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निर्मल गंगा के लिए पैसा न कौड़ी: बजट न मिलने से छह माह से ठेकेदारों ने बंद कर रखी है नालों-घाटों की सफाई
Sat, 17 Jul 2021 10:07 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 17 Jul 2021 10:07 AM IST
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गंगा बैराज
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में गंगा में गिर रहे नालों की सफाई के लिए सरकार ने डेढ़ साल से भले ही एक धेला न दिया हो, लेकिन इसकी स्वच्छता की निगरानी करने वाली एजेंसियां आदेश-आदेश खेल रही हैं। ताजा फरमान उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ गंगा मिशन ने जारी किया है। कहा है कि नालों की गंदगी गंगा में गई तो अफसरों पर कार्रवाई होगी।
साथ ही गंगा किनारे भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए। आदेश न मानने पर एनजीटी के निर्देशों के तहत कार्रवाई की घुड़की भी दी है। निर्मल गंगा अभियान की हकीकत यह है कि पांच नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है। इनमें बैराज के पास स्थित रामेश्वर घाट, रानी घाट, गोलाघाट, मैस्कर घाट और डबकेश्वर घाट (डबका) नाला शामिल हैं। इन नालों से रोज करीब चार करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा में जा रहा है।
करीब डेढ़ साल पहले वर्ष-2019 में टैप किए गए सीसामऊ नाले के सेल्फी प्वाइंट को देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए थे। उस समय सभी नाले बंद कर दिए गए थे। इनमें से पांच नाले अस्थायी रूप से टैप किए गए थे। इनमें गंगा के किनारे डीवाटरिंग पंप और वहां से वीआईपी रोड की गहरी सीवर लाइन तक पाइप बिछाकर गंदा पानी जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भेजने की व्यवस्था की गई थी।
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साथ ही गंगा किनारे भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए। आदेश न मानने पर एनजीटी के निर्देशों के तहत कार्रवाई की घुड़की भी दी है। निर्मल गंगा अभियान की हकीकत यह है कि पांच नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है। इनमें बैराज के पास स्थित रामेश्वर घाट, रानी घाट, गोलाघाट, मैस्कर घाट और डबकेश्वर घाट (डबका) नाला शामिल हैं। इन नालों से रोज करीब चार करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा में जा रहा है।
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करीब डेढ़ साल पहले वर्ष-2019 में टैप किए गए सीसामऊ नाले के सेल्फी प्वाइंट को देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए थे। उस समय सभी नाले बंद कर दिए गए थे। इनमें से पांच नाले अस्थायी रूप से टैप किए गए थे। इनमें गंगा के किनारे डीवाटरिंग पंप और वहां से वीआईपी रोड की गहरी सीवर लाइन तक पाइप बिछाकर गंदा पानी जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भेजने की व्यवस्था की गई थी।
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कंपनी जवाब दे गई, प्रस्ताव धूल फांक रहा
अस्थायी रूप से टैप नालों का पानी एसटीपी भेजने की व्यवस्था एक साल चली। लेकिन, इस मद में केंद्र या राज्य सरकार की तरफ से भुगतान न होने से ठेकेदार कंपनी सृष्टि ने काम बंद कर दिया। हालात ऐसे बने कि ठेकेदार कंपनी अपने कर्मचारियों को करीब एक साल का वेतन भी नहीं दे पाई।
इस बीच, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने पांचों नालों को स्थायी रूप से टैप करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ गंगा मिशन और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को पिछले साल प्रस्ताव भेजा था, पर इसे अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी। यही नहीं, गंगा से गंदगी निकालने और घाटों पर सफाई के ठेके का भी नवीनीकरण नहीं हुआ, जिससे घाटों से लेकर गंगा तक गंदगी फैली है।
धन मिले तब तो निर्मल करें गंगा
उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के अपर परियोजना निदेशक राजेश कुमार पांडेय की ओर से गंगा को गंदगी से मुक्त करने संबंधी आदेश पर स्थानीय अफसर भी हैरत में हैं। नाम न उजागर करने की शर्त पर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के कुछ अफसरों ने बताया कि हमारा तो काम ही गंगा को स्वच्छ रखने का है, लेकिन इसके लिए शासन से बजट मिलेगा तभी कुछ हो सकता है।
अस्थायी रूप से टैप नालों का पानी एसटीपी भेजने की व्यवस्था एक साल चली। लेकिन, इस मद में केंद्र या राज्य सरकार की तरफ से भुगतान न होने से ठेकेदार कंपनी सृष्टि ने काम बंद कर दिया। हालात ऐसे बने कि ठेकेदार कंपनी अपने कर्मचारियों को करीब एक साल का वेतन भी नहीं दे पाई।
इस बीच, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने पांचों नालों को स्थायी रूप से टैप करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ गंगा मिशन और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को पिछले साल प्रस्ताव भेजा था, पर इसे अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी। यही नहीं, गंगा से गंदगी निकालने और घाटों पर सफाई के ठेके का भी नवीनीकरण नहीं हुआ, जिससे घाटों से लेकर गंगा तक गंदगी फैली है।
धन मिले तब तो निर्मल करें गंगा
उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के अपर परियोजना निदेशक राजेश कुमार पांडेय की ओर से गंगा को गंदगी से मुक्त करने संबंधी आदेश पर स्थानीय अफसर भी हैरत में हैं। नाम न उजागर करने की शर्त पर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के कुछ अफसरों ने बताया कि हमारा तो काम ही गंगा को स्वच्छ रखने का है, लेकिन इसके लिए शासन से बजट मिलेगा तभी कुछ हो सकता है।