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जेल से भगाने का खेल हुआ फेल
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Wed, 18 Feb 2015 02:46 AM IST
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पेशेवर जमानतगीरों के सहारे फर्जीवाड़ा करके बंदियों को जेल से बाहर निकालने का खेल फिर से पकड़ा गया है। ऐसे आठ पेशेवर जमानतगीरों की पहचान हो गई है और उन पर नजर रखी जा रही है।
इनके जरिए जिनको जमानत मिली है उनका भी ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है और संबंधित कोर्ट को भी रिपोर्ट दे दी गई है।
इसमें जिक्र किया गया है कि ये सारे पेशेवर जमानतगीर हैं, इस वजह से इनकी ओर से दाखिल की गई जमानतें मंजूर न की जाएं। पेशेवर जमानतगीरों ने जिन अभियुक्तों की जमानतें ली हैं उनमें से कुछ गैर जिले के अभियुक्त भी हैं।
ऐसे चलता है खेल
दरअसल ये लोग फर्जी दस्तावेजों और जमानतगीरों के सहारे जिले में ही नहीं रमाबाई नगर, अलीगढ़ और उन्नाव समेत कई जिलों में सक्रिय होकर अभियुक्तों को सलाखों से बाहर निकाल लेते हैं।
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जब गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी अभियुक्त नहीं आते हैं तो कोर्ट जमानतगीरों को तलब करती है तब इसकी पूरी पोल खुलती है।
न तो उस पते पर इस नाम का कोई जमानगीर मिलता है और जिस कार या बाइक का नंबर दिया गया है उस पर दूसरे वाहन रजिस्टर्ड होते हैं। यानी सब कुछ फर्जी है।
चार साल पहले ‘अमर उजाला’ ने कचहरी में चल रहे इस गैंग का खुलासा किया था। तब तत्कालीन जिला जज सुधीर सक्सेना ने इस खबर को संज्ञान में लेते हुए फर्जी जमानतगीरों की फोटो कोर्ट परिसर में चस्पा कराते हुए वादकारियों को सचेत रहने को कहा था। तब कई पेशेवर जमानतगीर जेल भेजे गए थे।
बोले जिम्मेदार
यह आठ पेशेवर जमानतगीर अपने कागजात लगाकर बार-बार अलग-अलग अभियुक्तों की जमानतें ले रहे थे। इन सभी के कारनामे कई साल पहले ‘अमर उजाला’ में खोले गए थे।
जानकारी मिली है कि इनमें से कई के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। इसलिए कानूनगो और लेखपालों ने इनके नाम अपनी डायरी में चढ़ा लिए थे। अब ये लोग फिर सक्रिय हुए तो पकड़ में आ गए।
इनके बारे में पूरी जानकारी संबंधित कोर्ट को सत्यापन रिपोर्ट में भेज दी गई हैं।
- अनिल कुमार, तहसीलदार
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इनके जरिए जिनको जमानत मिली है उनका भी ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है और संबंधित कोर्ट को भी रिपोर्ट दे दी गई है।
इसमें जिक्र किया गया है कि ये सारे पेशेवर जमानतगीर हैं, इस वजह से इनकी ओर से दाखिल की गई जमानतें मंजूर न की जाएं। पेशेवर जमानतगीरों ने जिन अभियुक्तों की जमानतें ली हैं उनमें से कुछ गैर जिले के अभियुक्त भी हैं।
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ऐसे चलता है खेल
दरअसल ये लोग फर्जी दस्तावेजों और जमानतगीरों के सहारे जिले में ही नहीं रमाबाई नगर, अलीगढ़ और उन्नाव समेत कई जिलों में सक्रिय होकर अभियुक्तों को सलाखों से बाहर निकाल लेते हैं।
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जब गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी अभियुक्त नहीं आते हैं तो कोर्ट जमानतगीरों को तलब करती है तब इसकी पूरी पोल खुलती है।
न तो उस पते पर इस नाम का कोई जमानगीर मिलता है और जिस कार या बाइक का नंबर दिया गया है उस पर दूसरे वाहन रजिस्टर्ड होते हैं। यानी सब कुछ फर्जी है।
चार साल पहले ‘अमर उजाला’ ने कचहरी में चल रहे इस गैंग का खुलासा किया था। तब तत्कालीन जिला जज सुधीर सक्सेना ने इस खबर को संज्ञान में लेते हुए फर्जी जमानतगीरों की फोटो कोर्ट परिसर में चस्पा कराते हुए वादकारियों को सचेत रहने को कहा था। तब कई पेशेवर जमानतगीर जेल भेजे गए थे।
बोले जिम्मेदार
यह आठ पेशेवर जमानतगीर अपने कागजात लगाकर बार-बार अलग-अलग अभियुक्तों की जमानतें ले रहे थे। इन सभी के कारनामे कई साल पहले ‘अमर उजाला’ में खोले गए थे।
जानकारी मिली है कि इनमें से कई के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। इसलिए कानूनगो और लेखपालों ने इनके नाम अपनी डायरी में चढ़ा लिए थे। अब ये लोग फिर सक्रिय हुए तो पकड़ में आ गए।
इनके बारे में पूरी जानकारी संबंधित कोर्ट को सत्यापन रिपोर्ट में भेज दी गई हैं।
- अनिल कुमार, तहसीलदार