काली कमाई के अाराेपी पूर्व मंत्री काे अनुप्रिया देंगी टिकट, भाजपाई थामेंगे प्रचार की कमान
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एेसी बढ़ती गई राकेशधर की शख्सियत
1982 में राजनीति की पहली सीढ़ी चढ़ी तो फिर पीछे मुड़कर न देखा। 1982 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। 1985 में जनता पार्टी की टिकट पर राकेश ने पूर्व गृह मंत्री राजेन्द्र त्रिपाठी को हड़िया सीट पर करारी शिकस्त दी। इसी विधानसभा सीट से वर्ष 1989 में जनता दल से लड़े और बसपा के शीतला बिंद को शिकस्त दी। दूसरी जीत के बाद उच्च शिक्षा राज्य मंत्री बनाए गए। हालांकि वर्ष 1991 के उप चुनाव में सजपा प्रत्याशी के रूप में उतरे राकेशधर त्रिपाठी को सपा प्रत्याशी डा. बृजभान यादव से हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 1993 में वह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे और सपा व बसपा के संयुक्त प्रत्याशी जोखूलाल यादव से पराजित हो गए।
भाजपा से पुराना नाता
राकेशधर त्रिपाठी का भाजपा से पुराना नाता रहा है। उन्हाेंने 1996 में बतौर भाजपा प्रत्याशी के रूप में सपा के जोखूलाल यादव को मात करारी शिकस्त दी। भाजपा सरकार में कैबिनेट उच्च शिक्षा मंत्री बने। कुछ और अहम विभाग थे उनके पास। वर्ष 2002 में सपा के महेश नारायण सिंह से उन्हें चुनावी शिकस्त मिली।
बसपा सरकार में लगे दाग ने भेजा जेल
वर्ष 2007 में राकेशधर बसपा प्रत्याशी थे और जीत हासिल की। मायावती की सरकार में उन्हें फिर उच्च शिक्षा मंत्री का ओहदा मिला। यहीं उनपर अाय से अधिक संपत्ति का दाग भी मिला। मामला बढ़ा ताे उन्हें जेल भी जाना पड़ा अाैर हाल ही में वह बेल पर छूटकर जेल से बाहर अाए।
निर्दल ठाेका था ता
2012 में निर्दल उम्मीदवार के तैर पर चुनाव लड़े मगर राकेश को जीत नहीं मिल सकी। 2014 में वह बसपा के टिकट पर भदोही मिर्जापुर सीट से प्रत्याशी बने, मगर भाजपा के वीरेन्द्र सिंह मस्त से चुनाव हार गये।
भतीजे ने डाला पाेस्ट
राकेशधर त्रिपाठी के भतीजे अाैर सैदाबाद के पूर्व ब्लाक प्रमुख ने अपना दल-भाजपा की गठबंधन वाली सीट से पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी काे उम्मीदवार बनाए जाने की बात अपने फेसबुक पर शेयर की है।