यूटर सगे भाई नीरज और धीरज गुप्ता के अलावा उनके दो साझेदार मेरठ निवासी निशांत मित्तल और सुनील मित्तल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। फैक्टरी में बड़ी मात्रा में नकली सीमेंट पकड़ी गई थी। इसके बाद से ही पुलिस चारों आरोपियों की तलाश कर रही थी।
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सोमवार रात पनकी पुलिस ने मेरठ से निशांत को पकड़ा। मंगलवार को उसे लेकर कानपुर आई थी। यहां पनकी थाने में सीपी ने जब निशांत से पूछताछ शुरू की तो उसने बताया कि जहां पर भी एसीसी की रैक उतरती है वहां पर कुछ माल सेट एंड वेट (गीली अथवा नरम सीमेंट) और कुछ माल कट एंड टोन ( सूखकर टूटा या पत्थर सा) का होता है। इसे कंपनी स्क्रैप मानती है और उसकी रैक उतरते ही नीलामी करती है।
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निशांत के अनुसार उसकी फर्म त्रिदेव इंटरप्राइजेज इसी स्क्रैप को 120 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से खरीदती है। उसे 150 रुपये के हिसाब से बिक्री करती है। नीरज-धीरज की फर्म भी उससे बड़े स्तर पर माल खरीदते थे। फिर वह इस माल का क्या करते थे उसे नहीं पता। निशांत ने बताया कि एसीसी के अलावा उसकी फर्म कई अन्य ब्रांड की सीमेंट का स्क्रैप बेचने काम करती है।
महीने में 15000 बोरियों की बिक्री की जाती है। निशांत ने बताया कि उसकी तरह दिल्ली का पवन गोयल भी सीमेंट का स्क्रैप सप्लाई का काम करता है। पुलिस अब फरार दूसरे आरोपी व निशांत के पिता सुनील मित्तल के साथ-साथ पवन गोयल की भी तलाश कर रही है। सीपी ने बताया कि दोनों की धरपकड़ के लिए टीमें लगीं हैं। इसके अलावा फैक्टरी से जो नकली सीमेंट बरामद हुई है उसके नमूने भी जांच के लिए भेजे जाएंगे।

- पिता 15 तो बेटा 10 साल से कर रहा कारोबार
पूछताछ में निशांत ने बताया कि वह करीब 10 साल सीमेंट का स्क्रैप खरीदने का काम कर रहा है जबकि उसके पिता सुनील मित्तल करीब 15 साल से इस काम को कर रहे थे। पुलिस अब यह पता करने में लगी है कि गुप्ता बंधुओं की तरह निशांत की फर्म और कहां कहां स्क्रैप सप्लाई करती है जिससे नकली सीमेंट तैयार की जाती है।
नेपाल में मिल रही गुप्ता बंधुओं की लोकेशन
पुलिस सूत्राें के अनुसार दोनों फरार फैक्टरी संचालक नीरज और धीरज गुप्ता की लोकेशन नेपाल में मिल रही है। वे दोनों गिरफ्तारी से पहले हाईकोर्ट से राहत पाने का भी प्रयास कर रहे हैं। पुलिस की दो टीमें दोनों भाइयों का पीछा कर रही है। दावा किया जा रहा है कि निशांत की तरह दोनों की गिरफ्तारी भी जल्द की जाएगी।
कोट...

यदि नकली सीमेंट या घटिया सीमेंट से कोई सड़क बनाई जाएगी तो वह जल्द टूट जाएगी। मानकों के अनुरूप सीसी रोड निर्माण में गुणवत्तापूर्ण सीमेंट का होना जरूरी है।
- आरपी शुक्ला, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, नगर निगम



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बिना लिखा-पढ़ी टहलती रही पुलिस, छूट गया निशांत
कानपुर। आरोपी निशांत को मेरठ से गिरफ्तार करने के बाद पनकी पुलिस पवन गोयल की तलाश में बिना लिखापढ़ी करे उसे दिल्ली ले गई। दिल्ली से लौटने के बाद ही पुलिस ने लिखापढ़ी में निशांत की गिरफ्तारी दिखाई। इसका परिणाम यह रहा कि गिरफ्तारी के समय में अंतर आ गया। मंगलवार शाम जब विवेचक आरोपी की न्यायिक हिरासत अर्जी लेकर कोर्ट पहुंचे तो वहां फंस गए। कोर्ट ने आरोपी को जेल भेजने की अर्जी खारिज करते हुए उसे रिहा कर दिया।

पुलिस कमिश्नर का कहना है कि करीब साढ़े सात घंटे की देरी होने के चलते आरोपी को जेल नहीं भेजा जा सका है। उससे एक लाख का बांड भराया गया है। पनकी पुलिस ने गौतमबुद्धनगर के निशांत मित्तल को गिरफ्तार किया था। विवेचक ने निशांत को गौतमबुद्धनगर से 19 अक्तूबर की शाम 7:30 बजे गिरफ्तार करना दिखाया जबकि केस डायरी के एक पर्चे में लिखा था कि निशांत गौतमबुद्धनगर में अपने घर पर मिला। इसके बाद उसे दिल्ली ले जाया गया। इससे साफ हो गया कि गिरफ्तारी पहले ही कर ली गई थी। गिरफ्तारी के बाद नियमानुसार 24 घंटे के अंदर आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाना चाहिए जबकि विवेचक गिरफ्तारी के बाद अवैध तरीके से पहले उसे दिल्ली ले गए इसके बाद कोर्ट लाया गया। इसके अलावा संबंधित थाने में गिरफ्तारी की सूचना भी नहीं दी गई। गिरफ्तारी का कारण और आधार भी उसे नहीं बताया गया। इन सभी आधारों पर रिमांड मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए निशांत को रिहा करने के आदेश दे दिए।
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