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आईआईटी में खुलेगा रिवर साइंस एंड मैनेजमेंट सेंटर

Mon, 20 Apr 2015 02:40 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Mon, 20 Apr 2015 02:40 AM IST
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River Science and Management Center will open in IIT
आईआईटी में रिवर साइंस एंड मैनेजमेंट सेंटर खोला जाएगा, इसमें पढ़ाई और रिसर्च की विशेष सुविधा उपलब्ध रहेगी। सेंटर खोलने की सैद्धांतिक सहमति केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से मिल चुकी है। जल्द ही औपचारिक आदेश जारी होगा।
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इसी सिलसिले में गत शुक्रवार को सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. विनोद तारे ने नई दिल्ली में पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन भी दिया है, जिसे केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पसंद किया है। रिवर साइंस एंड मैनेजमेंट सेंटर सबसे पहले मोक्षदायिनी गंगा को अविरल, निर्मल बनाने पर काम करेगा।
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आईआईटी कानपुर पहले ही इस दिशा में काम कर रहा है।  प्रो. विनोद तारे ने बताया कि रिवर साइंस एंड मैनेजमेंट सेंटर आईआईटी कानपुर में खोलने का प्रस्ताव जल संसाधन मंत्रालय को दिया था। सेंटर स्थापित करने पर सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। गंगा को निर्मल व अविरल बनाने में आईआईटी के विज्ञानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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आईआईटी ने गंगा में गिरने वाले एक-एक नाले की विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालय को दी है। बताया है कि नालों और टेनरियों से निकलने वाला कचरा कैसे, गंगा को प्रदूषित कर रहा है। आईआईटी ने सुझाव दिया है कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज पर काम करना होगा, तभी सफलता मिल पाएगी।

इस पर जल संसाधन मंत्रालय ने ट्रिपल पी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) का सहयोग लेने की बात कही है। प्रो. तारे ने बताया कि गंगा को अविरल, निर्मल बनाने का काम सही दिशा में है लेकिन समय बहुत लग रहा है। इस प्रक्रिया में तेजी लानी होगी। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने टेनरियों से निकलने वाले कचरा और उसके निस्तारण की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी सीएलआरआई को दी है। साथ ही ऑनलाइन मानीटरिंग सिस्टम की व्यवस्था लागू की है। इस सिस्टम से शहर की 402 टेनरियां जोड़ी जाएंगी।


इन टेनरियों से डिस्चार्ज पानी के साथ कितना क्रोमियम गंगा में जा रहा है, इसकी मानीटरिंग सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से हो सकेगी। इससे व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।
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