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Kanpur News: आरएमसी प्लांट छह, 22 ने प्लांट होने के कागज बनवाकर डाले टेंडर

Fri, 05 Sep 2025 02:17 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Sep 2025 02:17 AM IST
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RMC Plant 6, 22 submitted tenders after getting the papers of having a plant prepared
कानपुर। सीसी सड़कों और नालों के निर्माण में गुणवत्ता के लिए नगर निगम ने ठेकेदारों के पास आरएमसी प्लांट होने की अनिवार्यता लागू की है। इस नियम को ठेंगा दिखाते हुए 22 ठेकेदारों ने टेंडर डाल दिए। इन्होंने टेंडर में खुद को आरएमसी प्लांट का मालिक या पांच साल के लिए प्लांट किराये या पट्टे पर लेने का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट लगाया। वास्तविकता में शहर में मात्र छह आरएमसी प्लांट ही हैं। गड़बड़ी की आशंका में महापौर ने इसकी जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है।
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नगर निगम ने 15वें वित्त आयोग से 200 विकास कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। इन कार्यों की अनुमानित लागत 80 करोड़ रुपये है। टेंडर लिस्ट में कार्य के क्रमांक संख्या एक से 71 तक विभिन्न मोहल्लों में हॉट मिक्स प्लांट से सड़कें बननी हैं। क्रमांक संख्या 72 से 99 तक आरएमसी प्लांट से सीसी रोड, नालियों आदि के निर्माण शामिल हैं। नगर निगम ने इन टेंडरों में पहली बार यह शर्त रखी है कि सीसी से होने वाले सड़कों, नालों, नालियों के निर्माण के लिए वही ठेकेदार टेंडर डाल सकेंगे जिनके पास आरएमसी प्लांट होंगे या ऐसे प्लांट से अनुबंध होगा। ठेकेदारों ने आरएमसी प्लांट धारकों से रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराकर यह लिखवा लिया कि उन्होंने यह प्लांट पांच साल के लिए किराए पर ले लिया है। कुछ ने पट्टा कराने का उल्लेख करते हुए नगर निगम में कागजात दाखिल किए।
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चौंकाने वाली बात यह है कि इन एग्रीमेंट के अनुसार एक-एक प्लांटधारक ने तीन से पांच-छह लोगों को अपना प्लांट किराये पर दे दिया वह भी पांच साल के लिए। सवाल उठ रहा है कि एक प्लांट एक अवधि में कई ठेकेदारों को किराये पर कैसे दिया जा सकता है। नगर निगम के जानकार धोखाधड़ी की श्रेणी का बता रहे हैं। कुुछ एग्रीमेंट भी फर्जी होने का दावा किया गया। बताया गया कि इस तरह की गड़बड़ी से आरसीसी से होने वाली सड़कों, नालों, नालियों के निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। जो ठेकेदार मिलीभगत कर मनमाने कागज तैयार करा सकता है वह घटिया निर्माण भी करा सकता है। जांच में प्लांटधारकों, ठेकेदारों और कुछ अभियंताओं की मिलीभगत का खुलासा होने के संकेत दिए गए हैं।
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नगर निगम के मुख्य अभियंता एसएफए जैदी ने बताया कि मैनुअल तरीके से बोरियों या तसलों से गिट्टी, मौरंग, सीमेंट मिलवाने से इनका अनुमात मानकों के अनुरूप है या नहीं, पता नहीं चल पाता। मसाला बनने के बाद यह भी नहीं पता चल पाता कि मौरंग या गिट्टी में मिट्टी तो नहीं मिली है। इससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसी कमी को दूर करने के लिए इस बार आरसीसी से होने वाले निर्माणों में आरएमसी प्लांट की अनिवार्यता की शर्त रखी गई है। यदि ठेकेदारों ने गलत अनुबंध किया है तो उनके टेंडर निरस्त होंगे। आरएमसी प्लांट धारक को भी नोटिस देकर पूछताछ की जाएगी।

आरएमसी प्लांट धारकों ने ही आरसीसी संबंधी कार्यों के लिए टेंडर डाले हैं या फर्जी कागजों के आधार पर अन्य ठेकेदारों ने इसकी जांच के लिए महापौर प्रमिला पांडेय ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी में दो पार्षद, एक अधिशासी अभियंता, एक सहायक अभियंता और एक अवर अभियंता शामिल हैं।
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