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यूपी: पुखरायां आने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे रामनाथ, पालिकाध्यक्ष ने लड़ा था कोविंद के खिलाफ चुनाव
Wed, 23 Jun 2021 10:47 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 23 Jun 2021 10:47 AM IST
सार
भाजपा के टिकट पर सत्यप्रकाश संखवार भोगनीपुर विधानसभा से कई बार चुनाव लड़े, लेकिन हर बार हार हुई। वर्ष-2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रामनाथ कोविंद को मैदान में उतारा था।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : ANI
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विस्तार
वर्ष-2007 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और मौजूदा पुखरायां नगर पालिका अध्यक्ष सत्यप्रकाश संखवार आमने-सामने थे। हालांकि, दोनों को हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, रामनाथ कोविंद पुखरायां आने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे।
भाजपा के टिकट पर सत्यप्रकाश संखवार भोगनीपुर विधानसभा से कई बार चुनाव लड़े, लेकिन हर बार हार हुई। वर्ष-2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रामनाथ कोविंद को मैदान में उतारा था। टिकट न मिलने से नाराज सत्यप्रकाश उमा भारती की पार्टी राष्ट्रीय क्रांति दल के टिकट पर मैदान में उतरे।
चुनाव के दौरान सत्यप्रकाश आशीर्वाद लेने कोविंद के पास गए थे। उन्होंने कहा था कि असफलताओं से डिगना नहीं चाहिए। बाद में सत्यप्रकाश भाजपा में वापस हुए और पार्टी ने नगर पालिका अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया। इसमें उन्हें जीत मिली।
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श्रमिकों ने बढ़ाई मजदूरी
राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौंख में कराए जा रहे कार्यों की अधिकता के चलते श्रमिकों की मांग बढ़ गई है। यह देख श्रमिकों ने अपना मेहनताना 800 से बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया है। श्रमिक रामकुमार, राम सिंह, मुन्ना आदि का कहना है कि उन्हें ओवर टाइम भी करना पड़ रहा है।
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भाजपा के टिकट पर सत्यप्रकाश संखवार भोगनीपुर विधानसभा से कई बार चुनाव लड़े, लेकिन हर बार हार हुई। वर्ष-2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रामनाथ कोविंद को मैदान में उतारा था। टिकट न मिलने से नाराज सत्यप्रकाश उमा भारती की पार्टी राष्ट्रीय क्रांति दल के टिकट पर मैदान में उतरे।
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चुनाव के दौरान सत्यप्रकाश आशीर्वाद लेने कोविंद के पास गए थे। उन्होंने कहा था कि असफलताओं से डिगना नहीं चाहिए। बाद में सत्यप्रकाश भाजपा में वापस हुए और पार्टी ने नगर पालिका अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया। इसमें उन्हें जीत मिली।
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श्रमिकों ने बढ़ाई मजदूरी
राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौंख में कराए जा रहे कार्यों की अधिकता के चलते श्रमिकों की मांग बढ़ गई है। यह देख श्रमिकों ने अपना मेहनताना 800 से बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया है। श्रमिक रामकुमार, राम सिंह, मुन्ना आदि का कहना है कि उन्हें ओवर टाइम भी करना पड़ रहा है।
पत्र न उपहार, स्टेशन पर राष्ट्रपति से सिर्फ मुलाकात
