राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की छवि सरल, सौम्य, मिलनसार व्यक्ति की है। ऊंचे पदों पर विराजमान होने के बावजूद सामाजिक कार्यों के बुलावे पर झट से दौड़े चले आते हैं। कानपुर शहर के नजीराबाद में स्थित अछूतानंद कब्रिस्तान भी इसका एक उदाहरण है। वर्ष 2001 में एक ही मांग पर इसका जीर्णोद्घार करा दिया था।
जानें, रामनाथ कोविंद के बारे में कुछ ‘कही और अनकही बातें’
नजीराबाद कब्रिस्तान का कराया था जीर्णोद्घार
कानपुर शहर में एकमात्र हिन्दू कब्रिस्तान अछूतानंद कब्रिस्तान की स्थापना 1931 में स्वामी अछूतानंद जी महाराज ने की थी। राज्यसभा सांसद रहते हुए रामनाथ कोविंद वर्ष 2001 में फूलबाग में रविदास जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शरीक हुए थे। कब्रिस्तान में काफी समस्याएं होने से समाज के लोगों ने उसके जीर्णोद्घार की मांग के लिए ज्ञापन दिया था। कोविंद ने तुरंत उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उनके कोटे से बारादरी (लोगों केबैठने के लिए भवन), कब्रिस्तान परिसर में पाथ-वे और एक गेट का निर्माण कराया गया। इस समय पर कब्रिस्तान की देखरेख की जिम्मेदारी स्वामी अछूतानंद सेवा समिति के पास है।
इसलिए बनाया गया कब्रिस्तान
समिति के महामंत्री सुनील कुरील का कहना है कि दलित हितैषी फर्रुखाबाद के स्वामी अछूतानंद जी महाराज वर्ष 1931 में समाज के एक बच्चे का शव गंगा में प्रवाहित करने गए थे। पंडा से दान-दक्षिणा के लिए बहस होने पर उन्होंने हिंदू कब्रिस्तान बनाने का संकल्प लिया। ब्रिटिश सरकार से 1931 में आदि हिंदू कब्रिस्तान के नाम से जमीन एलाट कराई। फिर यहां कब्रिस्तान बनवाया गया। 1933 में स्वामी जी के देहांत केबाद उनकी समाधि भी बनाई गई।
सर्वसमाज के लिए बन गया कब्रिस्तान
दलित समाज के लिए बना कब्रिस्तान आज सर्व समाज का हो गया है। गंगा में शव प्रवाहित होने पर रोक होने की वजह से सभी हिंदू समाज के लोग बच्चों का शव यही दफन करते हैं। क्रिया-कर्म के लिए सभी से पांच सौ रुपये लिए जाते हैं।
कोविंद जी के प्रयास से कब्रिस्तान में सुधार कार्य हुए
कर्मचारी पीर मोहम्मद बताते हैं कि बचपन से यहां काम कर रहा हूं। पिता 1940 में कब्रिस्तान में रहने आए थे। कोविंद जी के प्रयास से कब्रिस्तान में सुधार कार्य हुए। रमेश कुरील ने बताया कि रामनाथ कोविंद जी से सहज निवेदन किया गया था। उन्होंने तत्काल उसकी स्वीकृति दे दी थी। उनकी वजह से से ही यहां सुधार कार्य हुआ है।