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Kanpur News: ड्रोन को साइबर अटैक से बचाएगी पीएसआईटी की ड्रोन शील्ड एक्स
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प्रोजेक्ट तैयार करने वालीं पीएसआईटी की छात्राएं।
- फोटो : संस्थान
कानपुर। ड्रोन को साइबर अटैक से बचाने के लिए प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (पीएसआईटी) की रिसर्च टीम ने ड्रोनशील्ड एक्स तकनीक विकसित की है। इसकी मदद से ड्रोन साइबर हमलों की पहचान कर उनसे खुद का बचाव करने के साथ ही वर्चुअल हमला भी कर सकेगा। इस तकनीक पर पेटेंट पब्लिश हुआ है।
इस तकनीक के विकास में ग्रुप डायरेक्टर डॉ. मनमोहन शुक्ला, डीन डॉ. आरती सक्सेना, डॉ. अनीता शुक्ला, अंकित जैन के अलावा सीएस, सीएसएआई, एआई-एमएल की स्नेहा त्रिपाठी, कनक कुशवाहा, गौरी श्रीवास्तव और पीहू श्रीवास्तव ने अहम भूमिका निभाई।
डॉ. शुक्ला ने बताया कि ड्रोन शील्ड एक्स तकनीक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों को मिलाकर काम करती है। इसमें छोटे कंप्यूटर जैसे ईएसपी32 और रासबेरी पीआई, जीपीएस मॉड्यूल और टेलीमेट्री रेडियो का उपयोग किया गया है। यह तकनीक जीपीएस स्पूफिंग, कमांड इंजेक्शन और वाई-फाई जैसे वर्चुअल अटैक कर सकती है।
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इन हमलों के दौरान ड्रोन का असली डेटा लगातार मॉनिटर होता है और किसी भी गड़बड़ी पर सिस्टम तुरंत अलर्ट देता है। यह डेटा को सेव भी करती है ताकि बाद में जांच के साथ और सुधार किए जा सके। डेटा को मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।
ग्रुप डायरेक्टर ने बताया कि ड्रोन शील्ड एक्स केवल निगरानी करने वाला सिस्टम नहीं होगा बल्कि खुद हमले भी करेगा। अटैक और डिफेंस दोनों ही इसकी खासियत है क्योंकि इससे भविष्य में ऐसे स्मार्ट साइबर सुरक्षा समाधान विकसित हो सकेंगे जो खुद ड्रोन पर होने वाले हमलों को पहचान कर रोक सकें।
पीएसआईटी के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि ड्रोन शील्ड एक्स छात्रों और शिक्षकों की मेहनत का नतीजा है। यह तकनीक भविष्य में देश के लिए अहम साबित होगी। डॉ. मनमोहन शुक्ला ने कहा कि यह तकनीक देश को सुरक्षित तथा आत्मनिर्भर ड्रोन इकोसिस्टम की दिशा में आगे ले जाएगा।
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इस तकनीक के विकास में ग्रुप डायरेक्टर डॉ. मनमोहन शुक्ला, डीन डॉ. आरती सक्सेना, डॉ. अनीता शुक्ला, अंकित जैन के अलावा सीएस, सीएसएआई, एआई-एमएल की स्नेहा त्रिपाठी, कनक कुशवाहा, गौरी श्रीवास्तव और पीहू श्रीवास्तव ने अहम भूमिका निभाई।
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डॉ. शुक्ला ने बताया कि ड्रोन शील्ड एक्स तकनीक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों को मिलाकर काम करती है। इसमें छोटे कंप्यूटर जैसे ईएसपी32 और रासबेरी पीआई, जीपीएस मॉड्यूल और टेलीमेट्री रेडियो का उपयोग किया गया है। यह तकनीक जीपीएस स्पूफिंग, कमांड इंजेक्शन और वाई-फाई जैसे वर्चुअल अटैक कर सकती है।
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इन हमलों के दौरान ड्रोन का असली डेटा लगातार मॉनिटर होता है और किसी भी गड़बड़ी पर सिस्टम तुरंत अलर्ट देता है। यह डेटा को सेव भी करती है ताकि बाद में जांच के साथ और सुधार किए जा सके। डेटा को मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।
ग्रुप डायरेक्टर ने बताया कि ड्रोन शील्ड एक्स केवल निगरानी करने वाला सिस्टम नहीं होगा बल्कि खुद हमले भी करेगा। अटैक और डिफेंस दोनों ही इसकी खासियत है क्योंकि इससे भविष्य में ऐसे स्मार्ट साइबर सुरक्षा समाधान विकसित हो सकेंगे जो खुद ड्रोन पर होने वाले हमलों को पहचान कर रोक सकें।
पीएसआईटी के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि ड्रोन शील्ड एक्स छात्रों और शिक्षकों की मेहनत का नतीजा है। यह तकनीक भविष्य में देश के लिए अहम साबित होगी। डॉ. मनमोहन शुक्ला ने कहा कि यह तकनीक देश को सुरक्षित तथा आत्मनिर्भर ड्रोन इकोसिस्टम की दिशा में आगे ले जाएगा।