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राष्ट्रपति का कानपुर दौरा: झींझक में बोले- दूसरे दलों के लोगों में भी मेरे लिए ज्यादा आत्मीयता और प्यार
Fri, 25 Jun 2021 11:05 PM IST
शिखा पांडेय
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर देहात
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर देहात
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 25 Jun 2021 11:05 PM IST
सार
झींझक रेलवे स्टेशन अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि सियासी दल आते हैं और जाते हैं। इसमें उनका स्वार्थ है। देश का भी स्वार्थ है। इसलिए आपकी जिम्मेदारी बड़ी है।
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झींझक पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैं राजनीतिक बातें नहीं करता। संवैधानिक पद मिलने के बाद मेरा किसी भी राजनीतिक दल से लगाव नहीं रहा। मेरे लिए कांग्रेस, जनता दल यूनाइटेड, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी आदि दल बराबर हैं। कभी-कभी संतोष होता है कि शायद मेरे से अधिक, जो दूसरे दल के लोग हैं, वो मेरे लिए ज्यादा प्यार और आत्मीयता रखते हैं।
झींझक रेलवे स्टेशन में अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि सियासी दल आते हैं और जाते हैं। इसमें उनका स्वार्थ है। देश का भी स्वार्थ है। इसलिए आपकी जिम्मेदारी बड़ी है। आप लोग इससे ऊपर उठें। सोच-समझकर वोट करें। अपील की कि आप समझदार जागरूक नागरिक बनें, तभी देश के विकास को रफ्तार मिलेगी।
आम लोगों से कहा कि ये देश-प्रदेश-शहर सब आपका है। यहां के विकास की जिम्मेदारी केवल सरकार की ही नहीं है। आप इसके लिए संघर्ष करते रहिए। हर किसी का जीवन संघर्षमय होता है। मैंने भी संघर्ष किया है। कभी हार मत मानिए। सफलता जरूर मिलेगी।
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वसुधैव कुटुंबकम का विचार भूल रहे हैं
राष्ट्रपति ने कहा कि आज लोग कहते हैं कि पुरानी पीढ़ी बहुत खुश थी। अब हर तरफ विकास हो गया है, फिर भी हम कष्ट में हैं। वजह यह कि हम सभी भारतीय संस्कृति के आधार वसुधैव कुटुंबकम की धारणा को भूलते जा रहे हैं। इसके मानवीय मूल्यों में गिरावट आई है।
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झींझक रेलवे स्टेशन में अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि सियासी दल आते हैं और जाते हैं। इसमें उनका स्वार्थ है। देश का भी स्वार्थ है। इसलिए आपकी जिम्मेदारी बड़ी है। आप लोग इससे ऊपर उठें। सोच-समझकर वोट करें। अपील की कि आप समझदार जागरूक नागरिक बनें, तभी देश के विकास को रफ्तार मिलेगी।
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आम लोगों से कहा कि ये देश-प्रदेश-शहर सब आपका है। यहां के विकास की जिम्मेदारी केवल सरकार की ही नहीं है। आप इसके लिए संघर्ष करते रहिए। हर किसी का जीवन संघर्षमय होता है। मैंने भी संघर्ष किया है। कभी हार मत मानिए। सफलता जरूर मिलेगी।
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वसुधैव कुटुंबकम का विचार भूल रहे हैं
राष्ट्रपति ने कहा कि आज लोग कहते हैं कि पुरानी पीढ़ी बहुत खुश थी। अब हर तरफ विकास हो गया है, फिर भी हम कष्ट में हैं। वजह यह कि हम सभी भारतीय संस्कृति के आधार वसुधैव कुटुंबकम की धारणा को भूलते जा रहे हैं। इसके मानवीय मूल्यों में गिरावट आई है।
इसके लिए हम सब जिम्मेदार हैं। आज सौहार्द्र खत्म हो रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जरा जरा सी बात पर आज पति-पत्नी, बाप-बेटे में विवाद होता है। लोग मामूली बातों पर झगड़ते हैं। ये हमारे मानवीय मूल्य नहीं हैं। हम विश्व की बात करते हैं, जिसका आधार हमारी संस्कृति है।
यूपी से राष्ट्रपति बनने का रास्ता खुल गया
राष्ट्रपति ने कहा कि संयोग है कि उत्तर प्रदेश की धरती ने न जाने कितने प्रधानमंत्री दिए, लेकिन राष्ट्रपति नहीं थे। यूपी से मैं पहला राष्ट्रपति बना। यूपी से अब राष्ट्रपति बनने का रास्ता खुल गया है। उन्होंने कहा कि मैं तीन वर्षों से अपनी धरती पर आना चाहता था, लेकिन नहीं आ पा रहा था। पिछले साल कोरोना आ गया। इस बार भी लोग कह रहे थे कि बारिश का मौसम है। मगर मैंने कहा कि जब मैं जाऊंगा तो मेरे अपने वहां आएंगे। वो भी तो बारिश में काम करते हैं। इसलिए आ गया।
यूपी से राष्ट्रपति बनने का रास्ता खुल गया
राष्ट्रपति ने कहा कि संयोग है कि उत्तर प्रदेश की धरती ने न जाने कितने प्रधानमंत्री दिए, लेकिन राष्ट्रपति नहीं थे। यूपी से मैं पहला राष्ट्रपति बना। यूपी से अब राष्ट्रपति बनने का रास्ता खुल गया है। उन्होंने कहा कि मैं तीन वर्षों से अपनी धरती पर आना चाहता था, लेकिन नहीं आ पा रहा था। पिछले साल कोरोना आ गया। इस बार भी लोग कह रहे थे कि बारिश का मौसम है। मगर मैंने कहा कि जब मैं जाऊंगा तो मेरे अपने वहां आएंगे। वो भी तो बारिश में काम करते हैं। इसलिए आ गया।