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राष्ट्रपति को देखने परौंख पहुंच रहे ग्रामीणों के रिश्तेदार
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डेरापुर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पैतृक गांव आने पर उनकी एक झलक पाने को हर कोई बेताब है। कोविंद को देखने व मिलने की आस में दिल्ली, आगरा, कानपुर, फर्रुखाबाद सहित अन्य जनपदों से लोग रिश्तेदारी में परौंख पहुंच रहे हैं। शनिवार को रिश्तेदारी में पहुंचे लोग पूरे दिन गांव की तैयारियां देखते रहे। एक दूसरे से चर्चा करते रहे कि आखिर कहां से राष्ट्रपति आसानी से दिखेंगे।
राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौंख निवासी मिथलेश कुमारी की शादी फर्रुखाबाद में हुई है। कोविंद के आगमन की जानकारी के बाद वह बच्चों के साथ मायके पहुंच गई। मिथलेश ने बताया कि वह घर की छत से ही उन्हें देखेंगी। इसी प्रकार संजीत सिंह आगरा से अपने बुआ के घर पहुंचे। वहीं दिल्ली से प्रदीप सिंह भी अपने मामा के घर पहुंचे हैं। गांव की राजकुमारी कानपुर में अपने बेटे राधाकिशन राठौर के साथ रहती हैं, लेकिन राष्ट्रपति के आगमन की जानकारी पर वह भी गांव पहुंच गईं हैं।
प्रारंभिक शिक्षा की यादों को संजोए पीपल का पेड़
डेरापुर। परौंख गांव में राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कक्षा एक से पांच तक पाठशाला में जिस पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शिक्षा पाई, उसे अफसर भूल गए। सहपाठी ठाकुर जसवंत सिंह बताते हैं कि राष्ट्रपति को इस पेड़ से बेहद लगाव रहा।
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इसके बाद भी जिला प्रशासन की ओर से पीपल के पेड़ की सुध नहीं ली गई। गांव के एक व्यक्ति की निजी संपत्ति होने के चलते पेड़ के चारों ओर बाउंड्री बनाकर अब उसमें भैंस बांधी जा रही हैं। पीपल का पेड़ राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की प्राथमिक शिक्षा की यादों को संजोए हुए हैं।
सजाया गया परिषदीय विद्यालय
कानपुर देहात। राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौंख के बाहर परिषदीय विद्यालय है। महामहिम के आगमन को लेकर परिषदीय विद्यालय को सजा दिया गया है। वहां गांव की उपलब्धियों को संजोए होर्डिंग को लगाया गया है। इसका बीएसए सुनील दत्त, बीईओ उदयनरायण कटियार आदि ने निरीक्षण किया। कर्मचारियों को व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
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राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौंख निवासी मिथलेश कुमारी की शादी फर्रुखाबाद में हुई है। कोविंद के आगमन की जानकारी के बाद वह बच्चों के साथ मायके पहुंच गई। मिथलेश ने बताया कि वह घर की छत से ही उन्हें देखेंगी। इसी प्रकार संजीत सिंह आगरा से अपने बुआ के घर पहुंचे। वहीं दिल्ली से प्रदीप सिंह भी अपने मामा के घर पहुंचे हैं। गांव की राजकुमारी कानपुर में अपने बेटे राधाकिशन राठौर के साथ रहती हैं, लेकिन राष्ट्रपति के आगमन की जानकारी पर वह भी गांव पहुंच गईं हैं।
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प्रारंभिक शिक्षा की यादों को संजोए पीपल का पेड़
डेरापुर। परौंख गांव में राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कक्षा एक से पांच तक पाठशाला में जिस पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शिक्षा पाई, उसे अफसर भूल गए। सहपाठी ठाकुर जसवंत सिंह बताते हैं कि राष्ट्रपति को इस पेड़ से बेहद लगाव रहा।
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इसके बाद भी जिला प्रशासन की ओर से पीपल के पेड़ की सुध नहीं ली गई। गांव के एक व्यक्ति की निजी संपत्ति होने के चलते पेड़ के चारों ओर बाउंड्री बनाकर अब उसमें भैंस बांधी जा रही हैं। पीपल का पेड़ राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की प्राथमिक शिक्षा की यादों को संजोए हुए हैं।
सजाया गया परिषदीय विद्यालय
कानपुर देहात। राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौंख के बाहर परिषदीय विद्यालय है। महामहिम के आगमन को लेकर परिषदीय विद्यालय को सजा दिया गया है। वहां गांव की उपलब्धियों को संजोए होर्डिंग को लगाया गया है। इसका बीएसए सुनील दत्त, बीईओ उदयनरायण कटियार आदि ने निरीक्षण किया। कर्मचारियों को व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।