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प्रोटोकॉल तोड़कर मंच से नीचे आए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, हो गए भावुक
Tue, 26 Feb 2019 12:23 AM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 26 Feb 2019 12:23 AM IST
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सोमवार को कानपुर के दो ऐसे शिक्षण संस्थानों के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित हुए जिनमें वह स्वयं भी छात्र रहे हैं। डीएवी डिग्री कॉलेज से राष्ट्रपति ने कामर्स और लॉ की पढ़ाई की थी जबकि बीएनएसडी इंटर कॉलेज चुन्नीगंज से उन्होंने छठवीं से इंटर तक की शिक्षा ग्रहण की थी।
डीएवी कॉलेज के समारोह में उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में तेजी से हो रहे परिवर्तन के प्रति सजग रहने की जरूरत है। आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी का है। शिक्षण संस्थानों और छात्रों को इस दिशा में आगे बढ़कर सोचना और कार्य करना होगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि समाज और समय जितनी तेजी से बदल रहा है, उतना ही दबाव भी पड़ रहा है। ऐसे में अपने व्यवसाय और समाज के बीच सामंजस्य बनाकर चलने की जरूरत है। पुलवामा हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए वे काफी गमगीन हो गए।
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डीएवी कॉलेज के समारोह में उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में तेजी से हो रहे परिवर्तन के प्रति सजग रहने की जरूरत है। आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी का है। शिक्षण संस्थानों और छात्रों को इस दिशा में आगे बढ़कर सोचना और कार्य करना होगा।
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राष्ट्रपति ने कहा कि समाज और समय जितनी तेजी से बदल रहा है, उतना ही दबाव भी पड़ रहा है। ऐसे में अपने व्यवसाय और समाज के बीच सामंजस्य बनाकर चलने की जरूरत है। पुलवामा हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए वे काफी गमगीन हो गए।
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राष्ट्रपति प्रोटोकॉल तोड़कर मंच से नीचे आ गए
उन्होंने कानपुर देहात के जवान श्याम बाबू और कन्नौज के जवान प्रदीप यादव की शहादत को यादकर उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। इसी तरह बीएनएसडी शिक्षा निकेतन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा पद्धति ऐसी हो जो सिर्फ छात्र को शासक बनाने के प्रति ही प्रेरित न करे, उसे समाज का नेतृत्व करने वाला भी बनाए।
दोनों कार्यक्रमों में उन्होंने अपने छात्र जीवन की कई यादों को समारोह में बैठे छात्रों और शिक्षकों के साथ साझा किया। बीएनएसडी में अपने शिक्षकों को सम्मानित करते हुए वे काफी भावुक हो गए। एक शिक्षक जो काफी बुजुर्ग थे, उन्हें सम्मानित करने के लिए राष्ट्रपति प्रोटोकॉल तोड़कर मंच से नीचे आ गए।
दोनों कार्यक्रमों में उन्होंने अपने छात्र जीवन की कई यादों को समारोह में बैठे छात्रों और शिक्षकों के साथ साझा किया। बीएनएसडी में अपने शिक्षकों को सम्मानित करते हुए वे काफी भावुक हो गए। एक शिक्षक जो काफी बुजुर्ग थे, उन्हें सम्मानित करने के लिए राष्ट्रपति प्रोटोकॉल तोड़कर मंच से नीचे आ गए।