झींझक रेलवे स्टेशन पर राष्ट्रपति से मिलने वाला कोई भी व्यक्ति उन्हें किसी भी प्रकार का पत्र या उपहार नहीं दे सकेगा। सभी पत्र और उपहार लेकर बाद में राष्ट्रपति भवन भेजे जाएंगे। मंगलवार को मंडलायुक्त डॉ. राजशेखर ने स्टेशन के निरीक्षण के दौरान यह जानकारी दी।
इस दौरान एडीजी जोन भानु भास्कर, एडीजी रेलवे पीयूष आनंद, आईजी रेंज मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह समेत अन्य अफसर मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्टेशन से आपात स्थिति में निकलने और सीएचसी जाने वाले रास्ते की जानकारी ली। बुधवार को सभी अधिकारियों को तीन बार रिहर्सल के निर्देश दिए। डीएम ने झींझक में राष्ट्रपति से 38 लोगों के मिलने की जानकारी दी।
राष्ट्रपति को पसंद भाभी के हाथ की कढ़ी व रसियाउर
ओमनगर निवासी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बड़े भाई प्यारेलाल कोविंद और भाभी गंगाजली उनसे मुलाकात के लिए उत्साहित हैं। राष्ट्रपति को भाभी के हाथ की कढ़ी और रसियाउर बहुत पसंद है। बताया कि कोविंद बेहद सरल स्वभाव के हैं। बिहार का राज्यपाल बनने के बाद भी झींझक में घर आकर परिवार का हालचाल लेते रहे। ऊंचे ओहदे पर पहुंचने के बाद भी क्षेत्रीय लोगों को नहीं भूले हैं। बताया कि 1991 में घाटमपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव हारने के बाद रामनाथ कोविंद उदास हो गए थे। तब उन्होंने हौसलाअफजाई करते हुए राजनीति में बने रहने की बात कही थी।
प्यारेलाल ने बताया कि वह परिवार के साथ शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति भवन पहुंचे, तो छोटे भाई को राष्ट्रपति की शपथ लेते देख आंखों से आंसू छलक आए थे। भाभी गंगाजली बताती हैं कि देवर रामनाथ कोविंद को कढ़ी व रसियाउर (गन्ने के रस में पका चावल) बहुत पसंद है। अक्सर वह यही खाते थे। फिलहाल उनकी सेहत ठीक नहीं है। अबकी बार घर नहीं आ पा रहे हैं। घर आते तो कढ़ी बनाकर खिलाती।
इस दौरान एडीजी जोन भानु भास्कर, एडीजी रेलवे पीयूष आनंद, आईजी रेंज मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह समेत अन्य अफसर मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्टेशन से आपात स्थिति में निकलने और सीएचसी जाने वाले रास्ते की जानकारी ली। बुधवार को सभी अधिकारियों को तीन बार रिहर्सल के निर्देश दिए। डीएम ने झींझक में राष्ट्रपति से 38 लोगों के मिलने की जानकारी दी।
राष्ट्रपति को पसंद भाभी के हाथ की कढ़ी व रसियाउर
ओमनगर निवासी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बड़े भाई प्यारेलाल कोविंद और भाभी गंगाजली उनसे मुलाकात के लिए उत्साहित हैं। राष्ट्रपति को भाभी के हाथ की कढ़ी और रसियाउर बहुत पसंद है। बताया कि कोविंद बेहद सरल स्वभाव के हैं। बिहार का राज्यपाल बनने के बाद भी झींझक में घर आकर परिवार का हालचाल लेते रहे। ऊंचे ओहदे पर पहुंचने के बाद भी क्षेत्रीय लोगों को नहीं भूले हैं। बताया कि 1991 में घाटमपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव हारने के बाद रामनाथ कोविंद उदास हो गए थे। तब उन्होंने हौसलाअफजाई करते हुए राजनीति में बने रहने की बात कही थी।
प्यारेलाल ने बताया कि वह परिवार के साथ शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति भवन पहुंचे, तो छोटे भाई को राष्ट्रपति की शपथ लेते देख आंखों से आंसू छलक आए थे। भाभी गंगाजली बताती हैं कि देवर रामनाथ कोविंद को कढ़ी व रसियाउर (गन्ने के रस में पका चावल) बहुत पसंद है। अक्सर वह यही खाते थे। फिलहाल उनकी सेहत ठीक नहीं है। अबकी बार घर नहीं आ पा रहे हैं। घर आते तो कढ़ी बनाकर खिलाती।