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गर्भवती महिलाएं खुजली को हल्के में न लें, तुरंत कराएं जांच
Mon, 31 Jan 2022 04:32 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 31 Jan 2022 04:32 PM IST
सार
शोध प्रस्ताव में 28 सप्ताह गर्भ धारण से खुजली होने के बिंदु को शामिल किया गया था लेकिन इसे घटाकर अब 24 सप्ताह कर दिया गया है। अगर गर्भवती को 24 सप्ताह गर्भधारण के समय से खुजली होने लगती है तो उसकी जांचें कराई जाएं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
विस्तार
गर्भावस्था के दौरान महिला को खुजली होना लिवर डिसऑर्डर के लक्षण हैं। लिवर में खराबी आने से गर्भस्थ शिशु की मौत हो सकती है और प्रसूता की जान के लिए खतरा हो सकता है। इन दिनों इस तरह के केस भी अस्पतालों में आ रहे हैं। स्थिति के मद्देनजर जीएसवीएम मेडिकल कालेज का स्त्री रोग विभाग इस पर शोध करेगा।
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इथिकल कमेटी ने प्रस्ताव को पास कर दिया है। इसके बाद इस विषय पर काम शुरू हो गया है। इथिकल कमेटी की अध्यक्ष और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा अग्निहोत्री का कहना है कि अमूमन महिलाएं खुजली को गंभीरता से नहीं लेतीं। इससे बाद में नुकसान हो जाता है।
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उन्होंने बताया कि गर्भवती में लिवर डिसऑर्डर का यह महत्वपूर्ण लक्षण है। शोध प्रस्ताव में 28 सप्ताह गर्भ धारण से खुजली होने के बिंदु को शामिल किया गया था लेकिन इसे घटाकर अब 24 सप्ताह कर दिया गया है। अगर गर्भवती को 24 सप्ताह गर्भधारण के समय से खुजली होने लगती है तो उसकी जांचें कराई जाएं।
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खासतौर पर लिवर की जांच जरूरी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पांच से सात प्रतिशत गर्भवतियों में खुजली की समस्या होने लगती है। लिवर में आने वाली खराबी के कारण खुजली का लक्षण उभरता है। अल्ट्रासाउंड की जांच में बहुत सी गर्भवतियों का लिवर फैटी निकलता है।
इससे दिक्कत और बढ़ सकती है। डॉ. अग्निहोत्री ने बताया कि 21 साल से अधिक आयु की गर्भवती महिलाओं को जिनमें खुजली का लक्षण मिल रहा है, उन्हें शोध में शामिल किया जाएगा। इथिकल कमेटी ने इस शोध को महत्वपूर्ण बताया है।