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बचपन में परिवार से बिछड़ी थी ये बच्ची, लंबे वक्त बाद लगने जा रहे खुशियों के पंख
नवीन सैनी, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 04 Mar 2017 01:51 PM IST
सार
-बस चार दिन की बात, फिर खुशियां ही खुशियां आई
-जिंदगी को सुनहरे पंख लगने की घड़ी
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विस्तार
बचपन में माता-पिता से बिछड़ कर दर-दर की ठोकर खाने वाली रानी की जिंदगी को लंबे वक्त के बाद खुशियों के पंख लगने जा रहे हैं। रानी की जिंदगी के सुहाने सफर की शुरुआत को थोड़ा वक्त बचा है। दूसरी लड़कियों की तरह चार दिन बाद वह भी किसी की बहू तो किसी की पत्नी का फर्ज निभाने लगेगी। रानी के चेहरे पर सुनहरे भविष्य को लेकर खुशी के भाव हैं तो अपनों से बिछड़ने का मलाल भी है।
शार्ट स्टे होम की काउंसलर पुष्पा मौर्या, रानी के व्यवहार की इतना कायल हुईं कि उन्होंने उसका ब्याह रचाने का न सिर्फ फैसला किया बल्कि दूल्हा से लेकर जयमाला का स्थान भी चुना। गायत्री प्रज्ञापीठ में विवाह की रस्में होंगी। इसके बाद बिंदकी के मनीष और रानी एक-दूजे के हो जाएंगे। पुष्पा कहती हैं कि यह उनका दूसरा प्रयास है। इससे पहले भी वह एक और अनाथ लड़की का ब्याह कर चुकी हैं।
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शार्ट स्टे होम की काउंसलर पुष्पा मौर्या, रानी के व्यवहार की इतना कायल हुईं कि उन्होंने उसका ब्याह रचाने का न सिर्फ फैसला किया बल्कि दूल्हा से लेकर जयमाला का स्थान भी चुना। गायत्री प्रज्ञापीठ में विवाह की रस्में होंगी। इसके बाद बिंदकी के मनीष और रानी एक-दूजे के हो जाएंगे। पुष्पा कहती हैं कि यह उनका दूसरा प्रयास है। इससे पहले भी वह एक और अनाथ लड़की का ब्याह कर चुकी हैं।
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उसे बस इतना याद है कि वह पांच साल की थी
रानी की शादी का कार्ड
सात मार्च को जिस रानी के हाथ पीले होने जा रहे हैं, उसे बस इतना याद है कि वह पांच साल की थी तब परिवार से बिछड़ गई। वह कहती है कि काम करते-करते कब बड़ी हो गई, पता ही नहीं चला। बताया कि वह चार साल पहले कटिहार में एक बड़े आदमी के घर में बच्चा खिलाने की नौकरी पर लगी थी। इसके एवज में केवल भोजन दिया जाता था। एक दिन वह चुपचाप बिना बताए वहां से निकल कर एक ट्रेन से यहां तक चली आई।
रानी का कहना है कि भले ही वह अपने माता और पिता से दूर है, लेकिन उनकी याद उसके साथ है। वह हर रोज उन्हें याद करती है। एसडीएम कोर्ट से भेजी गई थी शार्ट स्टे होम शहर के मुराइनटोला स्थित शार्ट स्टे होम में दिसंबर 2012 में यहां रानी को एसडीएम कोर्ट से भेजा गया था। आदर्श रेलवे स्टेशन पर भटकते वक्त जीआरपी ने प्रशासन के हवालेे किया था।
रानी ने पूछताछ में पिता का नाम राजू सिंह और माता का नाम रूपा बताया था। खुद को फतेहपुर में रहने की जानकारी दी थी। पता तस्दीक करने की कोशिश हुई, लेकिन सफलता नहीं मिली। रानी की उम्र 16 साल होने से उसे शार्ट स्टे होम भेज दिया गया था। इसके बाद यह तीन साल तक नारी निकेतन केंद्र में रही। शार्ट स्टे होम की काउंसलर पुष्पा मौर्या ने रानी के वयस्क होने के मामले में हाल ही में सदर एसडीएम की कोर्ट में स्टेहोम में रखने या न रखने का पक्ष रखा था। यहीं पर एसडीएम ने पुष्पा से बात की और फिर बात शादी तक आ पहुंची।
रानी का कहना है कि भले ही वह अपने माता और पिता से दूर है, लेकिन उनकी याद उसके साथ है। वह हर रोज उन्हें याद करती है। एसडीएम कोर्ट से भेजी गई थी शार्ट स्टे होम शहर के मुराइनटोला स्थित शार्ट स्टे होम में दिसंबर 2012 में यहां रानी को एसडीएम कोर्ट से भेजा गया था। आदर्श रेलवे स्टेशन पर भटकते वक्त जीआरपी ने प्रशासन के हवालेे किया था।
रानी ने पूछताछ में पिता का नाम राजू सिंह और माता का नाम रूपा बताया था। खुद को फतेहपुर में रहने की जानकारी दी थी। पता तस्दीक करने की कोशिश हुई, लेकिन सफलता नहीं मिली। रानी की उम्र 16 साल होने से उसे शार्ट स्टे होम भेज दिया गया था। इसके बाद यह तीन साल तक नारी निकेतन केंद्र में रही। शार्ट स्टे होम की काउंसलर पुष्पा मौर्या ने रानी के वयस्क होने के मामले में हाल ही में सदर एसडीएम की कोर्ट में स्टेहोम में रखने या न रखने का पक्ष रखा था। यहीं पर एसडीएम ने पुष्पा से बात की और फिर बात शादी तक आ पहुंची।