फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जानें, रामनाथ कोविंद के बारे में कुछ ‘कही और अनकही बातें’

Sun, 25 Jun 2017 04:33 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 25 Jun 2017 04:33 AM IST
विज्ञापन
ramnath kovind untold stories
रामनाथ कोविंद

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की छवि सरल, सौम्य, मिलनसार व्यक्ति की है। ऊंचे पदों पर विराजमान होने के बावजूद सामाजिक कार्यों के बुलावे पर झट से दौड़े चले आते हैं। कानपुर शहर के नजीराबाद में स्थित अछूतानंद कब्रिस्तान भी इसका एक उदाहरण है। वर्ष 2001 में एक ही मांग पर इसका जीर्णोद्घार करा दिया था। 

ramnath kovind untold stories
रामनाथ कोविंद ने इसी कब्रिस्तान का किया था लोकार्पण

नजीराबाद कब्रिस्तान का कराया था जीर्णोद्घार
कानपुर शहर में एकमात्र हिन्दू कब्रिस्तान अछूतानंद कब्रिस्तान की स्थापना 1931 में स्वामी अछूतानंद जी महाराज ने की थी। राज्यसभा सांसद रहते हुए रामनाथ कोविंद वर्ष 2001 में फूलबाग में रविदास जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शरीक हुए थे। कब्रिस्तान में काफी समस्याएं होने से समाज के लोगों ने उसके जीर्णोद्घार की मांग के लिए ज्ञापन दिया था। कोविंद ने तुरंत उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उनके कोटे से बारादरी (लोगों केबैठने के लिए भवन), कब्रिस्तान परिसर में पाथ-वे और एक गेट का निर्माण कराया गया। इस समय पर कब्रिस्तान की देखरेख की जिम्मेदारी स्वामी अछूतानंद सेवा समिति के पास है।

ramnath kovind untold stories
रामनाथ कोविंद

इसलिए बनाया गया कब्रिस्तान
समिति के महामंत्री सुनील कुरील का कहना है कि दलित हितैषी फर्रुखाबाद के स्वामी अछूतानंद जी महाराज वर्ष 1931 में समाज के एक बच्चे का शव गंगा में प्रवाहित करने गए थे। पंडा से दान-दक्षिणा के लिए बहस होने पर उन्होंने हिंदू कब्रिस्तान बनाने का संकल्प लिया। ब्रिटिश सरकार से 1931 में आदि हिंदू कब्रिस्तान के नाम से जमीन एलाट कराई। फिर यहां कब्रिस्तान बनवाया गया। 1933 में स्वामी जी के देहांत केबाद उनकी समाधि भी बनाई गई।  

विज्ञापन
विज्ञापन

सर्वसमाज के लिए बन गया कब्रिस्तान

ramnath kovind untold stories
रामनाथ कोविंद

दलित समाज के लिए बना कब्रिस्तान आज सर्व समाज का हो गया है। गंगा में शव प्रवाहित होने पर रोक होने की वजह से सभी हिंदू समाज के लोग बच्चों का शव यही दफन करते हैं। क्रिया-कर्म के लिए सभी से पांच सौ रुपये लिए जाते हैं। 

विज्ञापन
ramnath kovind untold stories
रामनाथ कोविंद के गांव में लगा पत्थर

कोविंद जी के  प्रयास से कब्रिस्तान में सुधार कार्य हुए
कर्मचारी पीर मोहम्मद बताते हैं कि बचपन से यहां काम कर रहा हूं। पिता 1940 में कब्रिस्तान में रहने आए थे। कोविंद जी के  प्रयास से कब्रिस्तान में सुधार कार्य हुए। रमेश कुरील ने बताया कि रामनाथ कोविंद जी से सहज निवेदन किया गया था। उन्होंने तत्काल उसकी स्वीकृति दे दी थी। उनकी वजह से से ही यहां सुधार कार्य हुआ है। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed