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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Rajarama Murder Case Advocate’s Daughter-in-Law Linked to Land Deal Goes Missing Kanpur crime news in Hindi

UP: '50 लाख की सुपारी लेकर की थी हत्या, वायरल ऑडियो मेरा नहीं'; अधिवक्ता राजाराम की छोटी बहू कहीं हुईं गुम

Sat, 07 Feb 2026 03:33 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 07 Feb 2026 03:33 PM IST
सार

Kanpur Murder News: कानपुर में अधिवक्ता राजाराम हत्याकांड के आरोपी ने पुलिस के सामने कबूल किया था कि अधिवक्ता राजाराम की सुपारी 50 लाख रुपये में ली। रुपये की जरूरत थी इसलिए सुपारी तो ले ली लेकिन घर के बाहर सीसीटीवी देखकर डर गया और हत्या करने से इन्कार भी कर दिया था।

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Rajarama Murder Case Advocate’s Daughter-in-Law Linked to Land Deal Goes Missing Kanpur crime news in Hindi
Rajarama Murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कानपुर में अधिवक्ता राजाराम हत्याकांड की अग्रिम विवेचना शुरू होने के बाद से उनकी छोटी बहू रेखा वर्मा कहीं गुम हो गईं हैं। वह पिछले चार दिनों से मुंबई स्थित अपने फ्लैट पर नहीं आईं हैं। रेखा ने अधिवक्ता हत्याकांड से पहले और बाद में विवादित जमीन का एग्रीमेंट किया था। 
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पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि रेखा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुंबई स्थित शाखा में काम करती हैं। मामले में उनकी भूमिका जानने के लिए पूछताछ करने के लिए एक टीम मुंबई गई थी। अपार्टमेंट के चौकीदार ने बताया कि वह चार दिनों से घर नहीं आईं हैं। 
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फोन भी स्विच ऑफ है। बैंक में संपर्क करने पर उनके छुट्टी पर होने की जानकारी मिली। घर पर बेटी थी। हालांकि, वह भी रेखा के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दे सकी। पुलिस उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
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बता दें कि रेखा ने 26 दिसंबर 2018 को करीब 2.2 हेक्टेअर जमीन का क्यू ब्लॉक शारदानगर निवासी मनोज सक्सेना और नवाबगंज के सुक्खुपुरवा निवासी अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिंह से एग्रीमेंट किया था। इसके बाद उन्होंने एक जून 2023 को और अधिवक्ता राजाराम की एक तिहाई जमीन यानी करीब 17 बीघा का एग्रीमेंट बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी से किया। 

 

इस जमीन में से करीब 5.5 बीघा जमीन एनआरआई सिटी के अंदर है। हालांकि इस एग्रीमेंट को 6 नवंबर 2025 को निरस्त कराने के बाद उसी दिन बढ़ी दरों पर दोबारा कर लिया था। पहले जो जमीन का सौदा 65 लाख रुपये में हो रहा था, दोबारा एग्रीमेंट होने पर उसकी कीमत बढ़कर करीब 1.65 करोड़ रुपये हो गई थी।

जीवित हैं 1985 की रजिस्ट्री वाले दिनेश सिंह संतोषी
कानपुर। मृतक राजाराम के बेटे नरेंद्र देव ने बीते दिनों जिस दिनेश सिंह संतोषी के मृत होने का दावा किया था वह पुलिस की तलाश में जीवित निकले। वह बेटी के पास लखनऊ में रह रहे हैं। ऐसे में अब पुलिस उनसे पूछताछ कर इस पुरानी रजिस्ट्री की गुत्थी सुलझाने की कोशिश करेगी।

 

नवाबगंज की गंगा सहकारी आवास समिति निवासी अधिवक्ता नरेंद्र देव वर्मा का आरोप था कि अगस्त 2025 में राकेश तिवारी ने उन्हें एक फर्जी रजिस्ट्री दिखाई। इसके अनुसार उनके पिता राजाराम की ओर से 16 अगस्त 1985 को 37 बीघा जमीन की रजिस्ट्री लखनऊ के रकाबगंज निवासी दिनेश चंद्र संतोषी को करने का दावा किया गया था। 
 

साथ ही 23 अगस्त 1989 में इसी 37 बीघा जमीन के तीन चौथाई हिस्से की रजिस्ट्री आर्यनगर निवासी अनिल गुप्ता को करने की बात लिखी थी। आरोप है कि अधिवक्ता राकेश तिवारी ने उन्हें जो रजिस्ट्री दिखाई थी उसमें क्रेता दिनेश चंद्र का पता काली स्याही से छिपा दिया गया था। अंदेशा है कि ऐसा करने के पीछे मंशा थी कि वह दिनेश चंद्र से संपर्क न कर लें। 

 

हालांकि जब उन्होंने लखनऊ में दिनेश चंद्र के बारे में जानकारी की तो पता चला कि उनका मकान बिक चुका है। साथ ही कुछ साल पहले उनकी मौत भी हो गई है। वहीं, पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि दिनेश सिंह संतोषी जीवित हैं। उनसे जल्द ही रजिस्ट्री के बारे में पूछताछ की जाएगी। 

 

50 लाख की सुपारी लेकर की थी हत्या, वायरल ऑडियो मेरा नहीं...
अधिवक्ता राजाराम की सुपारी 50 लाख रुपये में ली। रुपये की जरूरत थी इसलिए सुपारी तो ले ली लेकिन घर के बाहर सीसीटीवी देखकर डर गया और हत्या करने से इन्कार भी कर दिया था। साथी अंकित ने भरोसा दिलाया कि परिजन खुद राजाराम को मरवाना चाहते हैं। कोई दिक्कत नहीं होगी। इसके बाद वारदात की। यह कबूलनामा हत्यारोपी दिलनियाज ने पुलिस के सामने किया। हालांकि, राकेश तिवारी से जुड़े वायरल ऑडियो को अपना मानने से इन्कार किया।
 

हत्यारोपी दिलनियाज से दोपहर करीब बजे शुरू हुई पूछताछ तीन घंटे तक चली। इसमें उसने लगभग वहीं बयान दिए जो वह पहले से देता आया है। पुलिस को बताया कि बहन की शादी के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी। दोस्त अंकित यादव ने रुपयों की व्यवस्था का भरोसा दिया। 
 

50 लाख रुपये में राजाराम की हत्या की सुपारी दी। राजाराम की पहचान कराने के लिए अंकित उसे अपने साथ उनके चैंबर में ले गया था। वहां से लौटने के बाद उसने ही अधिवक्ता का घर दिखाया। हालांकि वारदात के वक्त सीसीटीवी खराब निकले। कोतवाली प्रभारी जगदीश पांडेय ने बताया कि आरोपी से पूछताछ करने के बाद उसे छोड़ दिया गया है। जरूरत पड़ने पर फिर बुलाया जा सकता है।

कोतवाली प्रभारी ने बताया कि अधिवक्ता राकेश तिवारी से बीते शुक्रवार को नवाबगंज थाने में पूछताछ की गई थी। इसके बाद उन्हें दो बार फिर बुलाया गया था। हालांकि, उन्होंने सेहत खराब होने का हवाला देकर आने से इन्कार कर दिया। ऐसे में अब उन्हें नोटिस देकर बुलाया जाएगा और पूछताछ की जाएगी।

 

अग्रिम विवेचना को प्रभावित करने की नीयत से षड्यंत्र के तहत ऑडियो वायरल किया गया है। राकेश तिवारी ने कई ऐसी संपत्तियां खरीदी हैं जिनमें गवाह गैंगस्टर रामखिलावन और हत्यारोपी राजबहादुर हैं। ऐसे में उनके इन लोगों से संबंधों की जांच की जा रही है।-रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर
 
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