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मेरी आपबीतीः 'मैं डरी नहीं और मुसीबतों को दे दिया तलाक'

Sun, 06 May 2018 08:53 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 06 May 2018 08:53 AM IST
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Real Story about Newly marriaged girl
एक लड़की की सच्ची कहानी
'मेरी शादी वर्ष-2010 में हुई थी। शुरुआती पांच साल पति और ससुरालियों के साथ काफी हंसी-खुशी से बीते। न पति को और न ही उनके घरवालों को मुझसे कोई दिक्कत थी। लेकिन, अचानक हालात बदलने लगे। एक दिन की बात है पति के दोस्तों के साथ हम सब बैठे थे। बातों-बातों में पति ने सबके सामने कह दिया कि हमने तो कभी दहेज मांगा नहीं और इसके पिता ने अपने मन से कुछ दिया भी नहीं। हंसी-हंसी में कही गई इस बात को मैं मजाक समझकर टाल बैठी। लेकिन वह मजाक नहीं, भविष्य की परेशानियों की शुरुआत थी। इसके बाद ससुराल वाले छोटी-छोटी बातों पर दहेज न मिलने को लेकर ताने मारने लगे। हद तो तब हो गई, जब वो मुझ पर पिता से पैसे मांगने के लिए दबाव डालने लगे। मुझसे मारपीट शुरू कर दी। सास-ससुर ने भी पति का साथ दिया। घर में पिता परेशान होंगे, इसलिए मैंने कोई भी बात उन्हें नहीं बताई। धीरे-धीरे पति ने मेरा घर से निकलना भी बंद करा दिया और नौकरों को हटाकर मुझसे ही सारे काम करवाने लगे। जब सहने की शक्ति खत्म हो गई, तो मैंने अपनी एक सहेली की मदद से वकील से संपर्क किया। वकील की सलाह पर पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने ससुरालियों से पूछताछ की। इससे सभी डर गए और ऐसा न करने की कसमें पुलिस के आगे खाने लगे। लेकिन, मैंने उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया और सबको छोड़ कर अपने पिता के घर रहने लगी। अब मैंने अपनी पति को तलाक दे दिया है। आज एक बड़ी कंपनी में अच्छे पद पर काम कर रही हूं। देश ही नहीं, बल्कि विदेश का भी दौरा करती हूं। आज सोचती हूं कि अगर उस वक्त मैंने अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाई होती तो मेरा जीवन ही नरक हो जाता।'
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हमारे नंबर या ईमेल आईडी पर भेजें अपनी कहानी
रिश्तों की आड़ में अक्सर हमारे आसपास रहने वाले शख्स जिन पर हम खुद से भी ज्यादा भरोसा करते हैं। कभी न कभी, कहीं न कहीं, कोई न कोई एक ऐसा किस्सा सामने आ जाता है जो रिश्तों के बंधन को तार-तार कर देता है। ये कोई फिल्मी दुनिया की या किताबी कहानी नहीं, हमारे बीच कुछ ऐसे इंसानी शैतान रहते हैं जो मासूमियत और नासमझी का फायदा उठाकर छेड़छाड़, कुकर्म, दुष्कर्म जैसे घिनौने अपराधों को जन्म देते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा कभी कुछ हुआ हो तो आप हमसे संपर्क कर अपनी आपबीती साझा कर सकते हैं और देश व समाज को संदेश दे सकते हैं। आपका नाम और पहचान गोपनीय रखा जाएगा। हमारा उद्देश्य रिश्तों में फैली बीमारी को दूर करना और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित समाज देना है। एक कदम आप चलें और 'अपनी आप बीती' हमें बतायें हम आपकी सच्ची कहानी को आपकी पहचान छुपाते हुए समाज तक पहुंचाएंगे ताकि दूसरों के साथ ऐसा न हो और ऐसे लोगों को सबक सिखाया जा सके। हमारे व्हाट्सएप नंबरों पर आप अपनी आपबीती अपनी पहचान को गुप्त रखते हुए लिखकर भेज सकते हैं। इसके अलावा हमारे फेसबुक पेज aukanpur के मैसेज बॉक्स पर जाकर भी हमें संदेश भेज सकते हैं।

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